दृढानुशासनाश्चान्ये किन्तु सिद्धान्तवर्जिताः।
न संघरूपिणो ज्ञेयाः सिद्धान्तः संघधारकः॥
भावार्थ :
बहुत सी संस्थाएं दृढानुशासन पालन करने वाली भी हैं, किन्तु सिद्धान्त रहित हैं तो उसे संगठित स्वरुप वाली नहीं कहेंगे। ‘सिद्धान्त’ ही संगठन को स्थिर रखने वाला होता है।

















