भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के रिश्ते को पवित्र और जन्म-जन्मांतर का बंधन माना गया है। इसी रिश्ते की मजबूती, पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए महिलाएं पूरे समर्पण और श्रद्धा के साथ कई व्रत रखती हैं। इन्हीं में से एक है हरतालिका तीज, जिसे सुहागिन महिलाओं के सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में गिना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं। व्रत के साथ जुड़ी आस्था और माता पार्वती की तपस्या की कथा इसे और भी भावनात्मक बना देती है।
हरतालिका तीज का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उन्होंने बालू और शुद्ध मिट्टी से शिवलिंग बनाकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और कठिन साधना में लीन रहीं। माता पार्वती की इसी अटूट श्रद्धा और संकल्प की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। यही वजह है कि इस दिन महिलाएं मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं।
2026 में कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत?
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 7 बजकर 08 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर अगले दिन तक निर्जला व्रत रखती हैं। कई महिलाएं इस दौरान अन्न और जल का पूरी तरह त्याग करती हैं। हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए सुबह 6 बजकर 05 मिनट से 7 बजकर 06 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान विधि-विधान से पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। वहीं, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 32 मिनट से 5 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। माता पार्वती की तरह अपने वैवाहिक जीवन के लिए प्रेम और समर्पण की भावना रखने वाली महिलाएं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती से परिवार में सुख-शांति और दांपत्य जीवन में हमेशा प्रेम बनाए रखने की प्रार्थना करती हैं।












