‘पाञ्चजन्य’ द्वारा आयोजित दो दिवसीय ‘सुशासन संवाद-ओडिशा की उड़ान 2.0’ में देश, समाज, संस्कृति और सुशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक विमर्श हुआ। इसी क्रम में एक विशेष सत्र में ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी जी ने ‘पाञ्चजन्य’ के संपादक हितेश शंकर जी के साथ संवाद किया।
प्रश्न: 12 जून को आपकी सरकार के दो वर्ष पूरे हुए हैं। लेकिन इन दो वर्षों में आप ओडिशा की सबसे बड़ी प्रशासनिक अक्षमता या कमजोरी किसे मानते हैं? और उसे दूर करने के लिए आपकी सरकार की क्या तैयारी और पहल है?
उत्तर: पिछली सरकार बीजू जनता दल के नेतृत्व में लंबे समय तक सत्ता में रही। लेकिन सरकार में रहते हुए हमने देखा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री आम जनता के बीच बहुत कम जाते थे और उनकी समस्याओं को सीधे सुनने की व्यवस्था भी प्रभावी नहीं थी। ऐसा लगता था कि जनता अपनी समस्याएं लेकर आती थी, आवेदन देती थी, लेकिन उन आवेदनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती थी। हमारी सरकार बनने के बाद हमने इस व्यवस्था को बदलने का प्रयास किया। हमने लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं और उनके आवेदनों का समयबद्ध तरीके से समाधान करने की व्यवस्था की। पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में लोग हमारे पास अपनी समस्याएं लेकर आए हैं। हमने यह सुनिश्चित किया कि निश्चित समय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का समाधान हो। आज हम लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक प्राप्त आवेदनों और शिकायतों का समाधान कर चुके हैं। हमारा उद्देश्य केवल आवेदन लेना नहीं, बल्कि समस्या का वास्तविक समाधान करना है।
प्रश्न: आपने स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं की बात की है। गरीब और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए सरकार किस तरह की सहायता उपलब्ध करा रही है?
उत्तर: हमारी सरकार का प्रयास है कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण इलाज से वंचित न रहे। यदि कोई मरीज गंभीर स्थिति में है तो उसे तत्काल एंबुलेंस के माध्यम से सरकारी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है। जरूरत पड़ने पर उसे कटक जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों तक भी भेजा जाता है। जो मरीज घर पर रहकर उपचार करा रहे हैं, जैसे कैंसर, किडनी या अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग, उनके लिए भी सहायता की व्यवस्था की गई है। पात्र मरीजों को उपचार के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ ही आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लोगों को नि:शुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। महिलाओं के लिए भी विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया गया है। हमारा प्रयास है कि सरकारी और योजना से जुड़े निजी अस्पतालों में लोगों को कैशलेस और नि:शुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध हो।
प्रश्न: पूरे देश में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की हत्या को लेकर गहरी बेचैनी और आक्रोश पैदा हुआ था। इस मामले की जांच के लिए नायडू आयोग का गठन हुआ था और आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। लेकिन सरकार बदलने के बाद यह रिपोर्ट विधानसभा के सामने नहीं आ सकी। आपकी सरकार ने जब इस फाइल को तलाशना शुरू किया तो वह उपलब्ध नहीं थी। इतने संवेदनशील मामले में फाइल गायब कैसे हुई? इसके लिए जिम्मेदार कौन है? और दोषियों को सजा दिलाने के लिए सरकार क्या कर रही है?
उत्तर: स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के साथ जो घटना हुई, वह अत्यंत गंभीर थी। इस मामले की जांच के लिए नायडू आयोग का गठन किया गया था और आयोग ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। उसके बाद उस रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखा जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमारी सरकार बनने के बाद हमने जब इस रिपोर्ट की तलाश शुरू की तो काफी समय तक यह जानकारी नहीं मिल सकी कि रिपोर्ट कहां है। हमने कई स्तरों पर इसकी खोज की। लगभग छह महीने तक रिपोर्ट को तलाशने का प्रयास किया गया। अब हमें जानकारी मिली है कि इस मामले से संबंधित कुछ दस्तावेज और फाइल जांच के दायरे में हैं। इसलिए जब तक पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक मैं इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं कर सकता। लेकिन मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि इस मामले की पूरी जांच होगी। फाइल कहां गई, किसने गायब की, क्यों गायब की और इसके पीछे कौन जिम्मेदार है- इन सभी सवालों के जवाब सामने आएंगे। किसी भी परिस्थिति में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार इस मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रश्न: ओडिशा के जनजातीय क्षेत्रों में आज भी धर्मांतरण की समस्या की खबरें सामने आती रहती हैं। आप इस समस्या की व्यापकता और चुनौती को किस रूप में देखते हैं? और इससे निपटने के लिए आपकी सरकार क्या कदम उठा रही है?
उत्तर: धर्मांतरण एक गंभीर विषय है। एक तरफ धर्मांतरण के प्रयास होते हैं और दूसरी तरफ यह भी देखा गया है कि जहां विकास नहीं पहुंचता, वहां लोगों की कमजोर परिस्थितियों का फायदा उठाकर उन्हें प्रभावित करना आसान हो जाता है। इसलिए हमारी सरकार का मानना है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों का सामाजिक और आर्थिक विकास होना चाहिए। जब लोगों की आय बढ़ेगी, जीवन स्तर बेहतर होगा और उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी तो वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन के प्रति कम संवेदनशील होंगे। कई क्षेत्रों में लोगों के पास रहने के लिए घर नहीं था, पीने का पानी नहीं था, सड़कें नहीं थीं, स्वास्थ्य और शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। ऐसी परिस्थितियों का फायदा उठाकर प्रलोभन के माध्यम से धर्मांतरण की कोशिशें होती थीं। इसलिए हमारी प्राथमिकता है कि दूर-दराज के क्षेत्रों तक सड़क, पेयजल, आंगनबाड़ी, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका की सुविधाएं पहुंचाई जाएं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से भी विशेष रूप से जनजातीय समुदायों के लिए घर, पानी, स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रश्न: क्या धर्मांतरण रोकने के साथ-साथ जनजातीय समाज की आस्था, अस्मिता, पहचान, परंपरा और अपनी जड़ों से जुड़ाव को बनाए रखने की दिशा में भी आपकी सरकार काम कर रही है?
उत्तर: हमारा मानना है कि विकास के साथ शिक्षा और संस्कार भी जरूरी हैं। जब जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की अच्छी व्यवस्था होगी और बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ा जाएगा तो उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। हम जनजातीय क्षेत्रों में गुरुकुल जैसी शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं, जहां बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार भी मिलें। पहले बड़ी संख्या में जनजातीय विद्यार्थी कुछ कक्षाओं के बाद पढ़ाई छोड़ देते थे। हमने यह पता लगाने का प्रयास किया कि आखिर वे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। इसके बाद ऐसे विद्यार्थियों को स्कूल में बनाए रखने के लिए विभिन्न योजनाएं शुरू की गईं। हमने विद्यार्थियों को प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की है। उदाहरण के तौर पर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को 5,000 रुपये तक की सहायता दी जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आ रही है।
प्रश्न: देश जब ओडिशा की ओर देखता है तो दो तस्वीरें दिखाई देती हैं। एक तरफ राज्य के पास प्राकृतिक और खनिज संसाधनों की प्रचुरता है, वहीं दूसरी तरफ गरीबी और अभाव से जूझता ओडिशा भी दिखाई देता है। इन दोनों तस्वीरों को कैसे जोड़ा जाएगा? राज्य के संसाधनों की प्रचुरता को आम व्यक्ति की संतुष्टि और उसके जीवन की समस्याओं के समाधान का माध्यम कैसे बनाया जाएगा?
उत्तर: पिछली सरकार की प्राथमिकता लंबे समय तक वोट बैंक की राजनीति रही। विकास और बुनियादी सुविधाओं पर उतना ध्यान नहीं दिया गया, जितना दिया जाना चाहिए था। हमारी सरकार बनने के बाद हमने राजनीति से अधिक विकास को प्राथमिकता दी है। हमारा उद्देश्य है कि राज्य के संसाधनों का लाभ आम जनता तक पहुंचे। ओडिशा के विकास के लिए हमने इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष जोर दिया है। राज्य के बजट में भी बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़ी राशि का प्रावधान किया गया है। सड़क, बिजली, रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग, बंदरगाह और औद्योगिक क्षेत्र- हर क्षेत्र में विकास का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। डबल इंजन सरकार होने का भी हमें लाभ मिल रहा है। केंद्र सरकार की ओर से ओडिशा को बड़ी मात्रा में सहायता और निवेश मिल रहा है। रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग, बंदरगाह और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में केंद्र और राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे अस्पताल बनें, डॉक्टर और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, रोजगार के अवसर पैदा हों और लोगों की आजीविका मजबूत हो।
प्रश्न: महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में आपकी सरकार की क्या प्राथमिकताएं हैं?
उत्तर: महिला सशक्तिकरण हमारी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तो परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे। इसी दिशा में हमने सुभद्रा योजना शुरू की है। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर वर्ष 10,000 रुपये की सहायता दो किस्तों में दी जा रही है। हमारा उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। हम चाहते हैं कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे- चाहे वह महिला हो, जनजातीय समाज हो, गरीब परिवार हो या ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति। यही हमारी सरकार के सुशासन और विकास का मूल उद्देश्य है।















