आज के दौर में जब किसी भी फिल्म की सफलता के लिए बड़े- बड़े स्टार, विज्ञापन, करोड़ों रुपए का प्रचार अभियान को महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे समय में हनुमान अंश फिल्म इसी सोच को चुनौती देती है और बताती है कि बिना करोड़ों रुपए के प्रचार अभियान के भी कोई फिल्म अपने कंटेंट के बल पर सफल सिद्ध हो सकती है।
आज फिल्म मेकर्स फिल्म को चलाने के लिए बड़ी स्टार कास्ट के साथ कॉन्ट्रोवर्सी , हिंसा, उत्तेजक दृश्यों, आइटम सॉन्ग को आवश्यक मानते हैं। पर हनुमान अंश ने बता दिया कि बिना किसी कॉन्ट्रोवर्सी , बिना प्रमोशन, बिना बड़े बजट, बगैर स्टार भी दर्शकों की जुबान और प्रतिक्रिया द्वारा कोई फिल्म कमाल कर सकती है। लोगों का प्यार और जुबान ही इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बनी।
यदि बात करे बॉक्स ऑफिस की तो बॉक्स ऑफिस पर आमतौर से किसी फिल्म की किस्मत पहले हफ्ते में तय होने लगती है। लेकिन ‘हनुमान अंश’ ने इस सोच,इस पैटर्न को गलत साबित कर दिया। फिल्म की शुरुआत बेहद धीमी गति से हुई, लेकिन तीसरे हफ्ते में अचानक ऐसी रफ्तार पकड़ी कि हर कोई इसके बॉक्स ऑफिस सफर की चर्चा करने लगा।
दर्शकों की तारीफ से आया टर्निंग प्वाइंट
फिल्म की शुरुआत महज 10 लाख रुपये की ओपनिंग से हुई थी। पहले हफ्ते में भी कमाई करीब 80 लाख रुपये के आसपास रही और दूसरे हफ्ते में तो कलेक्शन और भी नीचे चला गया। तब इस विपरीत समय में लग रहा था कि फिल्म अब सिनेमाघरों में ज्यादा लंबा सफर तय नहीं कर पाएगी। लेकिन यही आता है टर्निंग पॉइंट जहाँ जाकर तीसरे हफ्ते में कहानी पूरी तरह बदल जाती है। इस बदलाव और फिल्म को मिली सफलता की असली वजह बनी वर्ड ऑफ माउथ । दर्शकों की तारीफ, प्रतिक्रिया जिसने फिल्म को चर्चा में ला दिया।
‘हनुमान अंश’ की सबसे बड़ी ताकत है इसको मिला लोगों का प्यार। जिन भी लोगों ने थिएटर में फिल्म देखी, उन्होंने सोशल मीडिया और अपने परिचितों के बीच इसकी तारीफ,इसकी चर्चा करनी शुरू की। धीरे-धीरे यह चर्चा यह तारीफ, यह अनुभव उन दर्शकों तक पहुंच गए जो शुरुआत में फिल्म के बारे में जानते तक नहीं थे। यही वजह रही कि तीसरे हफ्ते में सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या यकायक बढ़ने लगी। सैकनील्क की रिपोर्ट्स के अनुसार शनिवार को 9. 25करोड़ कमा फिल्म ने 23 दिनों में 27.38 करोड़ का बिजनेस कर लिया है।
छोटा बजट और बेहतरीन स्क्रिप्ट
फिल्म की दूसरी बड़ी खासियत है इसका छोटा बजट पर बेहतरीन स्क्रिप्ट और संगीत। रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘हनुमान अंश’ करीब एक लाख अस्सी हजार से 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी है। यानी फिल्म को बड़ी स्टारकास्ट, भारी-भरकम प्रचार या करोड़ों रुपये के विज्ञापन अभियान का सहारा नहीं मिला। इसके बावजूद दर्शकों ने इसे आगे बढ़ाया।
फिल्म का विषय आध्यात्मिक है। इस विषय का सरलता,सादगी के साथ इसका पर्दे पर प्रस्तुतीकरण भी इसकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता दिखाई देता है।
नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित है फिल्म
‘हनुमान अंश’ आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक सफर से जुड़ी कहानी को पूरी आस्था के साथ परदे पर उतारती है। फिल्म के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी है। विशाल चतुर्वेदी ने बाबा की जीवनी को स्क्रीन पर उतारने से पहले कई सालों तक रिसर्च कीऔर स्क्रिप्ट तैयार की । पर संत के जीवन पर आधारित इस फिल्म में पैसा लगाने के लिए निवेशक नहीं मिले ।बाद में कुछ लोगो का साथ मिला और फिल्म तैयार हुई। फिल्म में शोभिनव सत्या ने बाबा के किरदार को पर्दे पर प्रस्तुत किया है। वह एक स्थापित अभिनेता नहीं है इसके बावजूद उन्होंने पूरी आस्था,सहजता और विश्वास के साथ अपने किरदार को जिया है इसीलिए उनका अभिनय वास्तविक सा लगता है।थिएटर में लोग उनके प्रति श्रद्धानवत हो रहे और लोगों को उनमें बाबा की झलक देखने को मिल रही। यह उनके काम के प्रति समर्पण का कमाल है।फिल्म की सारी टीम के लोगों ने फिल्म बनाते समय रोज सेट पर हनुमान चालीसा का पाठ किया और अनुशासन और शाकाहार का पालन किया।विज्ञापनों की बजाय भंडारे का आयोजन किया जिसके द्वारा बाबा का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया। आज फिल्म सबके सामने है और फिल्म को दर्शकों का एक खास जुड़ाव और सुखद अनुभव मिला।
भावनात्मक पक्ष बेहद मजबूत
फिल्म की कहा नी और भावनात्मक पक्ष ने उन दर्शकों को प्रभावित किया, जिन्होंने इसे देखने के बाद दूसरों को भी फिल्म देखने की सलाह दी। फिल्म में कई दिल को छू जाने वाले भजन है। जिसमें बुंदेलखंडी लड़के सुनील लोधी का एकतारे पर गाया गीत” मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान”बहुत लोकप्रिय हो गया है साथ ही सुनील भी । फिल्म का संगीत और गीत आत्मा को छू जाते हैं और मन को शांत और करुण रस से भिगो जाते है। पूरी फिल्म कई बार आंखों को नम कर जाती है और मन को अद्भुत शांति प्रदान करती है।
आज यह फिल्म लगभग 27 करोड़ की कमाई कर चुकी है।फिल्म ‘हनुमान अंश’ को एक कमजोर शुरुआत वाली फिल्म से बॉक्स ऑफिस की सरप्राइज सक्सेस के रूप में देखा जाने लगा है ।
सफलता सिर्फ कमाई के आंकड़ों पर निर्भर नहीं
इस फिल्म की सफलता की कहानी बताती है कि फिल्म की सफलता सिर्फ बड़ी ओपनिंग ,बड़े 300 से 400 करोड़ के बजट और बड़े सितारों पर निर्भर नहीं होती। यदि दिल से फिल्म बनाई जाए और दर्शकों को कंटेंट पसंद आ जाए, तो वे खुद फिल्म के प्रचारक बन फिल्म को हिट करा सकते हैं।इसी फिल्म के साथ बड़ी स्क्रीनस पर आवारापन और टॉक्सिक जैसी फिल्म चल रही है जो बहुत बड़े बजट और बड़ी स्टार कास्ट वाली है। पर टॉक्सिक 5 दिन में ही हांफने लगी है और आवारापन का भी यही हाल है।लेकिन इस फिल्म का उनसे कोई मुकाबला नहीं है क्योंकि यह फिल्म अपने आप में अपने आध्यात्मिक विषय के साथ भावनाओं और संवेदनाओं के प्रस्तुतीकरण में अद्भुत है। ‘हनुमान अंश’ की सफलता को सिर्फ कमाई के आंकड़ों से नहीं, बल्कि दर्शकों के प्यार,मेकर्स के जुनून और विश्वास के साथ कहानी की दमदार और भावनात्मक प्रस्तुति के तौर पर देखना ज्यादा सही है जो बताती है वर्ड ऑफ माउथ की ताकत चमत्कार कर सकती है।

















