आईएनएस निपुण: समुद्र की गहराइयों में भारत का स्वदेशी ‘संकटमोचक’
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आईएनएस निपुण: समुद्र की गहराइयों में भारत का स्वदेशी ‘संकटमोचक’

लहरों के पार, गहराइयों में भारत का नया प्रहरी ‘आईएनएस निपुण’

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Sep 1, 2026, 09:09 pm IST
inभारत, रक्षा
भारतीय नौसेना ने 31 अगस्त 2026 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में निस्टार श्रेणी के दूसरे डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निपुण को शामिल किया

भारतीय नौसेना ने 31 अगस्त 2026 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में निस्टार श्रेणी के दूसरे डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) आईएनएस निपुण को शामिल किया

हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों, समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों और पानी के भीतर तेजी से विकसित हो रही सैन्य एवं तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री शक्ति का एक ऐसा आयाम मजबूत किया है। यह युद्धपोतों और पनडुब्बियों की संख्या से कहीं आगे जाकर समुद्र की गहराइयों में प्रभावी हस्तक्षेप और संकट-प्रतिक्रिया की क्षमता से जुड़ा है। मुंबई स्थित नौसेना डॉकयार्ड में 31 अगस्त को स्वदेशी रूप से निर्मित ‘आईएनएस निपुण’ को भारतीय नौसेना में कमीशन किया जाना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। निस्तार श्रेणी का यह दूसरा डाइविंग सपोर्ट वेसल (डीएसवी) है, जो गहरे समुद्र में गोताखोरी, अंडरवॉटर इंटरवेंशन, बचाव, साल्वेज और संकटग्रस्त पनडुब्बियों के चालक दल को सुरक्षित निकालने जैसे अत्यंत जटिल अभियानों में नौसेना की क्षमता को मजबूत करेगा। आईएनएस निपुण की विशेषता यह है कि इसे पारंपरिक अर्थों में केवल एक जहाज मानना इसकी वास्तविक भूमिका को सीमित करना होगा। यह समुद्र के भीतर अभियानों के लिए एक विशेषीकृत तैरते हुए ऑपरेशनल प्लेटफॉर्म के रूप में काम करेगा।

गहरे समुद्र में भारत की नई स्वदेशी शक्ति

आईएनएस निपुण में आधुनिक डाइविंग प्रणालियां, पानी के भीतर हस्तक्षेप की सुविधाएं, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स, डायनेमिक पोजिशनिंग क्षमता तथा विशेष चिकित्सा सुविधाएं हैं यानी समुद्र की सतह पर तैनात रहते हुए यह पोत उन अभियानों का संचालन और समर्थन कर सकता है, जिनका वास्तविक कार्यक्षेत्र समुद्र की सतह से सैंकड़ों मीटर नीचे होता है। 119.4 मीटर लंबा और लगभग 10,500 टन क्षमता वाला आईएनएस निपुण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (एचएसएल), विशाखापत्तनम द्वारा स्वदेशी डिजाइन और निर्माण के आधार पर तैयार किया गया है। नौसेना के अनुसार इसका उद्देश्य गहरे समुद्र में विविध प्रकार के डाइविंग और अंडरवॉटर अभियानों को लंबे समय तक समर्थन देना है। यह 300 मीटर तक की गहराई में डाइविंग अभियानों को समर्थन दे सकता है और संकटग्रस्त पनडुब्बियों के लिए त्वरित बचाव क्षमता उपलब्ध कराता है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में सैचुरेशन डाइविंग शामिल है। सामान्य गोताखोरी में गोताखोरों को बार-बार सतह पर लौटना पड़ता है लेकिन सैचुरेशन डाइविंग में विशेष दबावयुक्त वातावरण के माध्यम से गोताखोरों को लंबे समय तक गहराई में कार्य करने की सुविधा दी जाती है। समुद्र की गहराई में पनडुब्बी, जहाज, पाइपलाइन, केबल अथवा अन्य संरचनाओं की जांच, मरम्मत, निरीक्षण और बचाव जैसे अभियानों में यह क्षमता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आईएनएस निपुण इसी प्रकार के कठिन और समय-संवेदी अभियानों को अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी बनाने के लिए तैयार किया गया है।

सटीकता, सुरक्षा और तकनीकी सामर्थ्य का संगम

आईएनएस निपुण पोत में साइड-डाइविंग स्टेज की सुविधा भी है, जिससे अपेक्षाकृत कम गहराई पर अलग प्रकार के अंडरवॉटर ऑपरेशन किए जा सकते हैं। पानी के भीतर निरीक्षण और हस्तक्षेप के लिए रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स का उपयोग इसकी क्षमता को और बढ़ाता है। ऐसे मानवरहित पानी के भीतर संचालित वाहनों की मदद से उन क्षेत्रों की जांच की जा सकती है, जहां मानव गोताखोरों को भेजना जोखिमपूर्ण हो। इससे समुद्र के तल पर पड़े मलबे, क्षतिग्रस्त संरचनाओं, जहाजों या पनडुब्बियों की स्थिति का आकलन तथा आवश्यक हस्तक्षेप अधिक नियंत्रित ढ़ंग से किया जा सकता है। आईएनएस निपुण की एक और महत्वपूर्ण विशेषता ‘डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम’ है। गहरे समुद्र में गोताखोरी या बचाव अभियान के दौरान जहाज को अपनी स्थिति में अत्यंत सटीकता से बनाए रखना जरूरी होता है। समुद्री धाराएं, तेज लहरें और खराब मौसम जहाज की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं। डायनेमिक पोजिशनिंग तकनीक ऐसे समय में पोत को निर्धारित स्थान पर स्थिर बनाए रखने में सहायता करती है, जिससे गोताखोरों, रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स और बचाव प्रणालियों को सुरक्षित और सटीक ढ़ंग से संचालित किया जा सके। यही क्षमता इसे सामान्य सहायक पोत से अलग कर एक उच्च-विशेषीकृत अंडरवॉटर ऑपरेशन प्लेटफॉर्म बनाती है।

नौसेना की पनडुब्बी बचाव क्षमता का नया आधार स्तंभ

सबसे संवेदनशील भूमिका पनडुब्बी बचाव की है। समुद्र के भीतर किसी पनडुब्बी के दुर्घटनाग्रस्त होने की स्थिति में प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। ऐसी परिस्थिति में बचाव अभियान केवल किसी जहाज को घटनास्थल तक पहुंचाने तक सीमित नहीं होता बल्कि समुद्र की गहराई में पनडुब्बी की सही स्थिति पता लगाने, उसके साथ संपर्क स्थापित करने, चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें चिकित्सकीय सहायता देने जैसी अनेक जटिल प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है। आईएनएस निपुण इस पूरी बचाव संरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है और भारतीय नौसेना के डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकल के लिए मदरशिप के रूप में भी कार्य कर सकता है। इसका महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग हैं। पनडुब्बी जितनी सक्षम और आधुनिक होगी, उसके सुरक्षित संचालन और आपात स्थिति में चालक दल को बचाने की व्यवस्था भी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए। आईएनएस निपुण इस सुरक्षा-श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसकी तैनाती से पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में पनडुब्बी बचाव और अंडरवॉटर हस्तक्षेप के लिए समर्पित क्षमता उपलब्ध होगी जबकि आईएनएस निस्तार पूर्वी नौसैनिक कमान के अंतर्गत कार्य कर रहा है। इस प्रकार दोनों पोत मिलकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी समुद्री तटों पर विशेषीकृत अंडरवॉटर क्षमता का अधिक संतुलित ढ़ांचा तैयार करते हैं।

भारत की बहुआयामी समुद्री शक्ति

आईएनएस निस्तार को जुलाई 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था और वह भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं निर्मित डाइविंग सपोर्ट वेसल था। निस्तार और निपुण के निर्माण से भारत उन चुनिंदा नौसेनाओं की श्रेणी में अपनी स्थिति मजबूत करता है, जिनके पास गहरे समुद्र में जटिल सैचुरेशन डाइविंग और पनडुब्बी बचाव जैसी विशेषज्ञ क्षमताओं का समेकित ढ़ांचा है। निपुण की उपयोगिता केवल सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। समुद्र के भीतर दुर्घटनाग्रस्त जहाजों की खोज, मलबे को हटाने, महत्वपूर्ण समुद्री संरचनाओं की जांच और मरम्मत तथा अन्य अंडरवॉटर साल्वेज अभियानों में भी इसकी भूमिका हो सकती है। प्राकृतिक आपदा, समुद्री दुर्घटना अथवा बड़े मानवीय संकट की स्थिति में इसे आपदा राहत और मानवीय सहायता के लिए भी तैनात किया जा सकता है। इस बहुआयामी उपयोगिता के कारण यह पोत ‘फाइटिंग नेवी’ की युद्धक क्षमता के साथ-साथ भारतीय नौसेना की फर्स्ट रिस्पॉन्डर भूमिका को भी मजबूत करता है।

गहरे समुद्र में जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधाओं का संगम

आईएनएस निपुण की चिकित्सा क्षमता भी उल्लेखनीय है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें आठ बिस्तरों वाला अस्पताल, गहन चिकित्सा इकाई, ऑपरेशन थिएटर और हाइपरबेरिक चिकित्सा सुविधाएं हैं। गहरे समुद्र में काम करने वाले गोताखोरों के सामने दबाव से संबंधित गंभीर चिकित्सकीय जोखिम होते हैं। इसलिए किसी दुर्घटना की स्थिति में घटनास्थल के निकट ही विशेष चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होना जीवनरक्षक साबित हो सकता है। इस दृष्टि से आईएनएस निपुण केवल बचाव अभियान का प्लेटफॉर्म नहीं बल्कि समुद्र की गहराइयों में चिकित्सा-सहायता का मोबाइल केंद्र भी है। इस परियोजना का एक बड़ा पक्ष आत्मनिर्भर भारत से जुड़ा है। आईएनएस निपुण का डिजाइन और निर्माण भारत में किया गया है और इसमें लगभग 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री उपयोग की गई है। एचएसएल ने दोनों निस्तार-श्रेणी के डीएसवी का निर्माण पूरा कर लिया है। यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अत्याधुनिक अंडरवॉटर रेस्क्यू और डाइविंग पोत सामान्य युद्धपोतों की तुलना में कहीं अधिक विशेषज्ञ प्रणालियों की मांग करते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म का देश में डिजाइन और निर्माण भारतीय रक्षा उद्योग की तकनीकी परिपक्वता का संकेत है।

समुद्री खतरों के बीच भारत की अंडरवॉटर रणनीतिक तैयारी

निपुण की कहानी केवल उसके कमीशन होने के दिन से शुरू नहीं हुई। रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2018 में एचएसएल के साथ लगभग 2,393 करोड़ रुपये की लागत से दो डाइविंग सपोर्ट वेसल बनाने का अनुबंध किया था। निस्तार की कील दिसंबर 2019 और निपुण की कील मार्च 2020 में रखी गई थी। व्यापक साज-सज्जा और समुद्री परीक्षणों के बाद एचएसएल ने निपुण को 30 जुलाई 2026 को नौसेना को सौंपा और लगभग एक महीने बाद 31 अगस्त को इसे औपचारिक रूप से कमीशन किया गया। आईएनएस निपुण का सामरिक महत्व उस समय और बढ़ जाता है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, समुद्र के भीतर संचार केबल और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री अवसंरचना की सुरक्षा तथा पनडुब्बी संचालन, इन सभी के लिए समुद्र के नीचे प्रभावी निगरानी और हस्तक्षेप क्षमता आवश्यक होती जा रही है। समुद्री सुरक्षा अब केवल समुद्र की सतह पर जहाजों की मौजूदगी का प्रश्न नहीं है बल्कि समुद्र के नीचे क्या हो रहा है, इसे समझना और आवश्यकता पड़ने पर वहां हस्तक्षेप कर पाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने निपुण की कमीशनिंग को केवल एक समारोह नहीं माना बल्कि उन्होंने वर्तमान समय को महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव का दौर बताते हुए कहा कि समुद्री वातावरण अधिक प्रतिस्पर्धी और चुनौतीपूर्ण हो रहा है तथा खतरों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। उनका स्पष्ट संदेश था कि भविष्य के हर खतरे का सटीक अनुमान लगाना संभव भले न हो लेकिन संभावित खतरों के लिए मजबूत क्षमताएं विकसित करके तैयार रहना संभव है।

समुद्र की गहराइयों में ‘रेजिलिएंट नेवी’ का नया प्रहरी

वास्तव में, यही आईएनएस निपुण की सबसे बड़ी रणनीतिक सीख है कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की संख्या से नहीं बल्कि संकट की घड़ी में प्रतिक्रिया देने की क्षमता से भी तय होते हैं। एक पनडुब्बी दुर्घटना, समुद्र के भीतर किसी महत्वपूर्ण संरचना की क्षति अथवा किसी जहाज के डूबने जैसी स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया के लिए विशेषीकृत संसाधन होना सैन्य शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निपुण ऐसी ही ‘रेजिलिएंट नेवी’ की नींव मजबूत करता है, जो लड़ाई के साथ-साथ दुर्घटना, संकट और आपदा में भी प्रभावी ढ़ंग से काम कर सके। इस दृष्टि से आईएनएस निपुण को केवल एक नया नौसैनिक पोत कहना उचित नहीं होगा। यह भारत की अंडरवॉटर रणनीतिक क्षमता, पनडुब्बी सुरक्षा, स्वदेशी रक्षा-निर्माण और समुद्री संकट-प्रबंधन, चारों क्षेत्रों में एक साथ हुई प्रगति का प्रतीक है। पूर्वी तट पर आईएनएस निस्तार और पश्चिमी तट पर आईएनएस निपुण की मौजूदगी भारत को दो-तटीय विशेषीकृत अंडरवॉटर क्षमता प्रदान करती है। समुद्र की सतह पर बढ़ती नौसैनिक शक्ति के साथ अब भारत समुद्र की गहराइयों में भी अपनी मौजूदगी, प्रतिक्रिया क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत कर रहा है। आईएनएस निपुण का संदेश स्पष्ट है, समुद्री शक्ति की वास्तविक परीक्षा केवल खुले समुद्र में नहीं बल्कि उन गहराइयों में भी होती है, जहां संकट दिखाई नहीं देता, सहायता पहुंचाना कठिन होता है और हर सैकेंड जीवन-मरण का अंतर बन सकता है। ऐसे में निपुण भारतीय नौसेना के लिए सचमुच एक ‘संकटमोचक’ है, जो आवश्यकता पड़ने पर समुद्र की गहराइयों में उतरकर भारत की सामरिक सुरक्षा के साथ-साथ मानव जीवन की रक्षा की जिम्मेदारी भी निभा सकता है।

Topics: डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू व्हीकलडायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टमरिमोटली ऑपरेटेड व्हीकलपनडुब्बी बचाव अभियान‘आत्मनिर्भर भारत’हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेडपाञ्चजन्य विशेषस्वदेशी सामग्रीआईएनएस निपुणहाइपरबेरिक चिकित्साडाइविंग सपोर्ट वेसलमोबाइल अस्पतालनिस्तार श्रेणीसमुद्री रणनीतिक क्षमतासैचुरेशन डाइविंगगोताखोरी
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