नेपाल में बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं से 900 से ज्यादा लोग लापता हैं। बचाव टीमों ने, खासकर ऊपरी त्रिशूली-3ए साइट पर, काम तेज कर दिया है। नेपाली सेना के नेतृत्व में टीमें सुरंग के ऊपरी हिस्से यानी क्राउन हेड तक पहुंच गई हैं। वहां छेद को चौड़ा कर विशेषज्ञों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ अंदर भेजने की तैयारी चल रही है।
स्वतंत्र पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल के मुताबिक नौ परियोजनाओं में 537 कर्मचारी और मजदूर लापता हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन संस्था एनडीआरआरएमए ने कहा कि जलविद्युत परियोजनाओं से 933 मजदूर अभी तक नहीं मिले। रविवार तक मृतकों की संख्या 810 पहुंच गई—नेपाल में 794 और तिब्बत में 16। दोनों देशों में कुल 3048 लोग लापता बताए गए। नेपाल में 2502 और तिब्बत में 546। खोज का काम पांचवें दिन में चल रहा था।
लापता लोगों में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। साथ ही 127 नेपाली नागरिक विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे। भारतीय विदेश मंत्रालय ने रविवार शाम 5:30 बजे बताया कि नेपाल में 149 भारतीय नागरिकों को बचाया जा चुका है। शनिवार रात की सूची में 275 भारतीय नागरिक लापता और 128 भारतीय मूल के लोग संपर्क से बाहर बताए गए थे। रविवार शाम तक भारत ने भारतीय मृतकों की कोई पुष्टि संख्या नहीं दी थी।
ऊपरी त्रिशूली-3ए पर बचाव का काम
मौसम थोड़ा सुधरने से नौ जलविद्युत परियोजनाओं पर बचाव तेज हुआ। ऊपरी त्रिशूली-3ए तक सड़क बंद होने के कारण सेना ने हेलीकॉप्टर से जेसीबी, बुलडोजर और अन्य मशीनें पहुंचाईं। रात भर बारिश के बावजूद मशीनों से काम चला। सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजाराम बस्नेत ने बताया कि सुरंग विशेषज्ञों सहित टीम ने त्रिशूली 3ए का क्राउन हेड ढूंढ लिया। 2×3 फीट का छेद खोदा गया। अंदर करीब सात मीटर व्यास का पानी का सतह दिखा। एक सेना विशेषज्ञ अंदर गया लेकिन जीवन के कोई संकेत नहीं मिले। अब छेद चौड़ा कर और विशेषज्ञों को ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ भेजने की कोशिश हो रही है। रविवार शाम तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में करीब 8500 सेना के जवान तैनात थे।
अन्य परियोजनाओं की स्थिति
ऊपरी त्रिशूली-1 में करीब 300 मजदूर सुरंग में फंसे बताए गए थे। इनमें से 254 को बचा लिया गया। बाकी की तलाश जारी है। ऊपरी त्रिशूली-3बी में पहले 122 लापता बताए गए थे। इनमें से 91 बच गए और 31 अभी भी लापता हैं। लगभग 20,000 सुरक्षा कर्मी नदी किनारे, नष्ट बस्तियों और कीचड़ भरी सुरंगों में जमीन और हवा से खोज कर रहे हैं।
आंकड़ों पर सावधानी
नेपाल के विदेश सचिव अमृत बहादुर राय ने कहा कि प्राथमिकता जिंदगियां बचाना, लापता लोगों को ढूंढना, राहत पहुंचाना और प्रभावित नेपाली तथा विदेशी नागरिकों की मदद करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा कि स्थिति बदल रही है इसलिए आंकड़े ऊपर-नीचे हो रहे हैं। कई सूचियों का मिलान करना पड़ रहा है। विदेशी नागरिकों में भारतीय मूल के लोग ज्यादा हो सकते हैं। कई अमेरिकी, ब्रिटिश, ऑस्ट्रेलियाई और कनाडाई पासपोर्ट वाले भारतीय मूल के यात्री थे। एक 77 सदस्यीय समूह में 53 भारतीय मूल के थे।
तिब्बत में ग्यिरोंग में 546 लापता में 23 देशों के 261 विदेशी शामिल हैं—49 भारतीय, 104 नेपाली, 33 लातवियाई, 18 अमेरिकी, 15 ब्रिटिश, 6 कनाडाई और 6 ऑस्ट्रेलियाई। चीन की तरफ फंसे भारतीय तीर्थयात्री निकल रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दो दिनों में 598 भारतीय चीन से नेपाल आए। चीन की तरफ बचे करीब 900 भारतीय सुरक्षित और संपर्क में हैं।
भारत ने मदद बढ़ाई है। चार राहत उड़ानों में 68.5 टन सामान काठमांडू पहुंचा। 13 सदस्यीय भारतीय सेना की सुरंग बचाव टीम विशेषज्ञ उपकरण के साथ गई। 19 सदस्यों वाली छह फॉरेंसिक टीमें भी भेजी गईं। 230 फीट का एक लेन वाला स्टील ब्रिज बनाने का सामान 16 ट्रकों में नेपाल पहुंच चुका है। सात और बेली ब्रिज का सामान भी भेजा जा रहा है।

















