न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर गार्डन में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर आयोजित ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ के दौरान संघ की स्थापना से लेकर उसके 100 वर्षों की यात्रा का जिक्र किया गया। इसमें बताया गया कि सदियों से भारत पर विदेशियों के औपनिवेशीकरण के चलते भारतीयों के समाज और मन को बुरी तरह से प्रभावित किया गया था। ऐसे में भारत पूरी तरह से बंट चुका था। देश की इस दुर्दशा को देखते हुए 1925 में स्वतंत्रता सेनानी डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने सोचा कि भारतीयों को और अधिक स्वतंत्रता दिलाने के लिए उनका एकीकरण आवश्यक है। इसके बाद उन्होंने संघ की स्थापना की। ताकि समाज का एकीकरण हो। साथ में चरित्र का भी विकास किया जा सके।
संघ के पांच सूत्र
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना समाज के एकीकरण, मूल्यों और समाज की सेवा के लिए की गई। समाज में परिवर्तन के लिए पांच मुख्य स्तंभ निर्धारित किए गए। इसमें पर्यावरण सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव, पारिवारिक मूल्यों का विकास, सांस्कृतिक विकास और नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। संघ के ये पांच सूत्र लगातार समाज की सेवा के लिए विकसित हो रहे हैं। संघ के केंद्र में डॉ मोहन भागवत जी ने वर्ष 1975 में आपातकाल के दौरान देश के लिए काम किया। इसके बाद वह 2009 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 6ठें सरसंघचालक बने। उनके नेतृत्व में संघ ने सामाजिक समरसता स्थापित करने के लिए बहुत कार्य किया।
इस दौरान राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने न केवल समाज के संरक्षण, बल्कि उसके विकास पर जोर दिया। संघ ने इस अवधि में पहली पीढ़ी के साथ पर्यावरण संरक्षण के साथ ही युवाओं की आकाक्षाओं के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर भी कार्य किया। संघ भविष्य़ को देखते हुए कार्य कर रहा है।















