गत 23 अगस्त को नई दिल्ली में संस्कृत सप्ताह महोत्सव-2026 का श्रीगणेश हुआ। संस्कृत सप्ताह महोत्सव का उद्देश्य है देववाणी संस्कृत का प्रचार-प्रसार करना, संरक्षण एवं संवर्धन करना तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के प्रति जनजागरण पैदा करना। इस महोत्सव के अंतर्गत संस्कृत शोभायात्रा निकाली गई। दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग, दिल्ली संस्कृत अकादमी तथा संस्कृत भारती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित शोभायात्रा में सैकड़ों संस्कृत-प्रेमियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, विद्वानों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
शोभायात्रा संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणवः’ से अपराह्न 3 बजे प्रारंभ हुई। कनॉट प्लेस और राजीव चौक की ओर बढ़ते हुए प्रतिभागियों ने ‘जयतु जयतु संस्कृत भाषा’, ‘अस्माकं भाषा संस्कृत’ सहित अन्य संस्कृत नारों का उद्घोष किया। इससे राजधानी का वातावरण संस्कृतमय हो उठा। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल विद्यार्थियों और संस्कृत-प्रेमियों ने भारतीय संस्कृति एवं संस्कृत की गौरवशाली परंपरा का संदेश दिया।
शोभायात्रा में संस्कृत गीतों एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। प्रतिभागियों ने ‘अवनितलं मनसा सततं स्मरणीयम्’, ‘कालिदासो जने जने, कण्ठे कण्ठे संस्कृतम्’ सहित अनेक गीतों की सामूहिक प्रस्तुति दी। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्पवर्षा एवं स्वागत कर प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। शोभायात्रा कनॉट प्लेस स्थित राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर-6 पर पहुंची, जहां सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में विशेष सभा आयोजित हुई। वक्ताओं ने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन तथा आधुनिक समाज में इसकी उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि संस्कृत भारत की समृद्ध ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, साहित्य और सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत वाहक है। संस्कृत सप्ताह महोत्सव के माध्यम से नई पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ने तथा समाज में इसके प्रति गौरव और आत्मीयता की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। शोभायात्रा पुनः ‘प्रणवः’ केंद्रीय कार्यालय पहुंची, जहां उसका समापन हुआ।

















