हिमालय में ग्लेशियर टूटने से आई भीषण बाढ़ के बाद नेपाल और चीन में राहत और बचाव का काम चल रहा है। नेपाल के आपदा प्राधिकरण के मुताबिक, वहां मरने वालों की संख्या कम से कम 675 हो गई है। चीनी सरकारी मीडिया ने तिब्बत में 7 मौतों की पुष्टि की है। कुल मिलाकर मरने वालों की संख्या 682 पहुंच गई है। भारत में भी नेपाल से आने वाली नदियों से 7 शव मिले हैं, जिन्हें बाढ़ पीड़ित माना जा रहा है।
शनिवार को नेपाल और तिब्बत में लापता लोगों की संख्या लगभग 3,000 बताई गई। इनमें 517 विदेशी और नदी के पास हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 933 मजदूर शामिल हैं। बचाव में लगे 45 नेपाली सेना के जवान और 40 पुलिसकर्मी भी लापता हैं।
ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग पर क्या मिला
शुक्रवार को चीनी बचाव दल पहली बार ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग कॉम्प्लेक्स पहुंचा। वहां सिर्फ खंडहर ही बचे थे। बुधवार को वहां के सीसीटीवी फुटेज में पानी और मलबे का बड़ा सैलाब इमारतों और भागते लोगों को निगलते दिखा था। उस इलाके तक बचाव दल शुक्रवार को ही पहुंच पाया।
नेपाल को किस मदद की जरूरत
नेपाल ने कहा है कि उसे सामान्य खोज-बचाव में विदेशी मदद नहीं चाहिए। शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि फिलहाल काठमांडू खुद संभाल सकता है। लेकिन विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बताया कि कुछ खास कामों में मदद चाहिए। जैसे नष्ट हुए पुलों की वजह से बंद परिवहन और संचार सेवाएं दोबारा खोलना, शवों की पहचान, डीएनए टेस्ट, सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना और शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना।
नेपाल ने भारत और चीन से बैली ब्रिज मांगे हैं क्योंकि करीब दो दर्जन पुल टूट चुके हैं। भारत ने तीन उड़ानों से करीब 60 टन राहत सामग्री भेजी है। इसमें कंबल, दवाएं, खाना, पानी शुद्ध करने की गोलियां और सुरंग बचाव टीम शामिल है। चीन ने तिब्बत से पांच सुरंग विशेषज्ञ भेजे हैं।
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रसुवा सुरंग में बचाव
रसुवा में हाइड्रोपावर सुरंग के अंदर 100 से ज्यादा लोग फंसे बताए जा रहे हैं। सेना और पुलिस वहां कीचड़ में खुदाई और ड्रिलिंग कर रहे हैं। 350 से ज्यादा लोगों को पहले ही निकाल लिया गया है। मौसम खराब होने से काम थोड़ी देर रुका, लेकिन शनिवार दोपहर मौसम सुधरने पर फिर शुरू हुआ। बचाव कर्मी कवन कोइराला ने बताया कि कीचड़ इतनी मोटी है कि पैर धंस जाते हैं।
दूसरी झीलें भी बड़ी हो रही
बाढ़ वाले इलाके के ऊपर दो बाधा झीलों पर नजर रखी जा रही है। एक अधिकारी ने कहा कि दोनों झीलें पूरी तरह खाली होने तक खतरा बना रहेगा। सैटेलाइट तस्वीरों में दूसरी झील बड़ी होती दिख रही है और उसका कोई निकास नहीं दिख रहा। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के विश्लेषण में पहली झील का आकार घटता बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वह अस्थिर हो सकती है। इलाके में 100 से ज्यादा ग्लेशियल झीलें हैं।
बीजिंग में शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली बैठक में ग्लेशियर झीलों और लैंडस्लाइड की निगरानी बढ़ाने की बात कही गई। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग गुरूवार को ग्यिरोंग इलाके पहुंचे थे। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णीम वाग्ले ने अनुमान लगाया है कि पुनर्निर्माण के लिए 4 से 5 अरब डॉलर लग सकते हैं। रेड क्रॉस के मुताबिक 90,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। कई शव पहचान से परे हो गए हैं, इसलिए डीएनए सैंपल से पहचान करनी पड़ेगी।
















