गत 25 अगस्त को नई दिल्ली के झंडेवाला स्थित विचार विनिमय न्यास सभागार में पुस्तक ‘ग्रिट एंड ग्लोरी’ का लोकार्पण हुआ। इसके मुख्य अतिथि थे असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और विशिष्ट अतिथि थे पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर। डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत में आज राष्ट्रीयता के जयघोष उच्च स्वर में गूंज रहे हैं, अलगाव की भावना बदलकर आत्मीयता का भाव बढ़ रहा है, हर घर तिरंगा फहर रहा है। इसके पीछे संघ के कार्यकर्ताओं का त्याग और बलिदान है। यह पुस्तक उन्हीं बलिदानी महापुरुषों के बलिदान की गाथा है।
श्री हितेश शंकर ने कहा कि यह पुस्तक पूर्वोत्तर के परिवर्तन से अधिक जागरण की कथा कहती है। इसमें अनुभवजन्य साक्ष्य और आंकड़े हैं। पुस्तक के लेखक श्री अभिजीत जोग ने बताया कि पुस्तक में भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के ऐसे प्रेरणादायी व्यक्तित्वों और आम लोगों की कहानियां प्रस्तुत की गई हैं, जिन्होंने संघर्ष, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास के बल पर विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। इनकी यात्राएं दर्शाती हैं कि साहस और प्रतिबद्धता के माध्यम से सामान्य लोग भी दूसरों के जीवन तथा अपने समुदायों में सार्थक बदलाव ला सकते हैं।
वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्री हरि मारुति मिरासदार ने कहा कि इस पुस्तक के निर्माण में देश के अलग-अलग राज्यों के 175 कार्यकर्ताओं के साक्षात्कार लिए गए। हालांकि अनेक कार्यकर्ता अभी रह गए हैं। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक पूर्वोत्तर भारत में तिरंगा फहराने का वातावरण बनाने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वालों का इतिहास बताती है। कार्यक्रम का आयोजन सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष श्री राजीव तुली और प्रबंध निदेशक श्री रजनीश जिंदल के नेतृत्व में हुआ।

















