वैश्विक धार्मिक नेताओं ने जारी किया 5 बिंदुओं वाला कॉल टू एक्शनवर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलिजियस लीडर्स के तत्वावधान में न्यूयॉर्क में 29 अगस्त को ‘वन वर्ल्ड: वन ह्यूमैनिटी’ समिट हुई। इसमें दुनिया भर के विभिन्न धर्मों के करीब 200 धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया। समिट में एक संयुक्त घोषणा जारी की गई जिसका नाम रखा गया “कॉल टू एक्शन”। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया।
नेताओं ने कहा कि आज मानवता के लिए बहुत महत्वपूर्ण समय है। धर्म में लोगों को जोड़ने और चंगा करने की ताकत है, लेकिन कई बार धार्मिक बातों का इस्तेमाल हिंसा फैलाने, कुछ समुदायों को बाहर रखने और समाज में दरार पैदा करने के लिए भी होता रहा है। चल रहे युद्धों, लोगों के बीच घटते विश्वास और सोशल मीडिया पर फैलती नफरत को देखते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकारें और टेक्नोलॉजी कंपनियां शांति नहीं ला सकतीं। धार्मिक नेताओं की भी नैतिक जिम्मेदारी है कि वे टूटे हुए समाजों को जोड़ने का काम करें।
घोषणा में साफ लिखा गया कि हर इंसान की गरिमा है। कोई भी समुदाय दूसरे से कम मानवीय नहीं है। किसी दूसरे के दर्द को सिर्फ इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वह अपना नहीं है। किसी और की इंसानियत की रक्षा करने से अपने धर्म की मान्यताएं कमजोर नहीं पड़तीं।
पांच मुख्य प्रतिबद्धताएं
समिट में धार्मिक संस्थानों के लिए पांच ठोस प्रतिबद्धताएं तय की गईं:
खुद से शुरू करना
नेताओं ने वादा किया कि वे पहले अपनी संस्थाओं के अंदर की बातें, भाषा और शिक्षाओं को देखेंगे। धर्म का इस्तेमाल किसी को नीचा दिखाने, नफरत या हिंसा को सही ठहराने के लिए नहीं होने देंगे।
एक-दूसरे के साथ खड़ा होना
किसी भी समूह को अपमानित या निशाना बनाया जाए तो भले ही वह दूर हो या अलग धर्म का हो, बोलकर विरोध करेंगे।
संकट आने से पहले रिश्ते बनाना
खासकर युवाओं के बीच अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के लोगों से पहले से संपर्क बढ़ाएंगे ताकि गलतफहमियां समय रहते दूर हो सकें।
साथ मिलकर सेवा करना
भूखे, बीमार, विस्थापित और सताए गए लोगों की मदद में एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करेंगे। सिर्फ अपनी पहचान बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि असली सहयोग के लिए।
भविष्य की जिम्मेदारी लेना
युद्ध, गरीबी, पर्यावरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों पर नैतिक निगरानी रखेंगे। तकनीक इंसान की गरिमा बढ़ाने वाली होनी चाहिए, उसे कमजोर करने वाली नहीं।
स्थानीय स्तर पर अमल
नेताओं से कहा गया कि सिर्फ घोषणा काफी नहीं। हर नेता अपने इलाके में कम से कम एक ठोस काम करेगा। जैसे युवाओं के लिए इंटरफेथ प्लेटफॉर्म बनाना, किसी खास समुदाय की मदद करना या मुश्किल बातचीत शुरू करना। घोषणा में कहा गया कि वैश्विक बयान तभी मायने रखता है जब वह स्थानीय कार्रवाई में बदले।













