मध्य प्रदेश के सतना जिले और चित्रकूट में लगातार हो रही तेज बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई इलाकों में सड़कें और गलियां पानी में डूब गई हैं, तो कई घरों और दुकानों में भी पानी घुस गया है। नदी-नाले उफान पर हैं और हालात ऐसे बन गए हैं कि कुछ जगहों पर लोगों को आने-जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
चित्रकूट में मंदाकिनी नदी इस समय बेहद तेज बहाव के साथ बह रही है। नदी का जलस्तर करीब 30 फीट तक पहुंच गया है। तेज बहाव के चलते रामघाट का करीब 300 मीटर लंबा पुल बह गया। घाट के किनारे बनी कई दुकानें भी पानी में समा गईं। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद प्रशासन ने घाटों और निचले इलाकों में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। चित्रकूट में सती अनुसुइया आश्रम समेत कई धार्मिक स्थलों की ओर जाने वाले रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं। श्रद्धालुओं से नदी और घाटों से दूर रहने की अपील की गई है।
सतना में कई इलाकों में भरा पानी
सतना के नागौद, बिरसिंहपुर, मझगवां, कोटर और कोठी समेत कई इलाकों में बारिश का पानी भर गया है। बिरसिंहपुर के कई मोहल्लों में कमर तक पानी पहुंच गया। पानी घरों में घुसने से लोगों का सामान खराब हो गया और कई वाहन भी डूब गए। नागौद थाने और सिंहपुर चौराहे के पेट्रोल पंप तक पानी पहुंच गया। वहीं कोतवाली चौक से कलेक्ट्रेट जाने वाली सड़क पर पानी भरने के कारण रास्ता बंद करना पड़ा। कोठी क्षेत्र में एक कच्चा मकान गिरने से दो मवेशियों की मौत भी हो गई। बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का काम किया जा रहा है। कुछ जगहों पर छतों पर फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से बाहर निकाला जा रहा है। बारिश का असर रेल यातायात पर भी पड़ा है। चित्रकूट के पास रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से दो ट्रेनें रुक गईं। मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर भी जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। कई जगह गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। बंगाल की खाड़ी में बने चक्रवाती परिसंचरण और मानसून ट्रफ के असर से रीवा संभाग में भी बारिश जारी रहने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, नाले और निचले इलाकों के पास जाने से बचें। राहत और बचाव टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

















