‘वंदे मातरम्’ ने देश में क्रांति की अलख जगाई थी। लेकिन आजादी के आंदोलन के इस ऐतिहासिक गीत को लेकर राजनीति और विवाद क्यों हुआ? इसके केवल दो अंतरे ही क्यों गाए गए? Panchjanya के कार्यक्रम ‘To The Point’ में सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव से बातचीत में IGNCA के सदस्य सचिव सच्चिदानंद जोशी ने वंदे मातरम् के इतिहास, इसके सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़े राजनीतिक विवादों पर विस्तार से बात की। सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् के केवल दो अंतरे गाए, क्योंकि बाकी अंशों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख था और इसे लेकर मोहम्मद अली जिन्ना की आपत्ति को ध्यान में रखा गया। उन्होंने यह भी बताया कि भारत की परंपरा में अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोगों ने भारतीय देवी-देवताओं और सांस्कृतिक परंपराओं को स्वीकार किया है। उन्होंने उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन द्वारा देवी के भजन गाए जाने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि आज का युवा पहले से ज्यादा समझदार है और वह ‘वंदे मातरम्’ का अर्थ भी समझ चुका होगा। साथ ही उन्होंने बदलते भारत की तस्वीर पेश करते हुए कहा- “जो भारत पहले काम मांगता था, नौकरी मांगता था, आज वो खुद काम देता है।”
देखिए ‘To The Point’ का यह खास संवाद और जानिए ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास से लेकर बदलते भारत तक की पूरी कहानी।
















