'युवाओं को उपदेश नहीं, संवाद की जरूरत’: संघ की समन्वय बैठक में युवा पीढ़ी पर विशेष मंथन
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‘युवाओं को उपदेश नहीं, संवाद की जरूरत’: संघ की समन्वय बैठक में युवा पीढ़ी पर विशेष मंथन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक शुक्रवार को विज्ञान विहार आवासीय विद्यालय परिसर, गुडिलोवा में सम्पन्न हुई।

Written byPanchjanyaPanchjanya — edited by Mahak Singh
Aug 21, 2026, 05:09 pm IST
inभारत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रेरित विभिन्न संगठनों की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक शुक्रवार को विज्ञान विहार आवासीय विद्यालय परिसर, गुडिलोवा में सम्पन्न हुई। समाज और राष्ट्र के लिए विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने बैठक में भाग लिया। बैठक में 326 प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था, जिनमें विभिन्न संगठनों का महिला नेतृत्व भी शामिल रहा। 49 महिला प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक में सरसंघचालक श्री मोहन भागवत तथा सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले की विशेष उपस्थिति रही।

तीन दिनों के दौरान देश और समाज की वर्तमान परिस्थितियों, विभिन्न संगठनों द्वारा किए जा रहे कार्यों, उनके अनुभवों, भविष्य की चुनौतियों तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक के सम्बंध में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सी.आर. मुकुंद जी ने पत्रकारों को बताया कि प्राकृतिक आपदाओं के समय समाज आधारित सेवा और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की गई। असम में आई भीषण बाढ़ के दौरान राष्ट्रीय सेवा भारती, भारतीय किसान संघ, नेशनल मेडिकोज ऑर्गेनाइजेशन (NMO), आरोग्य भारती सहित विभिन्न संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए राहत एवं पुनर्वास कार्यों की जानकारी साझा की गई।

संत रविदास जी के 650वीं जयंती के संदर्भ में उनके संदेश के आधार पर सामाजिक समरसता एवं सामाजिक सौहार्द के लिए देशभर में किए गए कार्यक्रमों और समाज से मिले सकारात्मक प्रतिसाद की समीक्षा की गई। इस दिशा में आगे भी कार्य को निरंतर बढ़ाने पर विचार हुआ। उन्होंने बताया कि बैठक में जनसांख्यिकीय परिवर्तन एवं असंतुलन पर भी गंभीर चर्चा हुई। विश्व के अनेक देशों में वृद्ध होती जनसंख्या तथा घटती प्रजनन दर से उत्पन्न चुनौतियों के संदर्भ में भारत की परिस्थितियों पर विचार किया गया। विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में जनसंख्या के अनुपात में हो रहे परिवर्तनों तथा उनके सामाजिक प्रभावों पर चर्चा करते हुए समाज में संतुलन और सौहार्द बनाए रखने के उपायों पर विचार हुआ।

नशामुक्त समाज के लिए व्यापक सामाजिक प्रयास

देश में युवाओं और विद्यार्थियों तक मादक पदार्थों की बढ़ती पहुँच पर बैठक में गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इस समस्या को केवल सरकार या पुलिस के स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे समाज की सहभागिता से हल करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। शिक्षण संस्थानों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों, प्रशासन, पुलिस तथा अन्य संबंधित पक्षों को साथ लेकर नशामुक्त समाज के लिए समन्वित प्रयास करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।

युवाओं की आकांक्षाओं और चिंताओं पर विशेष चर्चा

युवा पीढ़ी की सोच, आकांक्षाओं, सृजनात्मक क्षमता, भविष्य संबंधी चिंताओं तथा राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विस्तृत विचार हुआ। संघ का कार्य बड़ी संख्या में युवाओं के बीच चल रहा है। इस वर्ष संघ के 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने भाग लिया। देशभर की दैनिक शाखाओं में उपस्थित स्वयंसेवकों में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं। युवाओं के साथ केवल उपदेशात्मक संवाद के बजाय उनके साथ प्रत्यक्ष जुड़ाव, उनकी भावनाओं और चिंताओं को समझना तथा संवाद के माध्यम से देश, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के प्रति आत्मीयता विकसित करना आवश्यक बताया गया।

आत्मनिर्भर, पर्यावरण हितैषी और समावेशी विकास

बैठक में भारतीय दृष्टि पर आधारित विकास मॉडल पर भी चर्चा हुई। विकास आत्मनिर्भर, पर्यावरण हितैषी और समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाला होना चाहिए – इस दिशा में आर्थिक क्षेत्र में कार्यरत संगठनों के अनुभवों पर विचार हुआ। कई संगठनों द्वारा विभिन्न प्रकार के समाज उपयोगी कार्य किए जा रहे हैं, जैसे लघु उद्योग भारती द्वारा सूक्ष्म उद्योगों के क्षेत्र में संचालित कौशल विकास केंद्रों के माध्यम से इस वर्ष 41,000 से अधिक लोगों को कौशल प्रशिक्षण दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई।

पंच परिवर्तन और कुटुंब प्रबोधन

संघ शताब्दी वर्ष के संदर्भ में समाज परिवर्तन के लिए निर्धारित ‘पंच परिवर्तन’ के विभिन्न आयामों पर बैठक में विशेष चर्चा हुई। विशेष रूप से कुटुंब प्रबोधन के अंतर्गत भारतीय परिवार व्यवस्था, पारिवारिक मूल्यों तथा पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर विचार हुआ।
पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में केवल प्रस्ताव पारित करने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति और परिवार के दैनिक जीवन में परिवर्तन लाने पर बल दिया गया। जल का विवेकपूर्ण उपयोग, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग और हरित क्षेत्र बढ़ाना जैसे विषय प्रत्येक परिवार के व्यवहार का हिस्सा बनने चाहिए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विस्तृत चर्चा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के समाज पर बढ़ते प्रभाव को लेकर बैठक में विस्तृत प्रस्तुति और चर्चा हुई। AI की सकारात्मक संभावनाओं के साथ उससे जुड़ी सावधानियों और चुनौतियों पर विचार करते हुए इसे भारतीय दृष्टिकोण और भारतीय सामाजिक संदर्भ में देखने की आवश्यकता पर बल दिया गया। तकनीक का उपयोग समाज हित में कैसे हो और उसके संभावित दुष्प्रभावों के प्रति समाज को कैसे जागरूक किया जाए, इस विषय पर आगे भी चिंतन जारी रहेगा।

कार्य विस्तार

संघ प्रेरित 32 संगठनों द्वारा समाज के विविध क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों के विस्तार पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय दृष्टि और समाज केंद्रित चिंतन को समाज के अधिकाधिक क्षेत्रों तक पहुँचाने तथा संगठनात्मक कार्य का विस्तार करने के लिए आगामी वर्ष की योजनाओं पर विचार किया गया।

सह सरकार्यवाह मुकुंद जी ने पत्रकारों के प्रश्नों के उत्तर दिए –

प्रश्न: व्यवस्था में भ्रष्टाचार और विभिन्न सिस्टम की कमियों को लेकर बैठक में क्या चर्चा हुई?

उत्तर: इस विषय को केवल भ्रष्टाचार तक सीमित करके नहीं देखा गया। व्यवस्था में जहाँ-जहाँ कमियाँ हैं, उन्हें ठीक करने के लिए सरकार के साथ-साथ समाज की जागरूकता भी आवश्यक है। NEET जैसे विषय हों अथवा अन्य व्यवस्थागत समस्याएँ, इनके कारण युवाओं में अपने भविष्य को लेकर चिंता उत्पन्न होती है। इस चिंता को समझना और उसका समाधान करना आवश्यक है। केवल विरोध या व्यवधान से समाधान नहीं होगा। सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टि से व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार और समाज—दोनों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न: युवा पीढ़ी में संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संघ क्या करेगा?

उत्तर: संघ का कार्य मुख्य रूप से युवाओं के बीच व्यापक रूप से चल रहा है। इस वर्ष लगभग 21,000 युवा स्वयंसेवकों ने 21 दिवसीय प्रशिक्षण वर्गों में भाग लिया और दैनिक शाखाओं की उपस्थिति में 60 प्रतिशत से अधिक युवा हैं।

युवाओं में संस्कार और सांस्कृतिक मूल्यों का निर्माण केवल भाषणों या पोस्टरों से नहीं हो सकता। उनके साथ निरंतर जुड़ना, उनकी भावनाओं को समझना, संवाद करना तथा भारत की महानता और सांस्कृतिक विरासत को अनुभव के स्तर पर उनके सामने रखना आवश्यक है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, बजरंग दल, हिन्दू जागरण मंच सहित अनेक संगठनों के माध्यम से युवकों और युवतियों के बीच कार्य किया जा रहा है। आज की युवा पीढ़ी की क्षमता और सकारात्मक प्रतिसाद को देखते हुए हमें विश्वास है कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथों में सुरक्षित है।

इसके साथ ही धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक संगठनों को भी युवाओं में सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया गया।

प्रश्न: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी की प्रस्तावित अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन यात्रा का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: यह यात्रा संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर व्यापक वैश्विक संपर्क का हिस्सा है। इसके तीन प्रमुख उद्देश्य हैं।

पहला – भारत, हिन्दू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संबंध में विश्व में व्याप्त भ्रांतियों और दुष्प्रचार के बीच तथ्यपरक एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत करना।

दूसरा – भारत के ऋषि-मुनियों द्वारा दिए गए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और वैश्विक एकात्मता के संदेश को विश्व के विभिन्न समाजों तक पहुँचाना।

तीसरा – विश्व के विभिन्न देशों में रहने वाले हिन्दुओं और भारतीय मूल के लोगों के हितों एवं अधिकारों के विषय में वहाँ के मुख्यधारा समाज से संवाद बढ़ाना।

इस क्रम में डॉ. मोहन भागवत जी न्यूयॉर्क में Universal Oneness कार्यक्रम तथा टोरंटो और लंदन में सामुदायिक नेतृत्व के कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे।

प्रश्न: पंच परिवर्तन में पर्यावरण संरक्षण को लेकर केवल प्रस्ताव या संकल्प से आगे व्यावहारिक रूप से क्या किया जा सकता है?

उत्तर: पंच परिवर्तन की कल्पना लगभग तीन वर्ष पूर्व संघ के शताब्दी वर्ष की योजना बनाते समय की गई थी। हमारा मानना है कि किसी भी व्यवस्थागत परिवर्तन से पहले सामाजिक परिवर्तन आवश्यक है। पर्यावरण संरक्षण केवल प्रकृति को बाहर से बचाने का विषय नहीं है। भारतीय दृष्टि में मनुष्य स्वयं इस संपूर्ण सृष्टि और पर्यावरण का अभिन्न अंग है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति और परिवार अपने दैनिक जीवन में कम से कम तीन स्तरों पर योगदान कर सकता है – जल का विवेकपूर्ण उपयोग, प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और अपने आसपास हरियाली बढ़ाना।

केवल प्रस्ताव पारित करने से परिवर्तन नहीं आएगा। जीवनशैली में परिवर्तन आवश्यक है। इसी संदेश को परिवारों, गांवों और देश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है। व्यक्ति और परिवार के व्यवहार में आया छोटा परिवर्तन भी व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय परिवर्तन का आधार बन सकता है। इस प्रेस वार्ता में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी, अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर जी, प्रदीप जोशी जी, सहित अन्य उपस्थित रहे।

Topics: Dattatreya HosabaleDemographic ImbalanceAll India Coordination MeetingRSS Coordination Meetingराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघRashtriya Swayamsevak SanghRSS meeting
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