भुवनेश्वर : ओडिशा में बाढ़ की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोमवार को जाजपुर और भद्रक जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों का जमीनी स्तर पर दौरा किया। मुख्यमंत्री ने नाव और मोटरसाइकिल के जरिए प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा बाढ़ पीड़ितों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रभावित लोगों तक समय पर आवश्यक सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री का यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ और जलभराव से सामान्य जनजीवन प्रभावित है। जल संसाधन विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य के कई क्षेत्रों में मध्यम स्तर की बाढ़ और जलभराव की स्थिति अगले चार से पांच दिनों तक बनी रह सकती है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बीच विशेष राहत आयुक्त (SRC) की नवीनतम रिपोर्ट ने बाढ़ के व्यापक प्रभाव को सामने रखा है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के छह जिलों में कुल 7,85,199 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। प्रभावित जिलों में बालेश्वर, भद्रक, जाजपुर, क्योंझर, मयूरभंज और केंद्रापड़ा शामिल हैं। विशेष राहत आयुक्त की रिपोर्ट के मुताबिक, इन जिलों के 66 ब्लॉक, 448 ग्राम पंचायत, 1,304 गांव, 10 शहरी स्थानीय निकाय और 64 वार्ड बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। अब तक 2,77,655 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 126 गांव अभी भी जलमग्न या संपर्क से कटे हुए हैं। बाढ़ से 42,216.7 हेक्टेयर फसल क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है।

नाव से जाजपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
मुख्यमंत्री माझी ने जाजपुर जिले में अपने दौरे की शुरुआत कटिया चौक से की और वहां से पातिरी चौक पहुंचे। यहां अन्नपूर्णा मंडप में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने अधिकारियों से बाढ़ की स्थिति, राहत कार्यों और प्रभावित लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी ली। बैठक के बाद मुख्यमंत्री पातिरी के निकट मुख्य सड़क से नाव के जरिए उन इलाकों की ओर रवाना हुए, जो बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्होंने दशरथपुर ब्लॉक के तारापदा, दोभाबिल, रामचंद्रपुर, बलदा और कसपा सहित कई इलाकों का निरीक्षण किया।
इन क्षेत्रों में मुख्यमंत्री ने जलभराव की स्थिति, लोगों की समस्याओं और प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों का प्रत्यक्ष जायजा लिया। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी परेशानियों और तत्काल आवश्यकताओं की जानकारी भी ली। दशरथपुर ब्लॉक में बार-बार आने वाली बाढ़ को देखते हुए मुख्यमंत्री का यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण बैतरणी और उसकी वितरिका कनानी नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे दशरथपुर ब्लॉक के बड़े हिस्से में पानी भर गया है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों, कृषि भूमि, सड़कों और स्थानीय संपर्क व्यवस्था पर असर पड़ा है। अनेक गांवों के लोगों को राहत और आपातकालीन सहायता पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

बाढ़ पीड़ितों से मिले मुख्यमंत्री, राहत शिविर में भोजन की गुणवत्ता जांची
दौरे के दौरान मुख्यमंत्री माझी ने बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने राहत सामग्री के वितरण, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और प्रशासन द्वारा दी जा रही सेवाओं की जानकारी अधिकारियों से ली। तारापदा स्थित एक राहत शिविर में मुख्यमंत्री ने विस्थापित लोगों के लिए तैयार किए जा रहे पके हुए भोजन की गुणवत्ता का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को नियमित रूप से पौष्टिक, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को समय पर पर्याप्त राहत सामग्री, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। उन्होंने प्रशासन को स्थिति की लगातार निगरानी करने और किसी भी नई समस्या की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। माझी ने अधिकारियों से कहा कि राहत अभियान केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को चौबीसों घंटे सतर्क रहने को कहा।
भद्रक में भी बाढ़ की स्थिति का लिया जायजा
जाजपुर के बाद मुख्यमंत्री भद्रक पहुंचे और जिले के विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने जलमग्न इलाकों का दौरा किया और प्रभावित लोगों से बातचीत कर बाढ़ के कारण उत्पन्न समस्याओं की जानकारी ली। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को क्षेत्र में जलस्तर, जलभराव की स्थिति और प्रभावित समुदायों की मौजूदा परिस्थितियों के बारे में जानकारी दी। भद्रक के कई निचले इलाकों में बाढ़ और जलभराव के कारण सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं तथा लोगों की आवाजाही और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच में परेशानी हुई है।
हालांकि, अधिकारियों के अनुसार जाजपुर और भद्रक के कुछ हिस्सों में बारिश कम होने के बाद जलस्तर में गिरावट शुरू हुई है। इसके बावजूद कई इलाके अभी भी जलभराव की चपेट में हैं और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
अगले चार-पांच दिन तक रह सकती है बाढ़ और जलभराव की स्थिति
ओडिशा जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता दिलीप राउत ने कहा कि राज्य में बाढ़ की स्थिति अगले चार से पांच दिनों तक बनी रह सकती है। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से ब्राह्मणी और बैतरणी नदी तंत्र से प्रभावित क्षेत्रों में मध्यम बाढ़ और जलभराव की स्थिति जारी रहने की संभावना है। राउत के अनुसार, बारिश में कमी के बाद जाजपुर और भद्रक में जलस्तर घटने लगा है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी पानी जमा है और जनजीवन पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है।

उन्होंने बताया कि जाजपुर जिले में तटबंधों में हुई दो क्षतियों की मरम्मत का कार्य भी किया जा रहा है। क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने के लिए प्रशासन और संबंधित विभागों की टीमें काम कर रही हैं। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सुवर्णरेखा और जलका नदियों में बाढ़ की स्थिति नहीं है। हालांकि, आने वाले दिनों में यदि दोबारा भारी बारिश होती है तो स्थिति बिगड़ सकती है।
भद्रक में सबसे अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
SRC की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, छह प्रभावित जिलों में भद्रक में सबसे अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। जिले में कुल 1,07,773 लोगों को निकाला गया है। जाजपुर में 77,680, बालेश्वर में 61,418, मयूरभंज में 26,741, केंद्रापड़ा में 2,085 और क्योंझर में 1,958 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। संवेदनशील और जलमग्न इलाकों से लोगों को निकालकर राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना राज्य सरकार की बाढ़ प्रतिक्रिया का प्रमुख हिस्सा रहा है।
रिपोर्ट में छह जिलों के 126 गांवों के अभी भी जलमग्न या संपर्क से कटे होने की जानकारी दी गई है। इनमें बालेश्वर के 60, केंद्रापड़ा के 33, क्योंझर के 14, मयूरभंज के 11 और जाजपुर के आठ गांव शामिल हैं।
जाजपुर, बालेश्वर और भद्रक सबसे अधिक प्रभावित
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार जाजपुर में सबसे अधिक 2,06,272 लोग प्रभावित हुए हैं। इसके बाद बालेश्वर में 2,03,878 और भद्रक में 1,96,240 लोग प्रभावित हुए हैं। केंद्रापड़ा में 1,43,715, क्योंझर में 1,19,953 और मयूरभंज में 26,741 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। बालेश्वर के 12 ब्लॉक, 97 ग्राम पंचायत और 453 गांवों के अलावा दो शहरी स्थानीय निकाय और 19 वार्ड प्रभावित हुए हैं। वहीं जाजपुर में 10 ब्लॉक, 117 ग्राम पंचायत और 270 गांव बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं।
531 राहत शिविरों में 2.78 लाख से अधिक लाभार्थी
राज्य सरकार ने छह प्रभावित जिलों में कुल 531 राहत शिविर खोले हैं। इन शिविरों में करीब 2,78,188 लाभार्थियों को आश्रय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जाजपुर में सबसे अधिक 191 राहत शिविर खोले गए हैं, जहां 77,680 लोगों को सहायता दी जा रही है। बालेश्वर में 103 शिविरों में 61,418 लोगों को रखा गया है, जबकि भद्रक में 90 राहत शिविरों में 1,07,773 लोगों के लिए व्यवस्था की गई है।
क्योंझर में 20, मयूरभंज में 123 और केंद्रापड़ा में चार राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं। प्रशासन ने राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी तेज की है। SRC की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 1,950 क्विंटल चूड़ा, 203.2 क्विंटल गुड़ और 782.8 मीट्रिक टन पशु चारा वितरित किया गया है। प्रभावित परिवारों को 1,079 पॉलीथिन शीट भी उपलब्ध कराई गई हैं। राहत शिविरों में विस्थापित और प्रभावित लोगों के लिए पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने हेतु सामुदायिक रसोई भी संचालित की जा रही हैं।
42 हजार हेक्टेयर से अधिक फसल प्रभावित
बाढ़ ने कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। SRC के प्रारंभिक आकलन के अनुसार छह जिलों में 42,216.7 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। जाजपुर में सबसे अधिक 18,642 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इसके बाद बालेश्वर में 16,000 हेक्टेयर, मयूरभंज में 4,992 हेक्टेयर, भद्रक में 1,623 हेक्टेयर और क्योंझर में 959.7 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जाएगा। किसानों के लिए खेतों की बहाली और कृषि गतिविधियों को दोबारा शुरू करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।
941 मकानों को नुकसान
SRC की प्रारंभिक रिपोर्ट में छह जिलों में कुल 941 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी दी गई है। मयूरभंज में सबसे अधिक 505 मकानों को नुकसान हुआ है। इसके बाद क्योंझर में 367 और बालेश्वर में 69 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। भद्रक, जाजपुर और केंद्रापड़ा के लिए प्रारंभिक आंकड़ों में मकानों के नुकसान की सूचना दर्ज नहीं की गई है। 17 अगस्त तक इन छह जिलों में किसी मानव या पशु की मृत्यु की सूचना रिपोर्ट में दर्ज नहीं की गई है।
ODRAF, NDRF और दमकल दल तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान को मजबूत करने के लिए ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और दमकल विभाग के दल तैनात किए गए हैं। SRC की समेकित रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित जिलों में 39 ODRAF यूनिट, सात NDRF यूनिट और 53 दमकल दल तैनात किए गए हैं। ये दल स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, बचाव कार्य चलाने और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने में सहायता कर रहे हैं। जिला प्रशासन नदी के जलस्तर, तटबंधों और जलमग्न क्षेत्रों पर भी लगातार निगरानी रख रहा है।
राहत, स्वास्थ्य और निगरानी पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी का जाजपुर और भद्रक दौरा राज्य की बाढ़ प्रतिक्रिया के महत्वपूर्ण चरण में हुआ है। कुछ क्षेत्रों में जलस्तर कम होने लगा है, लेकिन कई स्थानों पर व्यापक जलभराव अभी भी बना हुआ है। सरकार का मुख्य जोर संवेदनशील आबादी को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविरों के संचालन, आवश्यक वस्तुओं के वितरण, सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता तथा क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत पर है। जल संसाधन विभाग द्वारा अगले चार से पांच दिनों तक बाढ़ और जलभराव की स्थिति बने रहने की संभावना जताए जाने के बाद प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से संभावित नई बारिश और उसके कारण जलस्तर में होने वाली वृद्धि पर नजर रखने को कहा गया है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित लोगों को राहत और आवश्यक सेवाएं समय पर मिलें तथा स्थिति सामान्य होने तक प्रशासनिक और बचाव दल लगातार सक्रिय रहें।

















