रूस यूक्रेन युद्ध हो या खाड़ी संकट, इन युद्धों के कारण दुनियाभर की सप्लाईचेन बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित हुई है। ऊर्जा सप्लाई की आपूर्ति में दिक्कत आने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम फिर से ऊपर की ओर बढ़ने लगे हैं। मौसम की खराबी और युद्ध दोनों मिलकर अनाज की सप्लाई पर असर डाल रहे हैं।
नोवोरोस्सियस्क पर हमला और काला सागर की नाकेबंदी
मंगलवार को यूक्रेन के ड्रोन हमले में रूस के काला सागर वाले नोवोरोस्सियस्क बंदरगाह के दो बड़े अनाज निर्यात टर्मिनल नष्ट हो गए। इन दोनों की सालाना निर्यात क्षमता करीब 15.6 मिलियन टन है। हमले के बाद इनकी गतिविधियां रोक दी गई हैं।
जुलाई के मध्य से यूक्रेन ने अजोव सागर और केर्च जलडमरूमध्य (जो अजोव सागर को काला सागर से जोड़ता है) पर अनाज ले जाने वाले जहाजों, समुद्री बुनियादी ढांचे और बंदरगाहों पर हमले बढ़ा दिए हैं। इससे रोस्तोव-ऑन-डॉन, तगानरोग, तामन, कावकाज और अब नोवोरोस्सियस्क जैसे बंदरगाहों से रूसी अनाज की आवाजाही काफी कम हो गई है।
रूस ने भी यूक्रेन के ओडेसा क्षेत्र के बंदरगाहों और जहाजों पर हमले किए हैं। ओडेसा, चोरनोमोर्स्क और पिवदेन्नी (पहले युज्नी) वाले ये तीन गहरे पानी के बंदरगाह यूक्रेन के कृषि निर्यात का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा संभालते हैं।
यूरोप में गर्मी और फसलों का नुकसान
इसके साथ यूरोपीय संघ (ईयू) में देर वसंत से लेकर गर्मी तक रिकॉर्ड तोड़ तापमान और सूखा पड़ा है। अमेरिकी कृषि विभाग (यूएसडीए) के अनुमान के मुताबिक ईयू की गेहूं पैदावार 2025-26 के 145.1 मिलियन टन से घटकर इस साल 134.2 मिलियन टन रह सकती है (7.5 प्रतिशत कम)। मक्का 56.8 से 50.2 मिलियन टन (लगभग दो दशक का निचला स्तर), जौ 56.4 से 52.3, जई 8.9 से 8 और राई 7.7 से 7.2 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
इसे भी पढ़ें: विदेश नीति के बहाने देश का मजाक बना रहे राहुल गांधी
दामों पर असर
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का खाद्य मूल्य सूचकांक जुलाई में साढ़े तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। नोवोरोस्सियस्क हमले और रूस के इज्माइल बंदरगाह पर जवाबी हमले के बाद शिकागो बोर्ड ऑफ ट्रेड पर मक्का और गेहूं के दाम 3.8 से 4 प्रतिशत बढ़ गए।
अमेरिका से गेहूं का निर्यात मूल्य अभी 321 डॉलर प्रति टन है, जबकि एक साल पहले 235 डॉलर था। यूरोपीय संघ में 239 से 262, कनाडा में 259 से 292, ऑस्ट्रेलिया में 255 से 291 और अर्जेंटीना में 234 से 239 डॉलर प्रति टन हो गया है।
निर्यात और शिपिंग की समस्या
USDA के आंकड़ों के अनुसार 2025-26 में रूस और यूक्रेन मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात में 27.4 प्रतिशत, जौ में 15.8, मक्का में 12.5 और सूरजमुखी तेल में 61.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते थे। दोनों देशों में अनाज या सूरजमुखी की पैदावार की कमी नहीं है, लेकिन जहाजों से बाहर भेजने में दिक्कत है। बीमा प्रीमियम बढ़ गए हैं, जहाज मालिक और चालक दल जाने से हिचकिचा रहे हैं।
यूक्रेन के कृषि मंत्रालय ने 2026-27 के लिए कृषि निर्यात का अनुमान 64.4 मिलियन टन से घटाकर 29.6 मिलियन टन कर दिया है। सिर्फ गेहूं निर्यात का अनुमान 17.6 से 8.3 मिलियन टन रह गया है। रूस का 80 प्रतिशत से ज्यादा अनाज निर्यात अजोव और काला सागर से ही होता है। जुलाई में अकेले यूक्रेन में जहाजों पर 57 और बंदरगाहों पर 67 हमले हुए, जबकि पूरे 2025 में सिर्फ 14 जहाजों पर हमले हुए थे। सूखे की वजह से नदियों का जल स्तर भी कम है, जिससे डैन्यूब जैसी वैकल्पिक राहों का इस्तेमाल भी मुश्किल हो रहा है।

















