शोधकर्ता व न्यूमरोलॉजिस्ट ज्योत्स्ना जी. बंसल ने प्रकाशित अकादमिक शोध के माध्यम से न्यूमरोलॉजी और भारतीय दर्शन के बीच संबंधों का अध्ययन कर एक उल्लेखनीय शोध उपलब्धि हासिल की है। उनका कार्य न्यूमरोलॉजी को केवल भविष्यवाणी तक सीमित न रखकर भारतीय दर्शनशास्त्र और भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) के व्यापक अकादमिक संदर्भ में देखने की दिशा प्रस्तुत करता है।
अकादमिक शोध से जुड़ी नई पहल
उनका नवीनतम शोध-पत्र प्रतिष्ठित शोध-पत्रिका प्रज्ञा (Prajnā) में प्रकाशित हुआ है, जिसका प्रकाशन पूर्णप्रज्ञ संशोधन मंदिरम्, बेंगलुरु द्वारा किया जाता है। यह संस्थान केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली द्वारा ‘आदर्श शोध संस्थान’ के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह शोध न्यूमरोलॉजी, भारतीय दर्शन और IKS के बीच संबंधों का संरचित अकादमिक अध्ययन करता है। इस दृष्टिकोण से न्यूमरोलॉजी को केवल belief या prediction-based विषय न मानकर भारतीय शास्त्रीय एवं दार्शनिक अवधारणाओं से जुड़े संभावित अध्ययन-क्षेत्र के रूप में देखने की संभावना सामने आती है।
वर्षों की शोध-यात्रा
यह प्रकाशन ज्योत्स्ना की कई वर्षों की शोध-यात्रा का परिणाम है। वे भारतीय ज्ञान परंपरा, पुराण, आयुर्वेद, चक्र प्रणाली और न्यूमरोलॉजी से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध-पत्र प्रस्तुत कर चुकी हैं।उनके शोध सेंट स्टीफंस कॉलेज, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रस्तुत हुए हैं। उनका ‘आयुर्वेदिक न्यूमरोलॉजी’ शोध-पत्र दिल्ली विश्वविद्यालय के एक सम्मेलन में प्रथम दस चयनित शोध-पत्रों में शामिल रहा। सम्मेलन की स्मारिका का विमोचन तत्कालीन माननीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा किया गया था। बाद में पाञ्चजन्य ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2025 पर उनके इस शोध को भी प्रकाशित किया।
शोध, लेखन और अकादमिक सहभागिता
शोध के साथ ज्योत्स्ना एक लेखिका और स्तंभकार भी हैं। वे The Daily Guardian और पाञ्चजन्य के लिए भारतीय दर्शन, अध्यात्म, न्यूमरोलॉजी और जीवन से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। वे IKS-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय, peer-reviewed अकादमिक पत्रिका ASMITAA की मैनेजिंग एडिटर भी हैं। वर्ष 2024 में उनकी पुस्तक “Hypothyroidism Healed: Combined Holistic Approach – Yoga, Reiki, Mantra & Crystals” प्रकाशित हुई। वर्ष 2026 में शोध, साहित्य और भारतीय ज्ञान परंपराओं में योगदान के लिए उन्हें ग्लोबल संस्कृत फोरम द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में ‘अरुंधती- इंटरनेशनल विदुषी प्रतिभा सम्मान’ प्रदान किया गया।
उनका नवीनतम शोध न्यूमरोलॉजी और भारतीय ज्ञान परंपरा के बीच संबंधों पर आगे के अकादमिक एवं अंतर्विषयी शोध के लिए नई संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।

















