पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार के आने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। करीब तीन माह बीत चुके हैं। राज्य सरकार ने 4800 लोगों को डिपोर्ट कर दिया है। हालांकि, बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ 73 लोगों को ही स्वीकार किया है। ये सब हाकिमपुर चेकपोस्ट की घटना है।
अलग-अलग आंकड़े
दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, 28 मई को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सरकार बनने के बाद रोज 5 से 10 हजार बांग्लादेशी वापस जा रहे हैं। 8 जून को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 4800 लोगों को डिपोर्ट कर दिया गया है। बांग्लादेश का आंकड़ा अलग है। वहां के अधिकारियों का कहना है कि 2026 में सिर्फ 73 लोगों को कानूनी प्रक्रिया से लिया गया है।
भारत-बांग्लादेश बॉर्डर कुल 4096 किलोमीटर लंबा है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल से सटा है।
चेकपोस्ट पर क्या हाल
रिपोर्ट के अनुसार, हाकिमपुर चेकपोस्ट पर बीएसएफ अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में हफ्ते में 10-15 लोगों को भेजा जाता था। अब कई हफ्ते तक कोई नहीं आता। सरकार बदलने के बाद इकट्ठा हुए करीब 200 लोगों को भेजा गया। बाकी को उत्तर 24 परगना के तीन अस्थायी होल्डिंग सेंटर्स में भेज दिया गया। पेट्रापोल और महदीपुर चेकपोस्ट पर भी वैसी ही स्थिति है। अब पकड़े गए लोगों को सीधे बॉर्डर नहीं लाया जाता। पहले होल्डिंग सेंटर भेजा जाता है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बॉर्डर तक लाया जाता है।
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आसपास के गांवों में लोग खेतों में काम कर रहे हैं। बाजार खुले हैं। लेकिन अब चेकपोस्ट पार करने के लिए पहचान पत्र रखना जरूरी हो गया है।
होल्डिंग सेंटर्स की स्थिति
24 मई 2026 को राज्य सरकार ने हर जिले में होल्डिंग सेंटर बनाने का आदेश दिया था। फिलहाल सीमा से लगे सात जिलों में 11 सेंटर बने हैं। इनमें 300 से ज्यादा लोग रखे गए हैं। मुर्शिदाबाद के लालगोला में होल्डिंग सेंटर एक सरकारी इमारत की तीसरी मंजिल पर है। नीचे बैंक की शाखा चल रही है। आसपास के लोगों को भी पता नहीं है। यहां 20-25 लोग रखे जा सकते हैं। बाद में उन्हें मालदा भेज दिया जाता है। मालदा के इंग्लिश बाजार वाले सेंटर में करीब 130 लोग हैं। यहां सुरक्षा ज्यादा कड़ी है। ज्यादातर लोगों को महदीपुर सीमा चौकी के रास्ते भेजा जाता है।
पहचान कैसे होती है
गृह मंत्रालय की SOP के मुताबिक संदिग्ध विदेशी की पहचान, फोटो-फिंगरप्रिंट, होल्डिंग सेंटर भेजना, जांच और फिर बीएसएफ को सौंपकर सीमा पार भेजने की प्रक्रिया है। लेकिन संदिग्ध विदेशी किस आधार पर माना जाएगा, इस पर साफ जवाब नहीं मिलता। पुलिस अधिकारी कहते हैं कि अनुभव से और भाषा से पहचान हो जाती है। जब तक बांग्लादेश नागरिकता की पुष्टि नहीं करता, किसी को नहीं भेजा जाता।
बांग्लादेश की तरफ से तस्वीर
बांग्लादेश के जमालपुर और कुरीग्राम में बीजीबी जवान और गांव वाले रात में पहरा दे रहे हैं। बीजीबी का कहना है कि हाल के महीनों में बिना सत्यापन के लोगों को भेजने की कई कोशिशें हुईं। पिछले कुछ हफ्तों में 21 बार ऐसी कोशिशें रोकी गईं। 200 से ज्यादा लोगों को वापस ले जाना पड़ा। 2026 में सिर्फ 73 लोगों को कानूनी तरीके से लिया गया है।

















