जुलाई महीने में GST कलेक्शन अच्छा रहा। कुल 2,11,205 करोड़ रुपये का टैक्स जमा हुआ, जो पिछले साल की तुलना में 15.4% ज्यादा है। यह सितंबर में नई व्यवस्था लागू होने के बाद दूसरा सबसे ऊंचा आंकड़ा है। साथ ही, दरों में बदलाव के बाद यह सबसे तेज बढ़ोतरी भी है।
इंपोर्ट पर IGST में तेज उछाल
इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह इंपोर्ट पर एकत्र होने वाला इंटीग्रेटेड GST (IGST) रहा। इसमें 29% की बढ़ोतरी हुई। जुलाई में जो IGST आया, वो जून महीने के ट्रांजेक्शन का था। वेस्ट एशिया में तनाव की वजह से क्रूड ऑयल और दूसरे सामानों की कीमतें बढ़ीं, जिससे इंपोर्ट महंगा हुआ और टैक्स भी ज्यादा आया।
जून में फैक्ट्री उत्पादन लगभग दो साल में सबसे तेज गति से बढ़ा था। उस मजबूत आर्थिक गतिविधि का असर भी GST नंबर्स में दिखा। FMCG और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कुछ कीमतें बढ़ाई गई थीं, जिनका भी टैक्स कलेक्शन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
CGST और SGST का प्रदर्शन
- सेंट्रल GST (CGST) 12.3% बढ़कर करीब 40,000 करोड़ रुपये रहा।
- स्टेट GST (SGST) 8.7% बढ़कर करीब 48,000 करोड़ रुपये पहुंचा।
रिफंड घटाकर नेट कलेक्शन
रिफंड भी 13% ज्यादा दिए गए, जो करीब 30,000 करोड़ रुपये थे। इनको घटाकर नेट GST कलेक्शन 15.8% बढ़कर 1,81,237 करोड़ रुपये हो गया।
एक्सपर्ट्स क्या कहते हैं
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर एमएस मणि ने कहा कि जून में इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन 7.3% बढ़ा था, उसी से GST कलेक्शन अच्छा जुड़ता है। इससे पता चलता है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने GST कलेक्शन में स्थिर बढ़ोतरी दिख रही है, जिसका मतलब है कि घरेलू खपत मौसमी बदलावों और बाहरी दबावों से काफी हद तक बच गई है।
राज्यों का हाल
कुछ राज्यों में बढ़ोतरी अच्छी रही। हरियाणा में 28% की सबसे ज्यादा ग्रोथ रही। गुजरात और पुडुचेरी में 26%, कर्नाटक और गोवा में 23%, महाराष्ट्र में 20% बढ़ोतरी हुई। दूसरी तरफ कुछ राज्य पीछे रहे। छत्तीसगढ़ में 23% की गिरावट आई। झारखंड और मणिपुर में 20% कम हुआ।










