उत्तराखंड

“नियम बाधा नहीं, जनकल्याण का मार्ग हैं”: CM धामी ने किया ‘सेवा विधि’ पुस्तक का विमोचन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आर.सी. लोहनी द्वारा लिखित 'सेवा विधि' पुस्तक का विमोचन किया। यह पुस्तक सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए मार्गदर्शिका बनेगी।

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उत्तराखंड ब्यूरो

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व अपर सचिव आर.सी. लोहनी द्वारा लिखित पुस्तक ‘सेवा विधि’ का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री धामी ने पुस्तक को अत्यंत उपयोगी बताते हुए इस प्रयास के लिए श्री लोहनी के प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवा में नियुक्त प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी का कर्तव्य होता है कि वह सत्यनिष्ठा, पारदर्शिता और पूरे समर्पण के साथ राज्य के विकास में अपनी सहभागिता निभाए। किन्तु किसी भी व्यवस्था को सुचारू, सरल और त्वरित रूप से चलाने के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की सही जानकारी होना अनिवार्य है।

उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अब तक ऐसी कोई पुस्तक उपलब्ध नहीं थी, जिसमें सरकारी सेवा से जुड़े नियम, संवैधानिक प्रावधान, शासनादेश और माननीय न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय एक ही स्थान पर सरल और व्यवस्थित रूप में मिल सकें।

अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए व्यवहारिक मार्गदर्शिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मात्र एक पुस्तक नहीं है, बल्कि हमारे प्रदेश के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक व्यवहारिक मार्गदर्शिका है, जो उन्हें अपने सेवाकाल में हर कदम पर सही दिशा और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करने का काम करेगी। सरकारी नौकरी को सेवा इसलिए कहा जाता है क्योंकि जब कोई व्यक्ति सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है, तो उसका हर निर्णय सीधे तौर पर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करता है।

राष्ट्रसेवा के लिए नियमों और प्रक्रियाओं की समझ जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई अधिकारी या कर्मचारी किसी नागरिक की समस्या का समाधान करता है, किसी गरीब को उसका अधिकार दिलाता है, किसी किसान, महिला, युवा या बुजुर्ग तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचाता है, तब वह वास्तव में राष्ट्रसेवा ही कर रहा होता है। इसीलिए एक लोकसेवक के लिए केवल ईमानदारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमों, कानूनों और प्रक्रियाओं की गहरी समझ भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों, सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की स्पष्ट समझ प्रदान करेगी, जिससे वे अधिक आत्मविश्वास और दक्षता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।

सुशासन और पारदर्शिता पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में आज उत्तराखंड तेजी से विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। हमारी सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। हमने शासन व्यवस्था में तकनीक का व्यापक उपयोग किया है, प्रक्रियाओं को सरल बनाया है तथा निर्णय लेने की गति को बढ़ाया है। किसी भी राज्य का विकास केवल योजनाओं या बजट से नहीं होता। उसका सबसे बड़ा आधार होता है एक संवेदनशील, सक्षम और उत्तरदायी प्रशासनिक तंत्र। सरकार की नीतियां तभी सफल होती हैं, जब उन्हें धरातल पर ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू किया जाए। इसलिए हमारी प्रशासनिक व्यवस्था जितनी सक्षम होगी, जनता का विश्वास भी उतना ही मजबूत होगा।

नियमों की आत्मा समझने वाले अधिकारी ही बनाते हैं जनहित का रास्ता

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं अनुभव किया है कि कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जो नियमों की आत्मा को समझते हैं। वे नियमों को बाधा नहीं बनने देते, बल्कि उन्हीं नियमों के भीतर जनहित का रास्ता खोज लेते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल नियमों का पालन करना ही नहीं, बल्कि जनता का जीवन सरल बनाना है। नियम व्यवस्था बनाए रखने के लिए होते हैं, लेकिन उनका अंतिम उद्देश्य जनकल्याण होना चाहिए।

जनता जब किसी समस्या को लेकर अधिकारियों के पास आती है, तो वह बहुत उम्मीद और विश्वास के साथ आती है। ऐसे में आपकी कार्यशैली ऐसी होनी चाहिए कि उन्हें त्वरित, सुलभ और पारदर्शी न्याय मिले, क्योंकि हमारी सरकार का मूल मंत्र बिल्कुल स्पष्ट है—**‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’**। हमें हर प्रक्रिया का सरलीकरण करना है, समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है, फाइलों का समयबद्ध निस्तारण करना है और जनता के चेहरे पर संतुष्टि लानी है, जिससे हम उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को पूर्ण करने में सफल हो सकें।

पुस्तक में शामिल किए गए सेवा नियम और न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय

पुस्तक के लेखक श्री आर.सी. लोहनी ने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से सरकारी सेवाओं में संवैधानिक व्यवस्थाओं, अधिनियमों, नियमों, विनियमों एवं शासनादेशों तथा माननीय उच्चतम न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालयों द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों को ध्यान में रखा गया है।

इस पुस्तक में मुख्य रूप से संवैधानिक व्यवस्थाओं एवं उनके क्रम में नियुक्ति, आरक्षण, परिवीक्षा, स्थायीकरण, ज्येष्ठता, पदोन्नति, स्थानांतरण, मृतक सरकारी सेवकों के आश्रित एवं सेवायोजन, निलंबन, अनुशासनात्मक कार्यवाही, जांच अधिकारी का दायित्व, शास्ति, शास्ति के विरुद्ध अपील, अस्थायी सरकारी कर्मचारी की सेवा समाप्ति, त्यागपत्र, स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति, अनिवार्य सेवा निवृत्ति, राज्य कर्मचारी आचरण, सेवानिवृत्ति के उपरांत जांच कार्यवाही, सरकारी सेवा के दौरान किए गए आपराधिक कृत्य पर अभियोजन, अवकाश से संबंधित नियम, राजभाषा अधिनियम, धारणाधिकार से संबंधित सेवा नियमों, नियमों, अधिनियमों तथा विनियमों एवं माननीय उच्चतम न्यायालय तथा माननीय उच्च न्यायालयों द्वारा समय-समय पर दिए गए निर्णयों का सार सम्मिलित किया गया है, जो कि सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।

कार्यक्रम में ये गणमान्य लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, पूर्व अपर सचिव भूपेश तिवारी, जी.बी. ओली, श्री रमेशचंद्र शर्मा, हंसादत्त पाण्डेय, पूर्व संयुक्त सचिव नवीन सिंह तड़ानी सहित डॉ. डी.एस. रावत, कर्नल (से.नि.) शिव सहरावत, वैज्ञानिक (से.नि.) पी.सी. वर्मा, उपायुक्त परिवहन सुनील शर्मा, अनुभाग अधिकारी दीपक जोशी, रणधीर अरोड़ा, पूरन सिंह रावत, अश्विनी सिंह नेगी, आर.सी.एस. बिष्ट, विकास श्रीवास्तव एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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