
नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद (VHP) की केंद्रीय प्रबंध समिति की दो दिवसीय महत्वपूर्ण एवं उच्च स्तरीय बैठक नई दिल्ली के छतरपुर स्थित तेरापंथ भवन में संपन्न हुई. बैठक में देशभर से आए विहिप के केंद्रीय पदाधिकारियों, वरिष्ठ विचारकों और प्रबंध समिति के सदस्यों ने भाग लिया. इस दो दिवसीय सत्र के दौरान समसामयिक राष्ट्रीय, धार्मिक और सामाजिक विषयों पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव और भावी योजनाएं पारित की गईं.
बैठक में भारतीय समाज की मूल रीढ़ ‘परिवार व्यवस्था’ को सुरक्षित एवं सुदृढ़ बनाने को लेकर चिंता व्यक्त की गई और एक प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव में कहा गया कि भारतीय कुटुंब व्यवस्था ने सदियों से समाज को संस्कारित, संगठित एवं आत्मीय बनाए रखा है.
“वर्तमान समय में कुछ हालिया न्यायिक निर्णयों ने पारंपरिक और सुदृढ़ कुटुंब व्यवस्था को गहरा आघात पहुंचाया है। विवाहेत्तर संबंधों, लिव-इन रिलेशनशिप और समलैंगिकता जैसी अवधारणाओं से पारिवारिक ढांचे को क्षति पहुंच रही है। विहिप ने मांग की है कि इन विषयों पर व्यापक सामाजिक चर्चा कराकर कड़े कानून बनाए जाएं। परिषद इसके लिए देशभर में व्यापक ‘परिवार प्रबोधन’ अभियान चलाएगी।”
ओडिशा के कंधमाल में हुई पूज्य स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की निर्मम हत्या की जांच हेतु गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट गायब होने और उसे सार्वजनिक न किए जाने पर विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति ने गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की.
विश्व हिन्दू परिषद ने मांग की है कि इस पूरे मामले की सीबीआई (CBI) द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि हत्या के पीछे की वास्तविक साजिश का पर्दाफाश हो सके. इसके साथ ही विहिप ने ओडिशा राज्य में अवैध मतान्तरण (कन्वर्जन) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का कड़ा आह्वान किया.
बैठक के दौरान संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की आगामी 650वीं जन्मशती के पावन अवसर पर एक विशेष वक्तव्य पारित किया गया. परिषद ने कहा कि संत रविदास जी द्वारा दिया गया सामाजिक समरसता, समानता, आध्यात्मिक चेतना और मानवीय मर्यादा का संदेश आज भी संपूर्ण भारतीय समाज को एकजुट रखने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है.
विहिप ने संकल्प लिया है कि इस पावन वर्ष के दौरान पूरे देश में विविध प्रकार के सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि उनके विचारों और समरसता के संदेश को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाया जा सके.
राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता और विहिप के संरक्षक रहे श्रद्धेय अशोक सिंघल जी की जन्म शताब्दी वर्ष (27 सितंबर) को लेकर विहिप ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है. उनके जन्म शताब्दी वर्ष के निमित्त पूरे साल भर संगठनात्मक विस्तार और जन-जागरण के कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
अशोक सिंघल शताब्दी वर्ष के मुख्य संकल्प एवं योजनाएं:
इस दो दिवसीय केंद्रीय बैठक का समापन हिंदू समाज को संगठित करने, सनातन धर्म और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने तथा राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ.