देश की राजधानी दिल्ली में आज सीजेपी के नेतृत्व में में आयोजित हुए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई अचानक हिंसा भड़क गई। इस प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवियों ने नई दिल्ली इलाके में तोड़फोड़ और पत्थरबाजी भी की, जिसमें आम जनता सहित कई पुलिस और अर्ध सैनिक बल के कर्मचारी भी घायल हो गए।
मामले की गंभीरता और देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। क्या ये कोई सोची समझी साजिश थी? जांच एजेंसिया अब सिर्फ उन उपद्रवियों की तलाश नहीं कर रही है बल्कि इसके पीछे छिपी किसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय या अंतर-राज्यीय साजिश की भी गहराई से पड़ताल की जा रही है।
पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल की संदिग्ध भूमिका
जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू सोशल मीडिया पर फैलाई गई भ्रामक जानकारियों के रूप में सामने आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच का एक बड़ा हिस्सा इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर केंद्रित है। शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि इस दौरान कई ऐसे फर्जी और संदिग्ध सोशल मीडिया हैंडल सक्रिय थे जो हिंसा को भड़काने के लिए लगातार अफवाहें फैला रहे थे। सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इनमें से कई हैंडल पड़ोसी देश पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे। इन हैंडल्स से लगातार भड़काऊ पोस्ट, वीडियो और ट्वीट किए गए ताकि दिल्ली के माहौल को और खराब किया जा सके।
सोशल मीडिया पर किए गए फर्जी दावों की हो रही है जांच
नई दिल्ली में हुई इस हिंसा के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कुछ फर्जी आंकड़े और भ्रामक पोस्ट वायरल किए जाने लगे। इंटरनेट पर दावा किया जाने लगा कि पुलिस कार्रवाई में 7 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है, 391 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और 250 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये दावे पूरी तरह से बेबुनियाद और झूठे हैं। पुलिस अब इन अफवाहों के मूल स्रोत (सोर्स) का पता लगा रही है और इसे शेयर करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से बार-बार यह अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या अपुष्ट खबर पर विश्वास न करें और न ही ऐसी संवेदनशील सामग्री को सोशल मीडिया पर शेयर या फॉरवर्ड करें।
छात्रों के अलावा अन्य तत्वों की मौजूदगी
प्रदर्शन के शुरुआती दौर में यह दावा किया गया था कि यह केवल छात्रों का एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन है। हालांकि, दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए लोगों की जब प्राथमिक जांच और पहचान शुरू हुई, तो सच्चाई कुछ और ही निकली। हिरासत में लिए गए कई लोग ऐसे पाए गए हैं जिनका किसी भी शिक्षण संस्थान या छात्र संगठन से कोई लेना-देना नहीं है।
गैर-छात्रों की इस बड़ी संख्या में उपस्थिति से पुलिस को संदेह है कि हिंसा अचानक नहीं भड़की बल्कि इसे सोची-समझी रणनीति के तहत पहले से प्लान किया गया था। पुलिस अब इन बाहरी तत्वों की पृष्ठभूमि, उनके पहचान पत्रों और इस प्रदर्शन में शामिल होने के असल कारणों की गहनता से जांच कर रही है।
सुरक्षा बलों पर हमला और संपत्ति का नुकसान
घटनास्थल से कई विडियो सामने आए हैं, इन वीडियो और तस्वीरों में यह दिख रहा है कि उपद्रवियों का इरादा शांतिपूर्ण प्रदर्शन का बिल्कुल नहीं था। जंतर-मंतर और आस-पास के इलाकों में तैनात पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों पर उग्र भीड़ ने अचानक और भारी पथराव शुरू कर दिया। इस हिंसा में 50 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं। घायलों में 5 से अधिक वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी भी शामिल हैं। इस हिंसक प्रदर्शन में घायल हुए आम लोगों भी पुलिस ने अस्पताल में भर्ती किया।
पुलिस का कहना है कि उन्होंने सुबह से काफी संयम बरता लेकिन जब भीड़ ने जनपथ और नई दिल्ली क्षेत्र की दुकानों में तोड़फोड़ शुरू की और दो सरकारी बसों के शीशे फोड़ दिए तब स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है और हर शिकायत का अलग से संज्ञान लिया जा रहा है।
हिरासत में लिए 70 से अधिक संदिग्ध
प्रदर्शन स्थल से 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों के अनुसार यह संख्या 100 के पार है। संदिग्धों को शहर के अलग-अलग थानों और अस्थायी निरुद्ध केंद्रों में रखा गया है। हिरासत में लिए गए कई प्रदर्शनकारियों को दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में रखा गया है जहां उनसे पूछताछ की जा रही है।
पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल को पूरी तरह से खाली करा लिया है। हालांकि, कुछ प्रदर्शनकारी इसके बाद केरल हाउस के पास एकत्र होकर बैठने की कोशिश करने लगे। अलग- अलग व्यापारियों, आम जनता और पुलिस विभाग की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की जा रही हैं। अगर जांच में किसी राजनीतिक दल, धार्मिक या सामाजिक संगठन की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ भी निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि ‘चलो संसद’ मार्च को देखते हुए नई दिल्ली जिले में पहले से ही कड़े सुरक्षा घेरे लागू किए गए थे। संसद मार्ग, सेंट्रल विस्टा, कनॉट प्लेस और आस-पास के इलाकों में मल्टीलेयर बैरिकेडिंग की गई थी। फिलहाल, पुलिस डिजिटल सबूतों पर सबसे ज्यादा भरोसा कर रही है। इलाके में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों और आम लोगों या मीडिया द्वारा मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो फुटेज की फोरेंसिक जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक के जरिए उपद्रवियों की पहचान की जा रही है ताकि निर्दोष लोगों को कोई परेशानी न हो और दोषियों को सजा मिल सके। दिल्ली पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और शांति भंग करने वाले लोगों की पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















