संसद का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। विपक्ष कई बड़े मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। रविवार को हुई बैठक में विपक्षी नेताओं ने राम मंदिर के दान में कथित गबन, नीट पेपर लीक, जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन और E20 पेट्रोल वाले मुद्दे पर चर्चा की मांग रखी। सरकार की तरफ से साफ चेतावनी दी गई है कि संसद में हंगामा करने वाली पार्टियों को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुद्दों पर चर्चा के लिए सलाह-मशविरा होना चाहिए, न कि “मेरी तरफ या हाईवे” वाला रवैया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस को अपनी मांग रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन वो सरकार पर जबरदस्ती नहीं कर सकती।” राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर जांच और जवाबदेही की मांग की थी। यह मांग सेशन के शुरू होने के साथ ही की गई।
ऑल पार्टी मीटिंग में भी यह मुद्दा उठा। डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में 40 पार्टियों के 58 सांसद शामिल थे। समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव समेत कई विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर दान घोटाले का मुद्दा उठाया।
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सरकार के एजेंडे में 8 बिल
सरकार ने अपने एजेंडे में 8 बिलों की लिस्ट दी है। लोकसभा की संख्या बढ़ाने और 2029 से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने वाले संविधान संशोधन बिल का जिक्र नहीं है। बाद में रिजिजू ने कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमिटी (BAC) में चर्चा के बाद नियमों के मुताबिक, नया आइटम लाया जा सकता है। यह आम प्रक्रिया है।
रिजिजू ने यह भी कहा कि संसद में हंगामा करने और चर्चा नहीं होने देने वाली पार्टियों को लोगों ने सबक सिखाया है। उन्होंने हाल के विधानसभा चुनावों का हवाला दिया, जहां तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में और DMK तमिलनाडु में हार गईं।
क्या कहता है विपक्ष
मीटिंग में कई विपक्षी सदस्यों ने NEET-UG पेपर लीक का मुद्दा उठाया और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से सरकार के न जुड़ने पर सवाल किया। RSP सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि पेपर लीक से बहुत सारे स्टूडेंट्स प्रभावित होते हैं, इसलिए इस पर स्ट्रक्चर्ड डिबेट होनी चाहिए।
कुछ विपक्षी सांसदों ने हालिया ईंधन मूल्य बढ़ोतरी का भी जिक्र किया। वहीं BJP के सहयोगी और JDU सांसद संजय झा ने वेस्ट एशिया संकट पर चर्चा की मांग की। उन्होंने सरकार की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने ऊर्जा प्रबंधन अच्छा किया। दूसरे देशों की तुलना में तेल और गैस की कीमतों में कम बढ़ोतरी हुई और वैकल्पिक स्रोतों से सप्लाई बढ़ाई गई। भारत का इस संकट में कोई रोल नहीं था, लेकिन उसने इसके नकारात्मक प्रभावों को कुशलता से संभाला। बाद में BAC की बैठक में स्पीकर ओम बिरला ने सभी पार्टियों से अपील की कि वे सहयोग करें ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से चल सके।













