देश में मुस्लिमों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसको लेकर केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बड़ी बात कही है। उन्होंने 9 मई 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि अगले जनगणना के आंकड़े आने के बाद भारत में मुस्लिमों की संख्या इंडोनेशिया की कुल आबादी के लगभग बराबर हो सकती है। उन्होंने कहा, “देश में मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया की आबादी के करीब पहुंचने वाली है। जनगणना के आंकड़े आने पर यह बात साफ हो जाएगी।”
2011 में हुई थी आखिरी जनगणना
रिजिजू ने बताया कि आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी। 2021 में यह नहीं हो पाई, इसलिए इन सालों में आबादी बढ़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चाहे किसी भी समुदाय की संख्या कितनी भी हो, सब भारतीय हैं।
पारसी समुदाय की चिंता
कार्यक्रम ‘पारसी इन मॉडर्न इंडिया: नेविगेटिंग कल्चरल एंड सोशियो-इकोनॉमिक पाथवे’ पर हो रहा था। रिजिजू ने पारसी समुदाय की घटती आबादी पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि देश में पारसी अब सिर्फ 52,000 से 55,000 के बीच बचे हैं। सरकार उनकी संख्या को और घटने से बचाने के लिए काम कर रही है। पारसी भारत के सबसे छोटे अल्पसंख्यक समुदाय हैं।
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अल्पसंख्यकों पर खतरे का दावा खारिज
रिजिजू ने साफ कहा कि देश में अल्पसंख्यकों पर कोई खतरा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक संगठन मुसलमानों और ईसाइयों के बीच डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के सामने सभी नागरिक बराबर हैं। किसी के साथ धर्म या जाति के आधार पर भेदभाव नहीं होता।
पश्चिम बंगाल में BJP की जीत पर भी बोले
रिजिजू ने पश्चिम बंगाल में BJP सरकार बनने को देश के लिए अच्छी बात बताया। उन्होंने कहा कि यह राज्य बांग्लादेश की सीमा से लगा हुआ है, जहां से काफी अवैध घुसपैठ होती है। नई सरकार इस मुद्दे को बेहतर तरीके से संभाल पाएगी। उन्होंने दावा किया कि पहले की ममता बनर्जी सरकार कुछ केंद्र की योजनाओं को लागू नहीं कर रही थी, जैसे नेशनल ई-विधान एप्लिकेशन। अब केंद्र सरकार उन्हें लागू करवाएगी।

















