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गुंडिचा मंदिर पहुंचे भगवान जगन्नाथ, बारिश और भारी भीड़ के बीच ऐसे पूरी हुई रथ यात्रा

ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा शुक्रवार को एक अहम मोड़ पर पहुंच गई, जब भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के शानदार रथ सफलतापूर्वक गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। यह यात्रा बड़ा दांड  (ग्रैंड रोड) पर उनकी पारंपरिक यात्रा के पूर्ण होने का प्रतीक है। 

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Mahak Singh
Jul 19, 2026, 11:08 am IST
in ओडिशा

ओडिशा के पुरी में रथ यात्रा शुक्रवार को एक अहम मोड़ पर पहुंच गई, जब भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के शानदार रथ सफलतापूर्वक गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। यह यात्रा बड़ा दांड  (ग्रैंड रोड) पर उनकी पारंपरिक यात्रा के पूर्ण होने का प्रतीक है।  अधिकारियों के अनुसार, तीनों रथ   गुंडिचा मंदिर के समीप सरधा बाली में सुरक्षित पहुंच गए। गुरुवार शाम अनुष्ठानों में देरी के कारण यात्रा को रोक दिया गया था, जिसके बाद शुक्रवार सुबह करीब 9:40 बजे रथ खींचने की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई। लगभग पांच लाख श्रद्धालुओं ने रथ खींचने में भाग लिया, जिससे पूरा बड़ा डांडा मानव सागर में तब्दील हो गया। ओडिशा पुलिस के महानिदेशक वाई बी खुरानिया  ने पुष्टि की कि शुक्रवार को यात्रा शांतिपूर्ण और बिना किसी अप्रिय घटना के संपन्न हुई। उन्होंने कहा, “महाप्रभु की कृपा से सभी अनुष्ठान शांति से सम्पन्न हुए और तीनों रथ सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच गए।”

अनुष्ठानों में देरी के कारण रुकी थी यात्रा

गुरुवार दोपहर रथ खींचने की शुरुआत हुई थी, लेकिन निर्धारित समय से अधिक देर तक अनुष्ठान चलने के कारण प्रशासन को रात के लिए यात्रा स्थगित करनी पड़ी। उस समय तक रथ अलग-अलग स्थानों पर रुक गए थे। भगवान बलभद्र का ‘तालध्वज’ रथ मार्केट चौक के पास, देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ रथ मरीचिकोटे चौक पर और भगवान जगन्नाथ का ‘नंदीघोष’ रथ मुख्य मंदिर से थोड़ी दूरी पर रुक गया था। शुक्रवार सुबह ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष के बीच यात्रा पुनः आरंभ हुई और कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच शेष दूरी पूरी कर ली गई।

कड़ी सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन व्यवस्था

इस विशाल आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। पुरी में 10,000 से 12,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, एआई आधारित निगरानी प्रणाली, ड्रोन और विशेष निकासी मार्ग बनाए गए थे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अस्थायी चिकित्सा शिविर और एलईडी डिस्प्ले सिस्टम भी लगाए गए थे, ताकि उन्हें वास्तविक समय में जानकारी मिल सके। डीजीपी खुरानिया ने श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि दर्शन के बाद आगे बढ़ते रहें और एक ही स्थान पर अधिक समय तक न रुकें, क्योंकि इससे भीड़ प्रबंधन में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से सलाह दी कि भारी भीड़ को देखते हुए शिशुओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को इस दौरान यात्रा में न लाया जाए।

शनिवार को होगा ‘आडप मंडप बीजे’ अनुष्ठान

हालांकि शुक्रवार को रथ गुंडिचा मंदिर पहुंच गए, लेकिन देवताओं की प्रतिमाएं रातभर रथों पर ही विराजमान रहेंगे शनिवार शाम को ‘अडापा बीजे’ नामक पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न होगा, जिसमें देवताओं को गुंडिचा मंदिर के भीतर स्थापित किया जाएगा। देवता यहां कुछ दिनों तक निवास करेंगे, जिसके बाद ‘बाहुडा यात्रा (प्रत्यावर्तन यात्रा)  के दौरान वे पुनः  श्रीमंदिर  लौटेंगे।

उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम से बढ़ी सुरक्षा

इस वर्ष की रथ यात्रा की एक खास विशेषता उन्नत जलरोधक ब्रेकिंग प्रणाली रही, जिसे तीनों रथों में लगाया गया है। प्रत्येक रथ का वजन 40 टन से अधिक होता है और इन्हें श्रद्धालु मोटी रस्सियों से खींचते हैं, जिससे नियंत्रण और सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। पहले के वर्षों में प्रभावी ब्रेकिंग सिस्टम के अभाव में रथों को रोकना कठिन होता था और वे गति पकड़ने के बाद कुछ दूरी तक चलते रहते थे, जिससे जोखिम बढ़ जाता था। नई प्रणाली में जलरोधक केमिकल कोटिंग, बेहतर रबर लाइनिंग, सेल्फ-लॉकिंग स्क्रू और उन्नत बेल्ट मैकेनिज्म शामिल हैं, जिससे बारिश के दौरान भी बेहतर पकड़ और नियंत्रण सुनिश्चित होता है।

भक्ति से प्रेरित नवाचार

इस ब्रेकिंग सिस्टम को सेवानिवृत्त इंजीनियर अश्विनी कुमार मिश्रा ने विकसित किया था। उन्होंने साल लकड़ी के ब्लॉक, विशेष रबर स्ट्रैप और चेन-पुली तंत्र का उपयोग कर एक प्रभावी समाधान तैयार किया। यह प्रणाली ब्रेक और शॉक एब्जॉर्बर दोनों का काम करती है, जिससे भारी पहियों को सुरक्षित रूप से रोका जा सकता है। पिछले 16 वर्षों से यह प्रणाली तीनों रथों में लगाई जा रही है और इससे सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उल्लेखनीय है कि मिश्रा और उनकी टीम इसे सेवा भाव से नि:शुल्क उपलब्ध कराते हैं।

बारिश के बावजूद भारी भीड़

इस वर्ष लगातार बारिश के बावजूद रथ यात्रा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दो दिनों में लगभग 8 से 9 लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है और शाम तक यह संख्या और बढ़ने की संभावना जताई गई।

आस्था और एकता का महापर्व

पुरी की रथ यात्रा विश्व के सबसे बड़े और पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें देश-विदेश से श्रद्धालु शामिल होते हैं। बड़ा डांडा पर चलते तीनों विशाल रथ भक्ति, एकता और ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं।

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