'सिर्फ सलवार हटाना रेप की कोशिश नहीं'; हाईकोर्ट की टिप्पणी पर मचा बवाल, जानिए सुप्रीम कोर्ट और महिला आयोग ने क्या कहा?
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‘सिर्फ सलवार हटाना रेप की कोशिश नहीं’; हाईकोर्ट की टिप्पणी पर मचा बवाल, जानिए सुप्रीम कोर्ट और महिला आयोग ने क्या कहा?

देश में इन दिनों रेप की कोशिश (अटेम्प्ट टू रेप) की कानूनी परिभाषा को लेकर बहस तेज हो गई है। इसकी वजह पटना हाईकोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियां हैं।

Written byMahak SinghMahak Singh
Jul 16, 2026, 05:07 pm IST
inभारत

देश में इन दिनों रेप की कोशिश (अटेम्प्ट टू रेप) की कानूनी परिभाषा को लेकर बहस तेज हो गई है। इसकी वजह पटना हाईकोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की कुछ टिप्पणियां हैं। अलग-अलग मामलों की सुनवाई के दौरान दोनों अदालतों ने कहा कि केवल किसी महिला का सलवार हटाना या उसके स्तनों को दबाना रेप की कोशिश नहीं माना जा सकता। इन टिप्पणियों के सामने आने के बाद कई महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने सवाल उठाए। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने भी इस पर नाराजगी जताई।

महिलाओं के अधिकारों की रक्षा पर जोर

अब राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यौन अपराधों को केवल शारीरिक चोट या हिंसा के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी घटना में पीड़िता की गरिमा, उसकी सहमति, मानसिक पीड़ा और उसके मन में पैदा हुए डर को भी उतना ही महत्व मिलना चाहिए। रहाटकर ने कहा कि न्याय केवल कानून की तकनीकी व्याख्या तक सीमित नहीं होना चाहिए। अगर अदालतें पीड़िता के अनुभवों को नजरअंदाज करेंगी, तो लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई महिलाओं को वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अगर इतनी लंबी प्रक्रिया के बाद भी उन्हें न्याय का एहसास नहीं हो, तो यह चिंता की बात है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा, उनके शरीर पर उनका अधिकार और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि अदालतें आगे ऐसे मामलों की सुनवाई में अधिक संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएंगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में अहम निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि यौन अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। कोर्ट ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी की रिपोर्ट को सभी हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा राज्यों से कहा गया है कि पुलिस को भी ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज करने और जांच के दौरान तय दिशा-निर्देशों का पालन करने के निर्देश दिए जाएं। इन कदमों का उद्देश्य महिलाओं को बेहतर न्याय दिलाना और न्याय व्यवस्था में उनका भरोसा मजबूत करना है।

Topics: National Commission for WomenRaperape caseAttempt to rapeHigh Court Newswomen safetyPatna High CourtSupreme CourtHigh CourtAllahabad High Court
Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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