20 साल बाद कोलकाता लौटेंगी तस्लीमा नसरीन, अभिव्यक्ति की आजादी और तुष्टीकरण की राजनीति पर फिर छिड़ी बहस
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20 साल बाद कोलकाता लौटेंगी तस्लीमा नसरीन, अभिव्यक्ति की आजादी और तुष्टीकरण की राजनीति पर फिर छिड़ी बहस

तस्लीमा नसरीन की कोलकाता यात्रा के विरोध में  तृणमूल कांग्रेस  विधायक अखरुज्जमान ने कहा  कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय और इस्लाम में शरिया के खिलाफ कई तरह की टिप्पणी की हैं।  

Written byअभय कुमारअभय कुमार
Jul 16, 2026, 09:55 am IST
inविश्लेषण, पश्चिम बंगाल
तस्लीमा नसरीन, प्रख्यात लेखिका

तस्लीमा नसरीन, प्रख्यात लेखिका

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बांग्लादेश से निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन के कारण हंगामा मचा हुआ है। तस्लीमा 1 अगस्त को लगभग 20 वर्षों बाद कट्टरवाद विरोधी साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोलकाता आने वाली हैं। इस कार्यक्रम के कारण अभिव्यक्ति की आजादी, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक संवेदनशीलता पर  फिर से बहस शुरू होने की संभावना है। उनकी आगामी यात्रा से तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी असहज हो गए हैं।

तृणमूल विधायक अखरुज्जामान ने क्या कहा

तस्लीमा नसरीन की कोलकाता यात्रा के विरोध में  तृणमूल कांग्रेस  विधायक अखरुज्जमान ने कहा  कि उन्होंने मुस्लिम समुदाय और इस्लाम में शरिया के खिलाफ कई तरह की टिप्पणी की हैं।  दूसरी तरफ भाजपा की नेत्री और पश्चिम  बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर  तस्लीमा नसरीन को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करवाने  में विफल रहने का आरोप लगाया है. अग्निमित्रा ने वामपंथी सरकार को भी तस्लीमा नसरीन को  सुरक्षा नहीं देने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि वाम दल  और तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने मुसलमानों के साथ राजनीति की, तस्लीमा नसरीन को सुरक्षा मुहैया नहीं कराई.

1994 में बांग्लादेश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा

तसलीमा नसरीन को उनकी पुस्तक ‘लज्जा’ के कारण  1994 में बांग्लादेश छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था।  बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनके खिलाफ फतवा जारी करके हत्या की धमकी दी थी। दो महीने छिपने के बाद  1994 में उनको  स्वीडन में निर्वासन में रहना पड़ा था। इस्लामी कट्टरपंथियों  के कारण उनको  लगातार निर्वासन में ही रहने को मजबूर होना पड़ा। बांग्लादेश में उनकी कई किताबें भी प्रतिबंधित की गई थी।

तस्लीमा नसरीन 2004 में भारत आकर कोलकाता में रहने लगीं। उनकी लेखनी के कारण  2007 में  मुस्लिम संगठनों के कुछ वर्गों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। मुस्लिम संगठनों को संतुष्ट करने के  लिए जिसके तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार ने तस्लीमा नसरीन को राज्य छोड़ने का आदेश दिया था।  इसके बाद वह वाम सरकार और ममता सरकारों के शासनकाल के दौरान कभी बंगाल की धरती पर वापस नहीं आ सकी थी।

कोलकाता से भावनात्मक रिश्ता

तसलीमा नसरीन का कोलकाता से शुरू से ही भावनात्मक रिश्ता रहा है और कई बार उन्होंने कहा है कि वह कोलकाता को अपना शहर मानती हैं। पूरे देश की नजर 1 अगस्त 2026 को तस्लीमा नसरीन के प्रस्तावित कार्यक्रम पर है।  उम्मीद की जा रही है कि भाजपा सरकार के कारण कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा।

 

Topics: पश्चिम बंगालतस्लीमा नसरीनतृणमूल विधायकलज्जा उपन्यास
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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