मात्र एक घंटे की शाखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों को राष्ट्रप्रेम का ऐसा मंत्र मिलता है कि वे स्वहित से पहले समाज हित में जुट जाते हैं। सेवा की यह भावना उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना जैसे भूस्खलन और बाढ़ प्रभावित राज्यों में फिर से देखने को मिली। उत्तराखंड में संघ के स्वयंसेवकों और सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने पीड़ितों की सहायता में अपनी जान की बाजी तक लगा दी। कार्यकर्ताओं ने उन स्थानों पर भी राहत सामग्री बांटी, जहां जाने के रास्ते बंद हो गए थे या टूट गए थे। दुर्गम रास्तों से होते हुए कार्यकर्ता अपने कंधों पर आटा, चावल, तेल, दवाई आदि की पोटली रखकर पहुंचे, तो पीड़ितों की आंखें भर आईं। उन्हें लगा कि आपदा ने उन्हें बर्बाद तो कर दिया, लेकिन ईश्वर ने उनकी मदद के लिए कुछ हाथ भी भेजे। ऐसे ही पंजाब में संघ के कार्यकर्ता पानी की तेज धारा को पार करके पीड़ितों तक पहुंचे। उनका एक ही उद्देश्य था कि चाहे जैसे हो, पीड़ितों तक मदद पहुंचनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश में भी सेवा भारती और संघ के कार्यकर्ताओं ने आपदा से प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने के लिए वह सब कुछ किया, जो एक मानव कर सकता है। उफनते नदी-नालों को पार कर कार्यकर्ताओं ने पीड़ितों के आंसू पोंछे। जम्मू-कश्मीर में तो सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने सभी मत-पंथ के लोगों की मदद बिना भेदभाव की।

उत्तराखंड
इस वर्ष उत्तराखंड में भारी बारिश और बादल फटने की अनेक घटनाएं हुईं। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, बागेश्वर, पौड़ी गढ़वाल आदि अनेक जिलों में मकान, दुकान बह गए। काफी लोग असमय ही इस दुनिया से चल बसे। अनेक बच्चे अनाथ हो गए, अनेक महिलाओं का सिंदूर मिट गया।
रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि और जखोली विकास खंड के स्यूर, बकोला, बरसाल, खाडली आदि गांवों में लगभग 60 घर क्षतिग्रस्त हो गए या पूरी तरह खत्म हो गए। उदोला, बढेथ, डुंगर, ताल जाभण आदि गांवों में भी जान-माल का नुकसान हुआ। नौ लोगों की मृत्यु हुई। अनेक परिवार बेघर हो गए।
आपदा से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने तुरंत अभियान शुरू किया। लगभग 50 स्वयंसेवकों के एक दल ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य किया। स्वयंसेवकों ने पीड़ितों के बीच भोजन, गर्म कपड़े, बर्तन, टार्च, तिरपाल, पॉलीथीन और दवाइयों का वितरण किया। कार्यकर्ताओं ने यह कार्य बहुत ही विपरीत परिस्थिति में किया। सड़कें बह गई थीं। रास्ते बंद हो गए थे। पीड़ित लोगों तक पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था, लेकिन संघ के कार्यकर्ताओं ने उस चुनौती को भी सहर्ष स्वीकार किया और कैसे भी उन गांवों तक पहुंचे। जो भी मिला उसे जीवन चलाने लायक मदद की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, उत्तरकाशी की देखेरख में धराली में भी कार्यकर्ताओं ने पीड़ितों की मदद में कोई कसर नहीं छोड़ी। स्वयंसेवकों की एक टोली ने हर्षिल, भटवाड़ी, गंगनानी और धराली से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंदों के घर राशन किट पहुंचाई। ये वे ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां सड़कें भी भागीरथी के उफान में बह गई थीं और यहां पहुंचने के लिए कठिन पहाड़ी रास्ता ही एकमात्र विकल्प था।
उत्तराखंड में आपदा प्रभावितों की मदद के लिए पूर्व में संचालित ‘उत्तरांचल दैवीय आपदा पीड़ित सहायता समिति’ आगे आई। इस समिति ने लोगों से पीड़ितों की मदद के लिए तन, मन और धन से जुड़ने का आग्रह किया। इसका असर भी हुआ। लोग पीड़ितों की मदद के लिए निकले। थराली कस्बे में आई आपदा में बेघर हुए लोगों के बीच संघ परिवार द्वारा 100 राशन किट, 300 कंबल और बर्तनों के 60 सेट वितरित किए गए। आपदा से यहां 80 परिवार बेघर हुए हैं। 6 अगस्त को पौड़ी जिले के पावो विकास खंड के सेनी गांव में और उत्तरकाशी जिले के नौगांव में भी बादल फटा। यहां भी मदद के लिए सबसे पहले स्वयंसेवक पहुंचे और उन्होंने आपदा प्रभावितों के बीच जरूरी सामान का वितरण किया।
हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश में आई प्राकृतिक आपदा ने न केवल सैकड़ों जिंदगियां लील लीं, बल्कि असंख्य परिवारों को बेघर कर दिया। कई लोग अपने खेत-खलिहान और जीवन-भर की पूंजी खो बैठे हैं। इस दौरान यहां चाहे राहत सामग्री पहुंचाना हो, फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित स्थान तक ले जाना हो, या भूखे-प्यासे प्रभावितों के लिए चाय-पानी और भोजन की व्यवस्था करनी हो, संघ के स्वयंसेवक और सेवा भारती के कार्यकर्ता हर स्तर पर तत्पर रहे। कई स्थानों पर आपातकालीन लंगर और स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध करवाई गईं। हिमाचल प्रांत के सेवा प्रमुख महेन्द्र के अनुसार प्रतिदिन लगभग 475 कार्यकर्ताओं ने प्रभावित क्षेत्रों में सक्रिय रूप से सेवाएं दींं। इन कार्यकर्ताओं ने प्रदेश में 68 स्थायी सेवा कार्य केन्द्र चलाए। सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने मंडी के बाड़ा और आई.पी.एच. रेस्ट हाउस में शरण लिए प्रभावित परिवारों को भोजन, राशन और अन्य आवश्यक सामग्री प्रदान की। इसके अलावा पीड़ितों की सहायता के लिए थुनाग (सराज, मंडी) में राहत सेवा बेस कैंप स्थापित किया गया। सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने प्रभावित गांवों में जाकर पीड़ित परिवारों को राशन, भोजन सामग्री, दवाइयां एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया।
सेवा भारती, करसोग द्वारा छतरी में प्रभावित लोगों की बर्तन, बिस्तर, भोजन इत्यादि दिया गया। इसी तरह सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने थुनाग व उसके आसपास की लगभग 13 पंचायतों में 600 से अधिक परिवारों को राहत सामग्री दी। सरकाघाट उपमंडल के अंतर्गत आने वाले बकारटा के गध्याणी गांव में, जिस परिवार का कच्चा मकान जमींदोज हो गया था, उस बेघर परिवार की मदद सेवा भारती ने की।
कांगड़ा के नूरपुर में सेवा भारती एवं संघ के कार्यकर्ताओं ने प्रभावितों को न केवल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया, बल्कि उन्हें भोजन, दवाई और आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई। नूरपुर के मंड क्षेत्र में स्वयंसेवकों ने कई परिवारों को सुरक्षित निकाला और उन्हें राहत शिविरों तक पहुंचाया। केवल नूरपुर ही नहीं, बल्कि मंडी, चंबा, कुल्लू, रामपुर, शिमला और लाहौल जैसे प्रभावित जिलों में भी सेवा भारती और संघ के कार्यकर्ता दिन-रात बिना रुके कार्य करते रहे। कांगड़ा के इंदौरा क्षेत्र में 350 परिवारों को दवाइयां दी गईं और उनके स्वास्थ्य का परीक्षण भी किया गया।

जम्मू-कश्मीर
इस वर्ष बाढ़ ने जम्मू-कश्मीर में भी अपना रौद्र रूप दिखाया। जम्मू क्षेत्र में भारी तबाही हुई। बाढ़ संकट की इस घड़ी में सेवा भारती के लगभग 200 कार्यकर्ताओं ने विभिन्न जिलों के गांवों में सहायता सामग्री पहुंचाई। स्वयंसेवकों ने प्रदेश के कठुआ, बसोहली, बिल्लावर, सांबा, जम्मू, उधमपुर, रामबन, भद्रवाह, बनी आदि जिलों में राहत कार्य किया। बता दें कि 8 सितंबर को लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण उधमपुर-रामबन, उधमपुर-बतोते, किश्तवार-बतोते, बसोली-बनी से सड़क संपर्क टूट चुका था। इसलिए सुदूर ग्रामीण अंचल से संपर्क करने व सहायता सामग्री पहुंचाने में कठिनाई आ रही थी। इसलिए सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलकर लोगों तक खाद्य सामग्री, राशन, कंबल, चादर व कपड़े आदि सामान पहुंचाया। जम्मू के फलाई मंडल में तेरह घरों में राशन सामग्री पहुचाई गई। वहीं, पीर-खो में स्वयंसेवकों ने सामुदायिक रसोई के माध्यम से लगभग 150 लोगों को तीन समय का भोजन उपलब्ध करवाया।
एक स्वयंसेवक के अनुसार सांबा जिले के बाढ़ से प्रभावित सुदूर के तीन गांवों से बीस दिन बाद संपर्क हो सका। स्वयंसेवक वहां पैदल ही पहुंचे और पीड़ितों की मदद की। इन सहायता सामग्रियों में राशन, टाॅर्च, मोमबत्ती, साबुन, कंबल, तिरपाल आदि चीजें शामिल थीं। बसोहली के शीतल नगर ब्लाॅक की सारा पंचायत में बीस घरों में राहत सामग्री पहुंचाई गई। इस सहायता कार्य में स्थानीय तीन मुसलमान परिवारों ने स्वयंसेवकों की मदद की। यहां बच्चों के पढ़ने के लिए किताबें, काॅपियां और बैग भी बांटे गए।
प्रधानमंत्री ने की सहायता

गत 9 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बाढ़-ग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की विभीषिका को देखा। इसके बाद उन्होंने बाढ़ से प्रभावित कुछ परिवारों से भेंट की और उन्हें हरसंभव मदद देने का भरोसा दिया। प्रधानमंत्री ने पंजाब को 1600 रु. और हिमाचल को 1500 करोड़ रु. की सहायता देने की घोषणा की। हालांकि श्री माेदी के दिल्ली लौटते ही पंजाब के कुछ मंत्रियों ने राजनितिक विद्वेष के चलते इस सहायता राशि को ‘अपर्याप्त’ बताया। बता दें कि इन दिनों पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ‘अस्पताल में भर्ती’ हैं। इस कारण राज्य सरकार का कार्य भी लचर दिख रहा है। इससे पीड़ितों में सरकार को लेकर गुस्सा है। कुछ लोग तो आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। पंजाब के लोगों का कहना है कि जो केजरीवाल बराबर हवाई जहाज से पंजाब आते रहे हैं, वे अब पंजाब क्यों नहीं आ रहे हैं!
पंजाब
अब पंजाब में पानी उतर रहा है, परंतु बहुत से इलाकों में स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पिछले 38 वर्ष में सबसे भीषण बाढ़ है। इससे पहले 1988 में आई बाढ़ ने राज्य में भारी तबाही मचाई थी। इस बार राज्य के 23 जिलों में लगभग 1,900 गांव जलमग्न हुए। करीब 3.8 लाख लोग सीधे प्रभावित हुए और हजारों लोगों ने राहत शिविरों में शरण ली। राहत अभियान में सेना, सीमा सुरक्षा बल और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन और राजकीय आपदा प्रबंधन की टीमें सक्रिय रहीं। राहत, बचाव व पुनर्वास के कार्यों में अनेक सामाजिक संगठन लगे।
इन संगठनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेवा भारती, माधव राव मूले स्मारक समिति, संस्कृति मंदिर इत्यादि का विशेष उल्लेखनीय योगदान रहा। इन संगठनों के कार्यकर्ता पहले दिन से ही राहत एवं पुनर्वास कार्यों में निरंतर संलग्न रहे। पठानकोट विभाग के अंतर्गत आने वाले गुरदासपुर, मुकेरियां, पठानकोट के कई गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। यहां आर्थिक दृष्टि से काफी नुकसान हुआ और सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए। राहत और बचाव कार्यों में संघ परिवार के अनेक संगठन लगे। प्रभावित क्षेत्रों में भोजन, जल, तिरपाल, अस्थायी आश्रय, पशुओं के लिए चारा, कपड़े और कंबल जैसी आवश्यक वस्तुएं वितरित की गईं। जरूरतमंदों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सा शिविर लगाए गए और दवाइयां वितरित की गईं। 470 कार्यकर्ता सेवाकार्यों में जुटे और 1,800 परिवारों की सहायता की गई।
जालंधर विभाग (जालंधर महानगर एवं शहीद भगत सिंह नगर) में आई आपदा से कुल 9 गांव प्रभावित हुए। सेवा भारती के लगभग 25 कार्यकर्ताओं ने मिलकर 150 परिवारों तक सहायता पहुंचाई। प्रभावित परिवारों को खाना और पीने का पानी उपलब्ध कराया गया। छह चिकित्सा शिविर लगाए गए। एक स्थान पर राशन वितरण किया गया और 100 कुंतल चारा फिरोजपुर भेजा गया। इसके अतिरिक्त 150 लोगों को दवाई दी गई। कपूरथला जिले में कुल 50 गांव प्रभावित हुए। यहां 8 कार्यकर्ताओं ने मिलकर 50 परिवारों को सहायता प्रदान की। प्रभावित परिवारों को पानी, दवाइयां, मोमबत्तियां और ओआरएस के पैकेट उपलब्ध कराए गए।
फिरोजपुर विभाग में 47 गांव प्रभावित हुए थे। यहां राहत और सेवा कार्यों में 40 संगठन सक्रिय रहे, जिनमें सेवा भारती, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रमुख हैं। लगभग 60 कार्यकर्ताओं ने मिलकर 550 परिवारों को सहायता प्रदान की। अब तक 10 स्थानों पर राशन वितरण और 10 स्थानों पर चारा वितरण किया गया। इसके अतिरिरक्त 150 तिरपाल, 500 कंबल और 50 लोगों तक दवाइयां पहुंचाई गईं।

मोगा में 15 गांव प्रभावित हुए। राहत कार्यों में सेवा भारती सहित 10 संगठन सक्रिय रूप से लगे रहे और लगभग 50 कार्यकर्ताओं ने मिलकर 350 परिवारों को सहायता पहुंचाई। प्रभावित परिवारों को चीनी, चाय, चावल, दाल, पानी और दवाइयां उपलब्ध कराई गईं। अब तक 15 स्थानों पर राशन वितरण और 10 स्थानों पर चारा वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त 250 तिरपाल, 50 कंबल और 150 लोगों तक दवाइयां वितरित की गई। राहत कार्यों में 5 धार्मिक तथा 5 सामाजिक संगठनों ने भी सहयोग किया।
फाजिल्का क्षेत्र में बाढ़ से कुल 29 गांव प्रभावित हुए। राहत कार्यों में सेवा भारती और भारत विकास परिषद सहित 12 संगठन सक्रिय रहे, जिनके 42 कार्यकर्ताओं ने मिलकर लगभग 250 परिवारों को सहायता पहुंचाई। प्रभावित लोगों को राशन, पानी, हरा चारा, मीठी रोटी, बिस्कुट और रस जैसी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। अब तक 4 स्थानों पर राशन वितरण और 5 स्थानों पर चारा वितरण किया गया। साथ ही एक गांव में दवाइयां भी बांटी गई।
अमतृसर जिले में 90 गांव प्रभावित हुए। राहत और सेवा कार्यों में 8 संगठन सक्रिय रूप से जुड़े रहे, जिनमें सेवा भारती, सरहदी लोक सेवा समिति, विश्व हिंदू परिषद, भारत विकास परिषद, माधव राम ट्रस्ट और भाजपा जैसे संगठन प्रमुख रहे। लगभग 300 कार्यकर्ताओं ने मिलकर अब तक 1,210 परिवारों को विभिन्न प्रकार की सहायता पहुंचाई है।
बटाला जिले में बाढ़ से 175 गांव प्रभावित हुए। यहां सरहदी लोक सेवा समिति और सेवा भारती जैसे संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राहत कार्य किए। अब तक 6,000 परिवारों को सहायता पहुंचाई गई है। 50 स्थानों पर राशन वितरण हुआ, 10–15 गांवों में चारा उपलब्ध कराया गया और 120 तिरपाल बांटे गए। दवाइयां भी बड़ी संख्या में प्रभावित लोगों तक पहुंची हैं।
तेलंगाना
तेलंगाना में पिछले दिनों भारी बारिश हुई। इस कारण हैदराबाद से लगभग 115 किलोमीटर दूर कामारेड्डी सबसे अधिक प्रभावित हुआ। इस मुश्किल घड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और सेवा भारती के कार्यकर्ता सबसे पहले आगे आए और बाढ़ प्रभावित परिवारों को समय पर बचाव और राहत पहुंचाई। स्वयंसेवकों ने जलमग्न इलाकों में फंसे 1,000 से अधिक लोगों को बचाने में एन.डी.आर.एफ. और एस.डी.आर.एफ. को सहयोग दिया। स्वयंसेवकों ने राजमार्ग के किनारे रंगमपल्ली और बसवापुर में फंसे वाहन चालकों को भोजन वितरित किया और लगभग 700 लोगों को केले, बिस्कुट और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया। मोहम्मद नगर मंडल के थुनकीपल्ली गांव में सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने एक विद्यालय में शरण लिए हुए परिवारों के लिए दवाइयां, नाश्ता और भोजन का प्रबंध किया। राजमपेट मंडल में भारी बारिश हुई। लगातार बारिश ने घरों को तबाह कर दिया और लगभग 250 लोग बेघर हो गए। संघ के स्वयंसेवकों ने तुरंत भोजन के पैकेट तैयार कर वितरित किए। बाद में प्रभावित लोगों को चावल, मक्के का आटा, दालें, नमक, मिर्च, तेल, बर्तन, कपड़े और कंबल उपलब्ध कराए।
बाढ़ और राहत

दिल्ली
- पीड़ित परिवारों की अनुमानित संख्या—2800 से 3000
- सेवा कार्यों में लगे कार्यकर्ताओं की संख्या-175 से 200
- गढ़ी ग्राम और हिंदू शरणार्थी बस्ती, सिग्नेचर ब्रिज में लगभग 200 परिवार प्रभावित हुए। इन सबके लिए सेवा भारती ने भोजन की व्यवस्था की और एन.एम.ओ. ने चिकित्सा की। 32-40 कार्यकर्ता कार्य में जुटे।
- मयूर विहार के खादर और चिल्ला क्षेत्र में सेवा भारती ने सहायता शिविर लगाए। भोजन के साथ दवाइयों की व्यवस्था की। 50-60 कार्यकर्ताओं ने 1,200 विस्थापित परिवारों के लिए सुविधाएं जुटाईं।
- बदरपुर जिले के सौरभ विहार नगर में 300 परिवार बाढ़ से प्रभावित हुए। 25 कार्यकर्ताओं ने दिन-रात इनकी देखरेख की।
जम्मू-कश्मीर
- 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले में मचैल माता यात्रा के मुख्य पड़ाव चशोती में बादल फटा।
- लंगर में 20,000 से अधिक लोगों के भोजन की व्यवस्था 15 अगस्त से 25 अगस्त तक।
- राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना और अर्ध सैनिक बलों के जवानों के लिए भी भोजन इसी लंगर से उपलब्ध करवाया गया।
- भद्रवाह में बाढ़
- घायलों को निकटवर्ती अस्पतालों में उपचार के लिए भर्ती कराया
- 16 अगस्त को कठुआ जिले की जोध घाटी में बादल फटने से 9 लोगों की मौत।
- स्वयंसेवकों ने घटनास्थल पर पहुंच कर राहत एवं बचाव कार्यों में सेना का सहयोग किया।
- सड़क संपर्क टूटने के कारण स्वयंसेवकों ने कई किमी पैदल चल प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाई।
- बिलावर जिले के 23 गांव बाढ़ से प्रभावित
- बसोहली जिले के बनी क्षेत्र में बाढ़
- 23 अगस्त को उधमपुर जिले में बाढ़
- विशेषकर उधमपुर में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के कारण फंसे वाहनों के चालकों और अन्य लोगों के लिए 26 से लेकर 28 अगस्त तक लगातार तीन दिन लंगर की व्यवस्था संघ और सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने की।
- परगवाल खंड में बी.एस.एफ. की चौकी पानी में बह गई। वहां रह रहे अपने स्वयंसेवकों द्वारा बी.एस.एफ. के कुछ जवानों को जो, बह कर सीमा पार 300 मीटर तक चले गए थे, सुरक्षित वापस लाया गया।
- गत 26 अगस्त को जम्मू और पंजाब में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर रेलवे प्रबंधन द्वारा जब ट्रेनें स्थगित की गईं तो जम्मू में संघ और सेवा भारती ने चार स्थानों पर प्रवासी लोगों के लिए ठहरने और भोजन की व्यवस्था की।
- जम्मू शहर में तवी नदी में आई बाढ़
- तवी नदी के किनारे जम्मू शहर में हरी की पौड़ी पर स्वयंसेवकों ने मंदिर परिसर की सफाई के लिए अभियान चलाया
- वैष्णो देवी यात्रा पर आए 38 श्रदालुओं की भूस्खलन की चपेट में आने से मौत
- 2,000 से अधिक कार्यकर्ता राहत कार्य में जुटे।

















