नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इतिहास में पहली बार एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक आयोजन होने जा रहा है। विश्वमांगल्य सभा के तत्वावधान में आयोजित विशेष कार्यक्रमों की श्रृंखला में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी देश की प्रबुद्ध मातृशक्ति के साथ ‘युगानुकूल मातृत्व’ (Contemporary Motherhood) विषय पर विस्तृत संवाद करेंगे। दिल्ली के प्रतिष्ठित डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित होने वाला यह सत्र न केवल संगठन के लिए, बल्कि भारतीय नारी के वैचारिक विमर्श के लिए भी एक मील का पत्थर माना जा रहा है!
16 वर्षों से सक्रिय है विश्वमांगल्य सभा
विश्वमांगल्य सभा की राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. वृषाली जोशी ने आयोजित प्रेस वार्ता में संगठन की गौरवशाली यात्रा का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि विश्वमांगल्य सभा की स्थापना 19 जनवरी 2010 को नागपुर, महाराष्ट्र में हुई थी। पिछले 16 वर्षों से यह संगठन मातृशक्ति के सशक्तिकरण, परिवार और सामाजिक जागरण के क्षेत्र में राष्ट्रव्यापी स्तर पर सक्रिय है।
संगठन का मूल ध्येयवाक्य “न मातु : पर देवतम” है, जिसका अर्थ है “माँ से बढ़कर कोई दैवत नहीं है”। डॉ. जोशी ने स्पष्ट किया कि विश्वमांगल्य सभा महिलाओं के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक कार्य करने वाला एक पूर्णतः स्वतंत्र संगठन है, जो सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में यह संगठन देश के 33 प्रांतों में कार्य कर रहा है, जिसमें 3,500 दायित्वधारी कार्यकर्ता और लगभग 6 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं।
ऐतिहासिक ‘मातृत्व विमर्श’: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का विशेष संबोधन
इस वर्ष आयोजित होने वाली प्रबोधन बैठकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पहली बार सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने ‘मातृत्व’ जैसे गंभीर और महत्वपूर्ण विषय पर प्रबुद्ध महिलाओं के साथ चर्चा करने का निर्णय लिया है।
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अब तक के पाँचों सरसंघचालकों के कार्यकाल में यह पहला ऐसा अवसर होगा, जब सरसंघचालक जी देश की प्रबुद्ध मातृशक्ति के साथ ‘मातृत्व विमर्श’ विषय पर न केवल विस्तृत संवाद करेंगे, बल्कि प्रश्नोत्तर सत्र के माध्यम से उनके जिज्ञासाओं का समाधान भी करेंगे।” – डॉ. वृषाली जोशी, राष्ट्रीय संगठन मंत्री, विश्वमांगल्य सभा
कार्यक्रम की रूपरेखा और महत्वपूर्ण तिथियाँ
डॉ. जोशी ने आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि उत्तर और दक्षिण भारत के लिए अलग-अलग बैठकों का आयोजन किया जा रहा है:
- उत्तर भारत प्रबोधन बैठक: 23 एवं 24 जुलाई को विश्व युवक केंद्र, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसमें जम्मू, लद्दाख, पश्चिम बंगाल, अवध, मालवा, राजस्थान और बिहार सहित 19 प्रांतों से लगभग 280 महिला प्रतिनिधि भाग लेंगी।
- दक्षिण भारत बैठक: 25-26 जुलाई को हैदराबाद में संपन्न होगी।
- मुख्य संवाद सत्र: 24 जुलाई की शाम 5:00 बजे, डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (जनपथ) में देश की प्रबुद्ध मातृशक्ति के साथ यह विशेष संवाद कार्यक्रम होगा।
दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से 700 से 800 महिलाओं की उपस्थिति का अनुमान है, जबकि हैदराबाद में 1,300 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
मीडिया के लिए विशेष अवसर
संगठन ने मीडिया प्रतिनिधियों को जानकारी दी है कि 24 जुलाई को सुबह 9:30 बजे विश्व युवक केंद्र में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के साथ समापन सत्र के प्रारंभ में फोटो-ऑप (Photo-op) का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक संपन्न होने के पश्चात, संगठन की ओर से पूरे वर्ष की कार्ययोजना और बैठकों के निष्कर्षों को आधिकारिक रूप से मीडिया के साथ साझा किया जाएगा।













