सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ज्ञानवापी विवाद में दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के लिये वार्ता की। आज दिन में करीब डेढ़ बजे शुरू हुई इस मध्यस्थता बैठक में दोनों तरफ से लोग पहुंचे। मात्र सात मिनट में ही वार्ता विफल हो गई।
ज्ञानवापी प्रकरण में मुस्लिम पक्ष ने कहा कि मामला न्यायालय के विचाराधीन है। अतः मीडिएशन उनके लिए बाध्यकारी नहीं है। मिडियेशन का कोई औचित्य भी नहीं है।
हिंदू पक्ष ने कहा कि आप लोग ज्ञानवापी प्रकरण में अतिक्रमणकारी हैं और अतिक्रमणकारियों को ज्ञानवापीय परिसर को मुक्त कर देना चाहिए जिससे भविष्य में काशी विश्वनाथ जी के ज्योतिर्लिंग के स्थान पर मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके।
ज्ञानवापी: अभी तक क्या – क्या हुआ
जनवरी 1993 के आस पास तत्कालीन जिलाधिकारी सौरभ चन्द्र श्रीवास्तव ने कमरों ( पूर्व में मंडप था ) अब इसे तहखाना भी कहा जा रहा हैं। इस में ताला बंद करवा दिया था। जिसकी चाभी एक मस्जिद कमेटी और एक प्रशासन को देने की बात सामने आयी थी। साथ ही परिसर को बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी थी। उस समय अयोध्या में विवाद चल रहा था। वर्ष 1993 के पहले तक वहां पर लोगों वहां पर आया जाया करते थे। काशी के लोगों ने वहां पर तारकेश्वर विश्वेश्वर महादेव का दर्शन पूजन भी किया है।
18 अगस्त 2021 को राखी सिंह समेत 5 महिलाओं ने सिविल जज सीनियर डिवीजन के न्यायालय में याचिका दाखिल किया। याचिका में मांग की गई कि श्रृंगार गौरी में दर्शन पूजन की अनुमति दी जाय और परिसर में अन्य देवी देवताओं की मूर्तियों को सुरक्षित किया जाय ।
26 अप्रैल 2022 को न्यायालय द्वारा अजय मिश्रा को अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त कर परिसर के अंदर वीडियोग्राफी फोटोग्राफी के साथ रिपोर्ट देने को कहा।
6 और 7 मई 2022 को सर्वे का आदेश न्यायालय से मिला। 6 मई को पहली बार अधिवक्ता आयुक्त के साथ वादी और प्रतिवादी पक्ष ने कुछ हिस्सों का दो घंटे सर्वे किया। 7 मई को टीम जब पहुंची तो मुस्लिम पक्ष ने विरोध शुरू कर दिया।
12 मई को न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए अजय मिश्रा को ही अधिवक्ता आयुक्त बनाये रखा। साथ ही विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह और सहायक अधिवक्ता आयुक्त अजय प्रताप को नियुक्त किया।
14, 15 और 16 मई 2022 को सुरक्षा व्यवस्था के साथ परिसर का सर्वे और वीडियोग्राफी हुआ। 16 मई को हिंदू पक्ष ने दावा किया कि वजूखाने में शिवलिंग मिला हैं। इस परिवार को तत्काल सील कर दिया गया।
इस दौरान सूचनाओं को लीक करने के आरोप में अजय मिश्रा को एडवोकेट आयुक्त के दायित्व से न्यायालय ने हटा दिया। 17 मई को न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं हो पाया। 18 मई को अजय मिश्र ने पूर्व अधिवक्ता आयुक्त के तौर पर अपनी दो दिन की सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत कर अंदर मिले साक्ष्यों की जानकारी दी। हिंदू धर्म से जुड़ी कई महत्वपूर्ण आकृतियां जिसमे कमल, शेषनाग, स्वास्तिक का उल्लेख किया गया।
19 मई 2022 को विशेष अधिवक्ता आयुक्त विशाल सिंह ने 14 से 16 मई को रिपोर्ट को प्रस्तुत की। उन्होंने रिपोर्ट में गुम्बद के अंदर शिखर, दीवारों पर हाथी के सूंड, घंटियों का स्पष्ठ उल्लेख किया गया।
महिला याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि नंदी और परिसर में मिले नंदी के बीच की दीवार को गिरा दिया जाये। वहीं सरकारी अधिवक्ता के ओर से भी याचिका दी गयी कि सील परिसर में स्थित तालाब में मिली मछलियों को कहीं और रखा जाये। 24 मई 2022 को किरण सिंह द्वारा याचिका दाखिल किया गया। इसमें उन्होंने ज्ञानवापी परिसर में नमाज पढ़ने पर रोक लगाने की मांग की।
25 मई 2022 को तत्कालीन जिला जज ए के विश्वेश की अदालत ने याचिका को फास्ट ट्रैक कोर्ट में शिफ्ट कर दिया। 18 अक्टूबर 2022 को दोनों पक्षों को अदालत ने लिखित बहस दाखिल करने को कहा। 21 अक्टूबर को तत्कालीन जिला जज ए के विश्वेश की अदालत ने अंजुमन इंतेजामिया कमेटी पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया। मुस्लिम पक्ष ने समय पर आपत्ति दाखिल नहीं किया था।
27 अक्टूबर 2022 को फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में आदि विशेश्वर विराजमान केस में पोषणीयता को लेकर सुनवाई पूर्ण किया। कोर्ट ने 8 नवंबर के लिए आदेश सुरक्षित रख लिया। 24 मई को किरण सिंह द्वारा वाद दाखिल किया गया था।
2 नवंबर 2022 को हिंदू पक्ष द्वारा दोबारा कमीशन सर्वे की मांग वाली याचिका पर मुस्लिम पक्ष ने अपना आपत्ति जिला अदालत में दाखिल किया। 11 नवंबर को अगली तारीख दी गयी।
17 नवंबर 2022 को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुस्लिम पक्ष को झटका लगा। किरण सिंह के पोषणीयता के वाद को अदालत ने सुनवाई योग्य माना। वाद में मुसलमानों के ज्ञानवापी में प्रवेश को वर्जित करने की भी मांग की गई।
17 अप्रैल 2023 नमाज को लेकर आ रही समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल किया। इस पर कोर्ट ने वाराणसी के जिलाधिकारी को समस्या के समाधान का आदेश दिया।
19 अप्रैल 2023 को जिलाधिकारी की अगुवाई में समिति की बैठक में वजू की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी। ईद के पहले सचल शौचालय और नमाजियों को उचित व्यवस्था दिया गया।
12 मई 2023 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सर्वे के दौरान मिले शिवलिंग की साइंटफिक सर्वे की याचिका को स्वीकार कर लिया।
16 मई को 2023 को हिंदू पक्ष की ज्ञानवापी परिसर की ASI सर्वे की याचिका को वाराणसी कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
23 मई 2023 को जनपद न्यायधीश वाराणसी ने एक ही प्रकृति से जुड़े मामले की सुनवाई साथ में करने की याचिका को स्वीकार कर लिया।
















