मध्य प्रदेश

भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, परिसर में नहीं होगी नमाज

सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

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Panchjanya

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश के भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। भोजशाला परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को भोजशाला परिसर से अलग पास में ही नमाज पढ़ने के लिए जगह दी जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) बिना अनुमति के भोजशाला में कोई छेड़छाड़ या आंतरिक बदलाव नहीं करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करेगा और इस बीच, अंतरिम उपाय के तौर पर मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच  नमाज पढ़ने के लिए कॉम्प्लेक्स के पास एक अलग खुली जगह दी जा सकती है।न्यायालय ने यह भी कहा कि यह मामला बहुत ही संवेदनशील है और हर शब्द को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी।

भोजशाला पर हाई कोर्ट का यह है फैसला

  1. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खण्डपीठ ने भोजशाला कमाल मौला मस्जिद विवाद में गत दिनों अपना फैसला सुनाया था। न्यायालय ने भोजशाला के वाग्देवी मंदिर की प्रमाणिकता की पुष्टि की।
  2. न्यायालय ने यह घोषित किया कि “भोजशाला एवं कमाल मौला मस्जिद का विवादित परिसर 18 मार्च 1904 से 1958 के अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित स्मारक है।
  3. न्यायालय ने विवादित परिसर के धार्मिक स्वरूप को ‘माता वाग्देवी (सरस्वती) के मंदिर सहित भोजशाला’ माना है।
  4. आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया (एएसआई) के निर्देशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को पारित आदेश के उस भाग को अपास्त कर दिया गया है, जिसमें हिन्दू समुदाय के पूजा-अधिकारों को सीमित किया गया था तथा मुस्लिम समुदाय को नमाज़ की अनुमति प्रदान की गई थी।
  5. भारत सरकार एवं एएसआई को भोजशाला मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और संस्कृत शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही आदेशित किया है, कि एएसआई सम्पूर्ण परिसर के संरक्षण, प्रबंधन एवं धार्मिक गतिविधियों के विनियमन की सर्वोच्च निगरानी संस्था बनी रहेगी।
  6. न्यायालय ने एएसआई को संरक्षण, संवर्धन एवं धार्मिक प्रवेश के नियमन पर पूर्ण पर्यवेक्षणीय अधिकार प्रदान किए हैं।
  7. लंदन संग्रहालय में स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाकर भोजशाला परिसर में पुनः स्थापित करने संबंधी मांग पर न्यायालय ने कहा कि भारत सरकार प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विधिसम्मत विचार कर सकती है।
  8. मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा हेतु न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित पक्ष धार जिले में मस्जिद अथवा नमाज़ स्थल निर्माण के लिए भूमि आबंटन का आवेदन प्रस्तुत करता है, तो राज्य सरकार विधि अनुसार उपयुक्त एवं स्थायी भूमि आबंटन पर विचार कर सकती है।
  9. माननीय न्यायालय ने हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं कुलदीप तिवारी द्वारा दायर याचिकाओं को स्वीकार किया, जबकि मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, काजी जकुल्लाह एवं अन्य द्वारा दायर याचिकाएँ एवं अपीलें निरस्त कर दी गई।

 

आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने हाई कोर्ट के फैसले पर हस्तक्षेप करने से मना कर दिया।

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