‘भोजशाला एक मंदिर है’ मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने इस पर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट के इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इस जगह को राजा भोज की भोजशाला माना है, जहां मां वाग्देवी (सरस्वती) की आराधना का महत्व था।
सीएम यादव ने मीडिया से बात करते हुए जोर दिया कि इस ऐतिहासिक जगह का गौरव वापस लौटाना जरूरी है।
मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर है संस्कृत शिक्षा का केंद्र
धार की भोजशाला लंबे समय से विवाद में रही है। हाईकोर्ट के फैसले में इसे मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर और संस्कृत शिक्षा का केंद्र माना गया है। कोर्ट ने पुरातात्विक सबूतों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और हिंदू परंपरा के आधार पर यह फैसला सुनाया। सीएम यादव ने याद दिलाया कि अयोध्या मामले में कोर्ट के फैसले के बाद पूरे देश ने भाईचारे का अच्छा उदाहरण पेश किया था। उसी तर्ज पर मध्य प्रदेश भी भोजशाला मामले में शांति और सद्भाव बनाए रखते हुए आगे बढ़ेगा।
प्रतिमा लाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वाग्देवी की प्रतिमा, जो पहले विदेश (खासकर लंदन) ले जाई गई थी, उसे वापस लाने के लिए कानूनी और उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी। राज्य सरकार इस दिशा में केंद्र सरकार के साथ भी समन्वय करेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम सिर्फ धार्मिक भावना को सम्मान देने के लिए नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए है।
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विश्व हिन्दू परिषद ने फैसले का किया स्वागत
विश्व हिंदू परिषद ने भी फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह भारत की सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपरा की जीत है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अब हिंदू समाज को अपने ही जगह पर पूजा के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। दूसरी तरफ, कुछ विपक्षी नेताओं जैसे असदुद्दीन ओवैसी और दिग्विजय सिंह ने कहा कि अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट करेगा। ओवैसी ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के इस फैसले को पलट सकता है।
















