भारतीय संस्कृति का समस्त आध्यात्मिक इतिहास एक ही शाश्वत सत्य का उद्घोष करता है कि श्रद्धा का आधार परमात्मा है, व्यक्ति नहीं; धर्म है, किसी व्यवस्था का बाह्य स्वरूप नहीं; सत्य है, किसी कालविशेष की परिस्थितियां नहीं। व्यक्ति सीमित है, संस्था परिवर्तनशील है, व्यवस्था समय के साथ परिमार्जित होती रहती है; किंतु भगवान, धर्म और … Continue reading असत्य का नहीं होता अस्तित्व
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