भारत और चीन के बीच हिमालयी बॉर्डर पर पारंपरिक व्यापार शनिवार को दोबारा शुरू हो गया। लगभग 6 साल बाद लिपुलेख (उत्तराखंड) और शिपकी ला (हिमाचल प्रदेश) के रास्ते व्यापार फिर से शुरू हो गया है। ये दोनों रूट कोविड-19 महामारी के बाद से बंद थे।
लिपुलेख में शुरुआत
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में लिपुलेख पोस्ट पर पहले बैच में 16 व्यापारी और 4 सपोर्ट स्टाफ तिब्बत की तरफ गए। इस बार कोई सामान नहीं ले गए, सिर्फ व्यापार व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए। चीनी अधिकारियों ने पहले बैच को 20 लोगों तक सीमित रखा। उन्होंने कहा कि ताकलाकोट ट्रेड मार्ट पर इंफ्रास्ट्रक्चर अभी पूरा नहीं है। साथ ही उन्होंने सभी व्यापारियों की पूरी डिटेल पहले से मांगी थी। 2019 के आखिरी सीजन में जिन लोगों ने ट्रेडिंग की थी, उन्हें प्राथमिकता दी गई। धरचूला के SDM और डिस्ट्रिक्ट ट्रेड ऑफिसर आशीष जोशी ने बताया कि 2019 में जिन व्यापारियों ने सामान ताकलाकोट में छोड़ा था, उन्हीं को पहले मौका दिया गया।
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शिपकी ला में ट्रेडिंग
हिमाचल प्रदेश में रेवेन्यू मिनिस्टर जगत सिंह नेगी ने पहले बैच के 16 भारतीय व्यापारियों को रवाना किया। ये लोग घोड़ों के साथ शिपकी ला पास (3,930 मीटर ऊंचा) पार करके शिपकी गांव (तिब्बत) की तरफ गए। शिपकी ला रूट 30 नवंबर तक खुला रहेगा। यहां पुराने बार्टर सिस्टम से ही व्यापार होगा। भारतीय व्यापारी वहां ज्यादा से ज्यादा 72 घंटे रह सकते हैं। होम डिपार्टमेंट ने 53 व्यापारियों की जांच के बाद मंजूरी दी है। भारतीय व्यापारी 36 तरह की चीजें एक्सपोर्ट कर सकते हैं – जैसे सूखे मेवे, मसाले, हैंडीक्राफ्ट और जड़ी-बूटियां।
चीनी व्यापारी 20 कैटेगरी की चीजें ला सकते हैं – पश्मीना, ऊन, याक के बाल, भेड़ और बकरी की खाल, चाइना क्ले आदि। कुल मिलाकर भारतीय साइड से 72 कैटेगरी और चाइनीज साइड से 30 कैटेगरी की चीजों की लिस्ट है।
देरी क्यों हुई
ट्रेडिंग 1 जून को शुरू होनी थी, लेकिन सुरक्षा कारणों और दोनों तरफ इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी पूरी न होने के कारण टल गई। हिमाचल में नामग्या गांव के पास पूह सब-डिवीजन में 1.7 करोड़ रुपये की लागत से छुप्पन ट्रेड मार्ट का उद्घाटन भी किया गया। इससे बॉर्डर ट्रेड को आसानी होगी।
स्थानीय व्यापारियों ने ज्यादा आइटम्स की लिस्ट बढ़ाने की मांग की। जगत सिंह नेगी ने कहा कि ये प्रस्ताव मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और विदेश मंत्रालय के पास भेज दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच ये छोटा लेकिन पारंपरिक व्यापार स्थानीय लोगों की आजीविका से जुड़ा है। लंबे समय बाद शुरू होने से व्यापारी उम्मीद भरे हैं कि अब धीरे-धीरे चीजें सामान्य होंगी।












