"देह लेकर आए, ध्येय परिषद ने दिया..." कश्मीर से असम तक गूंजी ABVP की हुंकार
September 12, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

ABVP Foundation Day: अल्प बीज से विशाल वटवृक्ष तक… जानिए राष्ट्र-जागरण की अलख जगाने वाले एबीवीपी की गौरवगाथा!

9 जुलाई 1949 को स्थापित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के स्थापना दिवस और राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर जानिए इसके संघर्ष और राष्ट्र-निर्माण की पूरी कहानी।

Written byवासुदेव देवनानीवासुदेव देवनानी — edited by Shivam Dixit
Jul 9, 2026, 06:00 am IST
inभारत, मत अभिमत
ABVP Foundation Day National Students Day Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad History

9 जुलाई 1949 भारतीय इतिहास की उस पावन घड़ी में, जब स्वतंत्रता की नवोदित किरणें राष्ट्र-निर्माण के स्वप्न को आकार दे रही थीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) का उदय हुआ। स्वामी विवेकानंद के चिरंतन आदर्शों—ज्ञान, शील एवं एकता—से प्रेरित यह महान छात्र संगठन आज विश्व के सबसे विशाल एवं प्रभावशाली विद्यार्थी मंच के रूप में प्रतिष्ठित है।

राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के इस पावन अवसर पर मैं उन महान आत्माओं को शत-शत नमन करता हूं, जिन्होंने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों—ज्ञान, शील और एकता—को अपने जीवन का मार्गदर्शक बनाया।

राष्ट्रभाव के संस्कारों से मिली जीवन को दिशा

मेरा अपना जीवन भी इसी पावन धारा से जुड़ा है। युवावस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रेरणा-क्षेत्र में दीक्षित होकर मैं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से गहराई से जुड़ा। राजस्थान में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष पद की नौ वर्षों की जिम्मेदारी निभाना मेरे लिए साधना का काल रहा।

उन दिनों महाविद्यालय के परिसरों में हम न केवल शैक्षणिक उत्कृष्टता एवं छात्र-कल्याण के लिए संघर्ष करते थे, अपितु सांस्कृतिक स्वाभिमान, राष्ट्रीय एकता तथा चरित्र-निर्माण के महान लक्ष्य को भी साकार करने का प्रयास करते थे। एबीवीपी ने हमें यह गहरा बोध कराया कि सच्ची विद्यार्थी सेवा संकीर्ण स्वार्थ-साधना से नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का एक पवित्र यज्ञ मानकर होती है, जिसमें आहुति देना ही पवित्र कार्य है। आज विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन एबीवीपी संपूर्ण राष्ट्र में अपनी कर्मठता, सेवा और राष्ट्रीय स्वाभिमान की संस्कृति को छात्र जीवन में अनुप्राणित कर रहा है।

“देह लेकर आए, ध्येय परिषद ने दिया”

यह पंक्ति एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के जीवन का सार है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकाल में मेरे अंतर्मन में ईश्वरीय अनुशासन, समर्पण और राष्ट्र-प्रथम की जो भावना थी, उसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने और अधिक परिष्कृत, दृढ़ एवं क्रियाशील बनाया।

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में हमारे युवाओं का दायित्व है कि वे प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा और आधुनिक विज्ञान को जोड़कर भारत को विश्व गुरु बनाने में अपना योगदान दें।

शैक्षणिक सुधार और विद्यार्थियों के अधिकारों का हिमायती संगठन

विश्व के सबसे बड़े छात्र संगठन एबीवीपी ने छात्र-छात्राओं की समस्याओं, जैसे फीस वृद्धि, परीक्षाओं में पारदर्शिता और शिक्षा के व्यावसायीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए शिक्षा की सर्वसुलभता और उत्तम गुणवत्ता की हिमायत की है। साथ ही महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयी परिसरों में राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ वैचारिक संघर्ष तथा “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” जैसे नारों को प्रमुखता दी है।

सामाजिक कार्य और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान

संगठन ने सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाते हुए देशभर में विशाल स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया। वर्ष 1999 में एबीवीपी की स्वर्ण जयंती पर औषधीय पौधों सहित 1.5 लाख पौधे लगाए गए। इसके अलावा एबीवीपी ने स्टूडेंट्स फॉर डेवलपमेंट (एस.एफ.डी.) जैसी विशेष पहल करते हुए छात्रों के बीच समग्र और सतत विकास की अवधारणा को दृढ़ता प्रदान की।

वर्ष 1975 में लगे राष्ट्रीय आपातकाल के विरोध में एबीवीपी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी संघर्ष किया। इसके साथ ही मिशन पूर्वोत्तर और सीमादर्शन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से देश के सुदूर क्षेत्रों के छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का कार्य किया।

कश्मीर बचाओ आंदोलन और राष्ट्रीय एकता के लिए संघर्ष

11 सितम्बर 1990 को एबीवीपी के 10 हजार कार्यकर्ता “कश्मीर बचाओ आंदोलन” के तहत तिरंगा फहराने हेतु श्रीनगर के लाल चौक पहुंचे, तिरंगा फहराया और अनुच्छेद 370 एवं 35ए को हटाने की मांग की।

असम में घुसपैठ के मामले में एबीवीपी ने “असम बचाओ, देश बचाओ” का नारा दिया और 2 अक्टूबर 1983 को गुवाहाटी के जजेस फील्ड पर बड़ा प्रदर्शन किया।

बांग्लादेशी घुसपैठ के विरोध में एबीवीपी ने “चिकन नेक” (किशनगंज, बिहार) आंदोलन चलाया और बांग्लादेशी घुसपैठ का पर्दाफाश किया।

इस प्रकार यह स्पष्ट है कि एबीवीपी महज एक छात्र संगठन ही नहीं है, बल्कि राष्ट्र रक्षा, स्वाभिमान, राष्ट्रीय एकता, राष्ट्रवाद और विदेशी घुसपैठ के खिलाफ भारत के युवाओं का एक राष्ट्रीय संगठन है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है।

अल्प बीज से विशाल वटवृक्ष तक की यात्रा

इतिहास साक्षी है कि जब-जब भारत पर संकट आया, तब-तब इस देश की युवा शक्ति ने राष्ट्र की रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित किया। 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम में लगभग अस्सी वर्ष की आयु में भी अमर सेनानी बाबू वीर कुंवर सिंह ने जिस अदम्य साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता को चुनौती दी, वह आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

बिहार से लेकर आजमगढ़ तक अंग्रेजी सेना को पीछे हटने पर विवश करने वाले इस महान योद्धा ने यह सिद्ध किया कि राष्ट्रभक्ति आयु की नहीं, संकल्प की शक्ति होती है।

इसी प्रकार लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने संपूर्ण क्रांति का आह्वान कर युवाओं को सामाजिक परिवर्तन का नेतृत्व सौंपा।

राजस्थान सहित समग्र भारत में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शिक्षा-क्रांति, योग्यता-आधारित सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन तथा सामाजिक सद्भाव जैसे बहुआयामी क्षेत्रों में अपनी अमिट छाप अंकित की है।

यह संगठन बार-बार सिद्ध करता है कि जब विद्यार्थी शक्ति अनुशासन, दूरदृष्टि, त्याग एवं सेवा-भावना से संचालित होती है, तो वह सामाजिक परिवर्तन तथा राष्ट्र-उत्थान की सबसे प्रबल एवं अजेय शक्ति सिद्ध होती है।

देश-विरोधी और विघटनकारी सोच के विरुद्ध वैचारिक संघर्ष

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का मूल दर्शन राष्ट्रवाद है। यहां राष्ट्रवाद किसी राजनीतिक नारे का विषय नहीं है, यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति का विस्तार है। यह वही राष्ट्रवाद है जिसने विविधताओं से भरे भारत को एकता के सूत्र में बांधकर रखा है।

जब समाज को जाति, क्षेत्र, भाषा, संप्रदाय या अलगाववादी विचारों के आधार पर बांटने का प्रयास होता है, तब राष्ट्रीय एकता को चुनौती मिलती है। ऐसे समय में छात्र समाज की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का विश्वास है कि भारत की एकता और अखंडता सर्वोपरि है। इसलिए परिषद विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में ऐसी प्रत्येक विचारधारा का लोकतांत्रिक, संवैधानिक और वैचारिक प्रतिरोध करने का आह्वान करती है, जो राष्ट्र की एकता को कमजोर करने, हिंसा को बढ़ावा देने या समाज में वैमनस्य उत्पन्न करने का प्रयास करती हो।

परिषद मानती है कि किसी भी विचार का उत्तर तर्क, संवाद, अध्ययन और लोकतांत्रिक विमर्श से दिया जाना चाहिए। यही स्वस्थ छात्र जीवन की पहचान है।

छात्र संगठन से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण का आंदोलन

यदि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सात दशक से अधिक लंबे इतिहास का निष्पक्ष अध्ययन किया जाए, तो एक तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण रूप से सामने आता है कि भारत में शायद ही कोई ऐसा छात्र संगठन रहा हो, जिसने स्वयं को केवल छात्रसंघ चुनावों या विश्वविद्यालय परिसरों तक सीमित रखा हो।

विद्यार्थी परिषद ने शिक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमांत क्षेत्रों में जनजागरण, प्राकृतिक आपदाओं में राहत, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, सामाजिक समरसता, अनुसंधान, नवाचार, खेल, संस्कृति तथा राष्ट्रीय एकात्मता जैसे विविध क्षेत्रों में छात्र शक्ति को संगठित करने का सतत प्रयास किया।

यही कारण है कि परिषद की पहचान एक ऐसे छात्र आंदोलन के रूप में स्थापित हुई, जिसने सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने कार्य का अभिन्न अंग बनाया।

व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक की प्रेरक गाथा

इतिहास की एक और उल्लेखनीय विशेषता यह है कि परिषद से जुड़े असंख्य कार्यकर्ताओं ने आगे चलकर शिक्षा, विज्ञान, न्यायपालिका, सेना, प्रशासन, सामाजिक सेवा, पत्रकारिता, उद्योग, राजनीति और सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया। फिर भी संगठन ने स्वयं को कभी किसी एक पेशे, वर्ग या विमर्श तक सीमित नहीं होने दिया। उसकी मूल साधना सदैव व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण की रही है।

संभवतः यही कारण है कि 1949 में रोपित किया गया यह विचार-बीज आज लाखों युवाओं के चरित्र, नेतृत्व, सेवा और राष्ट्रीय भावना की छाया प्रदान करने वाले एक विशाल वटवृक्ष के रूप में विकसित दिखाई देता है।

किसी भी संगठन की वास्तविक सफलता उसके भवनों, पदों या नारों से नहीं, बल्कि उन पीढ़ियों से मापी जाती है, जिनके जीवन को उसने उद्देश्य, दिशा और राष्ट्रीय दृष्टि प्रदान की हो।

इसी कसौटी पर देखें तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का इतिहास केवल एक संगठन का इतिहास नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत में छात्र शक्ति के माध्यम से राष्ट्रीय पुनर्जागरण की एक निरंतर प्रवाहित होती हुई प्रेरक गाथा है।

जय भारत, जय छात्र शक्ति

जय भारत।
जय छात्र शक्ति।

(लेखक वासुदेव देवनानी राजस्थान विधानसभा के माननीय अध्यक्ष हैं)

Topics: पाञ्चजन्य विशेषABVP Foundation Dayकश्मीर बचाओ आंदोलन 1990असम बचाओ देश बचाओ आंदोलनचिकन नेक किशनगंज आंदोलनStudents For Development SFDNationalist Youth Movementsअखिल भारतीय विद्यार्थी परिषदPanchjanya newsराष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस
वासुदेव देवनानी
वासुदेव देवनानी
लेखक वासुदेव देवनानी राजस्थान विधानसभा के माननीय अध्यक्ष हैं। [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारी यात्रा राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर की है’

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बातचीत करते पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारा लक्ष्य सुशासन और विकास’

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी से पाञ्चजन्य की सलाहकार संपादक तृप्ति श्रीवास्तव ने बातचीत की।

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘वंदे मातरम्’ पर भारतवासियों को गर्व 

ओडिशा की उड़ान 2.0’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी से बातचीत करते पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर

सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘अमेरिका में संघ को विरोध से अधिक समर्थन मिला’

शिकागो विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद के विचार: शिकागो भाषण, भारत का पथ-प्रदर्शन और विश्वगुरु की राह

विरासत पर अतिक्रमण

Load More

ताज़ा समाचार

“मुझे पराया महसूस नहीं हुआ”: टोरंटो में सरसंघचालक जी के कार्यक्रम में पहुंचे ईरानी मूल के हसन ने साझा किया अद्भुत अनुभव

arya migration theory genetics archaeology india

दम तोडती अंग्रेजों की आर्यकथा: आनुवंशिकी, घोड़े, सरस्वती और सिनौली के प्रमाणों पर क्या कहता है यह विमर्श?

52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारी तेज, हरिद्वार में जुटेंगे 3,000 से अधिक विद्वान और प्रतिभागी

Pushkar Singh Dhami

धामी कैबिनेट के 10 बड़े फैसले : मेडिकल इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ा, 33 पद सृजित, अधिवक्ताओं की फीस में इजाफा

‘सुशासन संवाद : ओडिशा की उड़ान 2.0’ में  विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र  कुमार जैन से वरिष्ठ पत्रकार अनुराग पुनेठा

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारी यात्रा राम मंदिर से राष्ट्रमंदिर की है’

फिल्म हनुमान अंश

हनुमान अंश : सिनेमाई परदे पर भारत की आध्यात्मिक चेतना की वापसी

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से बातचीत करते पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर

ओडिशा की उड़ान 2.0 : ‘हमारा लक्ष्य सुशासन और विकास’

प्रतीकात्मक तस्वीर

कल का मौसम: 12 सितंबर को देश के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी में तूफानी हवा ने बढ़ाई टेंशन

फ्रांस में सड़क पर नमाज पढ़ते मुस्लिम समाज के लोग।

यूरोप में मुसलमानों को लेकर ‘द इकोनॉमिस्ट’ के लेख पर हंगामा क्यों है?

5 ओरंगुटान की तस्करी की आशंका पर CM माझी ने दिए विस्तृत जांच के आदेश, बोले- राज्य को नहीं बनने देंगे ट्रांजिट रूट

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies