ब्रैडफोर्ड (ब्रिटेन)। ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड में आयोजित एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रम (ब्रैडफोर्ड लिटरेचर फेस्टिवल) के दौरान उस समय भारी हंगामा हो गया, जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) के एक प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता ने पाकिस्तानी राजनयिक के संबोधन को बीच में ही रोक दिया।
राजनीतिक कार्यकर्ता महमूद कश्मीरी ने ब्रैडफोर्ड में पाकिस्तान के महावाणिज्य दूत (Consul General) जाहिद अहमद खान की मौजूदगी में पाकिस्तान सरकार और वहां की सेना की जनविरोधी नीतियों की जमकर आलोचना की। उन्होंने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहे गंभीर मानवीय संकट और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा पूरी प्रखरता से उठाया।
पाकिस्तानी सेना की ‘घेराबंदी’ और दमन के खिलाफ उठाई आवाज
महमूद कश्मीरी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में हस्तक्षेप करते हुए पाकिस्तानी सेना के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया और उसे तुरंत पीओके से बाहर निकलने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने पीओके क्षेत्र में एक तरह की ‘घेराबंदी’ कर रखी है, जिससे स्थानीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। कश्मीरी ने पाकिस्तानी सेना की भूमिका की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि क्षेत्र में जारी दमनकारी और दमन चक्र को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“पाकिस्तानी सेना को तुरंत पीओके छोड़ना होगा। वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन और जनता के दमन को अब वैश्विक मंचों पर छिपाया नहीं जा सकता। अधिकारियों को यह अवैध घेराबंदी तुरंत खत्म करनी होगी।” – महमूद कश्मीरी, राजनीतिक कार्यकर्ता (PoJK)
#WATCH | Bradford, UK | Political activist from Pakistan-occupied Jammu and Kashmir (PoJK), Mahmood Kashmiri, criticised Pakistan over human rights violations in the region during a cultural event in Bradford, UK, attended by the Consul General of Pakistan in Bradford, Zahid… pic.twitter.com/uLoYqMKas6
— ANI (@ANI) July 5, 2026
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की एक और बड़ी किरकिरी
इस पूरी घटना का विवरण स्वयं महमूद कश्मीरी के माध्यम से सामने आया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की एक बार फिर बड़ी किरकिरी हो रही है। रक्षा और अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि पीओके में बुनियादी सुविधाओं की कमी, आटे-बिजली के संकट और दमन के खिलाफ जो गुस्सा लंबे समय से सुलग रहा था, वह अब विदेशों में रहने वाले कश्मीरी प्रवासियों के जरिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सार्वजनिक रूप से फूटने लगा है।
पाकिस्तानी राजनयिक की उपस्थिति में हुए इस सीधे विरोध ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में शांति और विकास के जो झूठे दावे दुनिया के सामने करता आया है, उसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
















