अयोध्या / नई दिल्ली। श्री राम जन्मभूमि मंदिर, अयोध्या में चढ़ावे (चढ़ावा) की कथित चोरी के मामले में चल रही पुलिस जांच के बीच एक बड़ा मोड़ आ गया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने इस मामले के जांच अधिकारी (IO) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है।
इस पत्र के जरिए उन्होंने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल, सांसद संजय सिंह और सपा नेता प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा मंदिर में हजारों करोड़ रुपये की चोरी और घोटाले के सार्वजनिक आरोपों पर कड़ा रुख अपनाया है. आलोक कुमार ने जांच अधिकारी से मांग की है कि इन सभी नेताओं को समन जारी कर उनके बयानों को दर्ज किया जाए और उनके आरोपों के तथ्यात्मक आधार व साक्ष्यों की गहन जांच की जाए.
एक नज़र में समझें वीएचपी अध्यक्ष के पत्र और एफआईआर की मुख्य बातें
गूगल डिस्कवर और पाठकों की त्वरित समझ के लिए अयोध्या पुलिस को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र और आरोपों का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में संकलित है:
| कानूनी एवं प्रशासनिक आयाम | पत्र और एफआईआर का आधिकारिक विवरण |
|---|---|
| संबंधित एफआईआर विवरण | FIR No. 0090/2026, थाना राम जन्मभूमि, अयोध्या |
| जांच का मूल विषय | श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी का मामला |
| पत्र भेजने वाले पदाधिकारी | आलोक कुमार (वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, VHP) |
| पत्र प्राप्तकर्ता अधिकारी | श्री आशुतोष तिवारी, डीएसपी, अयोध्या एवं जांच अधिकारी (IO) |
| पत्र जारी करने की तिथि | 04 जुलाई 2026 |
| जांच के दायरे में लाने की मांग | प्रियंका गांधी वाड्रा, अरविंद केजरीवाल, रामगोपाल यादव, संजय सिंह |
विपक्षी नेताओं के वे 4 बड़े सार्वजनिक बयान, जो बने पत्र का आधार
अपने पत्र के माध्यम से आलोक कुमार ने जांच अधिकारी का ध्यान उन राजनीतिक बयानों की ओर खींचा है जो सोशल मीडिया और टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित हो रहे हैं-
- 1. प्रो. रामगोपाल यादव (सपा): उन्होंने सार्वजनिक मंच से आरोप लगाया कि राम मंदिर में लगभग ₹20,000 करोड़ रुपये का भारी घोटाला हुआ है। श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए 50-50 किलो सोना, चांदी और हीरे के हार गायब हैं और इस चोरी में चंपत राय ही नहीं, बल्कि कई ‘बड़े और रसूखदार नाम’ शामिल हैं।
- 2. अरविंद केजरीवाल (आप): उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भगवान राम का हार, चरण पादुकाएं, हीरे, आभूषण, चांदी की ईंटें, दीपक और भारी मात्रा में नकदी चोरी हो गई है। एक्स (X) पर जारी एक वीडियो में उन्होंने सीधा दावा किया कि करीब ₹200 करोड़ रुपये का केवल कैश चोरी हुआ है और हीरे-जवाहरात के बक्से गायब हैं। उन्होंने यूपी पुलिस, ईडी और सीबीआई की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
- 3. संजय सिंह, सांसद (आप) : उन्होंने भी खुले मंच से ₹200 करोड़ से अधिक की चोरी की बात कही और इसमें 50 से अधिक कर्मचारियों के संलिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रेस वार्ता में कुंभ पर्व के दौरान भी प्रतिदिन लाखों रुपये की चोरी होने का दावा किया था।
- 4. श्रीमती प्रियंका गांधी वाड्रा (कांग्रेस) : उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या छोटे कर्मचारी अकेले CCTV बंद कर हजारों करोड़ के चढ़ावे में हेराफेरी कर सकते हैं, या इसके पीछे कुछ बड़े लोगों की मिलीभगत है?”
“यदि आरोप झूठे और दुर्भावनापूर्ण हैं, तो कानून अपना काम करे”
वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने जांच अधिकारी आशुतोष तिवारी को लिखे पत्र में तर्क दिया है कि इन सार्वजनिक व्यक्तियों ने जो विशिष्ट आंकड़े और गंभीर आरोप लगाए हैं, उससे प्रतीत होता है कि वे इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से भली-भांति परिचित (Acquainted) हैं।
उन्होंने लिखा-
“एक निष्पक्ष, व्यापक और तटस्थ जांच सुनिश्चित करने के लिए यह बेहद आवश्यक है कि कानून के लागू प्रावधानों के तहत इन सभी व्यक्तियों की उपस्थिति अनिवार्य की जाए अथवा उनके आधिकारिक बयान दर्ज किए जाएं। उनसे उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार (Factual Basis), उनकी जानकारी का स्रोत (Source of Information) और उनके पास मौजूद संबंधित दस्तावेज या सामग्रियां मांगी जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।”
पत्र के अंतिम हिस्से (संदर्भ: image_4409b3.jpg) में वीएचपी अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में लिखा है कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी भी व्यक्ति ने बिना किसी पुख्ता आधार या सहायक साक्ष्य के केवल राजनीतिक द्वेष के चलते इतने गंभीर और संवेदनशील सार्वजनिक आरोप लगाए हैं, तो जांच एजेंसी को उनके खिलाफ कानूनन सख्त कार्रवाई करने पर विचार करना चाहिए। किसी भी व्यक्ति को समाज में नफरत, दुर्भावना और शत्रुता की भावना को बढ़ावा देने वाले बेबुनियाद आरोप लगाकर बच निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसी स्थिति में कानून को अपना काम करना चाहिए।
इस पत्र के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों और अयोध्या पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। अब देखना यह होगा कि जांच अधिकारी इन राजनीतिक दिग्गजों को पूछताछ के लिए कब समन जारी करते हैं।
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