
दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े षड्यंत्र मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की नई जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने कहा कि सत्र अदालत के पास सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के फैसले के अलावा कोई विकल्प नहीं है। उस फैसले में दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने तब उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन दोनों की भूमिका कथित बड़े षड्यंत्र में दूसरों से अलग और ज्यादा गंभीर है। बाकी पांच आरोपियों को शर्तों के साथ जमानत दे दी गई थी।
दोनों ने नई जमानत याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट के 18 मई 2026 के एक फैसले के बाद दाखिल की थीं। उस फैसले में सैयद इफ़्तिखार अंद्राबी मामले में जमानत देते हुए दो जजों की बेंच ने 5 जनवरी के फैसले पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि आतंक-विरोधी कानूनों का इस्तेमाल लंबे समय तक हिरासत में रखने का हथियार नहीं बनना चाहिए।
उमर खालिद और शरजील इमाम के वकीलों ने तर्क दिया कि इस नए फैसले के बाद परिस्थितियों में बदलाव हुआ है, इसलिए उनकी याचिकाएं सुनी जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जनवरी आदेश में एक साल या संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज होने तक जमानत न मांगने की बात कही गई थी। अब करीब पांच महीने बीत चुके हैं। चार्जशीट पर बहस पूरी होने के बाद भी इतनी जल्दी संरक्षित गवाहों के बयान दर्ज नहीं हो सकते।
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अभियोजन पक्ष ने इन याचिकाओं का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की एसएलपी खारिज कर दी थी। उमर खालिद की समीक्षा याचिका भी 16 अप्रैल 2026 को खारिज हो चुकी है। ऐसी स्थिति में सत्र अदालत जमानत नहीं दे सकती। उन्होंने दावा किया कि परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने कहा कि 5 जनवरी के सुप्रीम कोर्ट आदेश को देखते हुए सत्र अदालत परिस्थितियों में बदलाव का विश्लेषण भी नहीं कर सकती। उन्होंने गुलफिशा फातिमा और सैयद इफ़्तिखार अंद्राबी के फैसलों के बीच मतभेद का जिक्र किया, जिसे पहले ही बड़ी बेंच को भेज दिया गया है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दोनों आरोपी संरक्षित गवाहों के परीक्षण पूरा होने या एक साल बीतने के बाद ही नई जमानत याचिका दाखिल कर सकते हैं, जो पहले हो। इसलिए ये याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं और इन्हें खारिज किया जाता है।