ई-20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत इथेनोल मिला पेट्रोल इन दिनों काफी चर्चा में है। सोशल मीडिया पर पुरानी और नई गाड़ियों में खराबी, माइलेज घटने, इंजन खराब होने जैसे कई दावे हो रहे हैं। केंद्र सरकार ने इन सब पर विस्तार से स्पष्टीकरण जारी किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने 10 मुख्य सवालों के जवाब जारी किए हैं।
विवाद कैसे शुरू हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल के बयान को लेकर यह बहस तेज हुई। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब इथेनोल की सप्लाई व्यवस्था से था, ईंधन टेस्टिंग से नहीं। इसके बाद सरकार ने सारी अफवाहों पर बिंदुवार जवाब दिया।
माइलेज कम होता है क्या?
हाँ, थोड़ा-बहुत कम हो सकता है। सरकार और ऑटो कंपनियां पहले ही मान चुकी हैं कि इथेनोल में पेट्रोल जितनी ऊर्जा नहीं होती। टेस्ट में यह कमी आमतौर पर 2 से 6 प्रतिशत तक देखी गई है।
इंजन खराब हो जाता है क्या?
सरकार इससे इंकार करती है। सरकार का तर्क है कि ARAI, इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और गाड़ी बनाने वाली कंपनियों के साथ मिलकर किए गए टेस्ट में इंजन, धातु या प्लास्टिक के पार्ट्स को कोई बड़ा नुकसान नहीं दिखा। हाँ, कुछ पुरानी गाड़ियों में रबर के कुछ हिस्सों को पहले बदलना पड़ सकता है, लेकिन गंभीर समस्या नहीं है।
वारंटी और बीमा खत्म हो जाएगा?
इससे बीमा या वारंटी पर कोई असर नहीं होगा। जो गाड़ियां ई-20 के लिए मंजूर या डिजाइन की गई हैं, उन पर कंपनी की वारंटी और बीमा पहले की तरह ही चलेगा।
ई-20 बिना टेस्टिंग का ईंधन है क्या?
इस सवाल के जबाव में सरकार का तर्क है कि अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में सालों से इथेनोल मिला पेट्रोल इस्तेमाल हो रहा है। भारत में भी ARAI की निगरानी में हजारों किलोमीटर टेस्टिंग हो चुकी है।
इथेनोल बनाने में बहुत पानी खर्च होता है क्या?
इस दावे को लेकर सरकार का कहना है कि एक लीटर इथेनोल के लिए 10 हजार लीटर पानी का दावा सही नहीं। डिस्टिलरी में प्रति लीटर इथेनोल पर सिर्फ 3 से 5 लीटर प्रसंस्कृत पानी लगता है, और उसे दोबारा रिसाइकिल भी किया जाता है।
पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाया जाता है क्या?
वहीं इथेनोल ब्लेंडेड पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाए जाने की खबरों पर सरकार ने कहा है कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस या चीनी नहीं डाली जाती। फ्यूल-ग्रेड इथेनोल औद्योगिक प्रक्रिया से बनता है और तय मानकों के मुताबिक पेट्रोल में मिलाया जाता है।
टैंक में चींटियां-मधुमक्खियां आती हैं क्या?
सरकार ने इसे भी भ्रामक बताया है। फ्यूल-ग्रेड इथेनोल में चीनी नहीं होती। उसमें डीनेचुरेंट मिलाए जाते हैं जो कीड़ों को दूर रखते हैं। इसके अलावा ई-20 में 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है, जिसकी गंध ज्यादा होती है।
टैंक में पानी जमा हो जाता है क्या?
सरकार का कहना है कि आधुनिक गाड़ियों और ईंधन सिस्टम को ऐसे बनाया गया है कि पानी अंदर न जा सके।
सरकार को फायदा क्या है?
सरकार के अनुसार, 2014-15 के बाद से अब तक इस कार्यक्रम से 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान हुआ। कच्चे तेल का आयात घटा और कार्बन उत्सर्जन भी कम हुआ। दिसंबर 2025 तक 20 प्रतिशत इथेनोल मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले पूरा कर लिया गया। सरकार का दावा है कि ई-20 पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए फायदेमंद है, जबकि कुछ छोटी समस्याओं जैसे माइलेज में थोड़ी कमी को स्वीकार किया गया है।











