साइबर अपराधी लगातार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इसी क्रम में महाराष्ट्र के कम से कम 25 युवक, जिनमें से आठ नासिक के हैं, फर्जी विदेशी जॉब ऑफर्स के चक्कर में थाईलैंड-म्यांमार बॉर्डर के पास चल रहे साइबर फ्रॉड कैंप में फंस गए हैं। परिवार वालों ने सरकार से जल्दी मदद मांगी है ताकि इन लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
एक फंसे युवक की बात
नासिक का एक 30 साल का युवक, जो अप्रैल 25 से वहां कैद है, हाल ही में परिवार से व्हाट्सएप कॉल पर बात कर पाया। उसने बताया कि वहां लोगों को रोज 18 घंटे तक काम करना पड़ता है। खाना इतना खराब होता है कि चूहे और कॉकरोच भी नहीं खाएंगे। उसके परिवार ने बताया कि एक दोस्त ने उसे बैंकॉक में कॉल सेंटर की जॉब का लालच दिया था। सैलरी बताई गई थी 70,000 रुपये महीना। वह 12वीं पास है और पहले मर्चेंट नेवी में काम कर चुका था। बेहतर नौकरी की उम्मीद में वह थाईलैंड चला गया, लेकिन वहां पहुंचते ही कुछ लोगों ने उसे थाईलैंड-म्यांमार बॉर्डर के पास एक दूर-दराज इलाके में ले जाकर कैद कर लिया।
उसके अपहरणकर्ता उसकी रिहाई के लिए 8 लाख रुपये मांग रहे हैं।
वहां क्या-क्या हो रहा है
युवक ने परिवार को बताया कि जो काम नहीं करना चाहता, उसे कमरे में बांध दिया जाता है और इलेक्ट्रिक शॉक दिए जाते हैं। वहां महिलाओं पर भी यातनाएं हो रही हैं। एक महीने की ट्रेनिंग के बाद बहुत कम पैसे दिए जाते हैं। नासिक के इस युवक और बीड़ के एक दूसरे युवक के हवाले से परिवारों का कहना है कि महाराष्ट्र से 25 से ज्यादा लोग और पूरे भारत से 400 से ज्यादा लोग ऐसे ही कैंपों में फंसे हुए हैं।
स्कैम क्या करवाया जाता है
नासिक के बीजेपी कॉर्पोरेटर प्रशांत दिघे ने बताया कि उन्होंने अपने वार्ड के तीन युवकों से बात की है। कैंप में लोगों को मजबूर किया जाता है कि वे फर्जी फेसबुक प्रोफाइल बनाएं, ऑनलाइन दोस्ती करें और लोगों को क्रिप्टोकरेंसी इन्वेस्टमेंट स्कैम में फंसाएं। टारगेट पूरा न करने पर मारपीट की जाती है। करीब 20 लोग एक कमरे में बंद रहते हैं।
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परिवारों की अपील और सरकार की प्रतिक्रिया
परिवार वाले बहुत चिंतित हैं। उन्होंने महाराष्ट्र डिजास्टर मैनेजमेंट मंत्री गिरिश महाजन से मदद मांगी है। बीजेपी कॉर्पोरेटर प्रशांत दिघे की मदद से परिवार वाले मंत्री तक पहुंचे। मंत्री गिरिश महाजन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को इस मामले की जानकारी दी है। उन्होंने फंसे हुए कुछ युवकों से खुद बात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी वापसी के प्रयास किए जा रहे हैं।
ये स्कैम कितने बड़े हैं
पिछले कुछ महीनों में म्यांमार, कंबोडिया, लाओस जैसे देशों में चल रहे ऐसे ऑर्गनाइज्ड क्रिमिनल नेटवर्क युवा भारतीयों को सोशल मीडिया पर हाई सैलरी वाली जॉब्स (आईटी, डेटा एंट्री, डिजिटल मार्केटिंग, कस्टमर सपोर्ट) का लालच देकर फंसाते हैं। वहां पहुंचने के बाद पासपोर्ट छीन लेते हैं और साइबर फ्रॉड में मजबूर करते हैं। टारगेट न पूरा करने पर शारीरिक यातनाएं दी जाती हैं। जनवरी 2026 में आंध्र प्रदेश के 120 से ज्यादा लोगों को म्यांमार के ऐसे ही कैंपों से रेस्क्यू किया गया था।
















