बीबीसी ने 2 दिन पहले एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसका शीर्षक था “A trip to India left me with 38 parasites in my brain” अर्थात भारत की यात्रा के कारण मेरे दिमाग में 38 परजीवी आ गए। इस रिपोर्ट को पढ़ते ही बीबीसी का छल सामने आता है। लोगों को लगेगा कि यह कोई नया मामला है, लेकिन यह नया मामला नहीं है, बल्कि यह वर्ष 2011 का मामला है। एक महिला के दिमाग में 38 परजीवी पाए गए थे, उसने वर्ष 2007 में भारत की यात्रा की थी।
बीबीसी की भारत और विशेषकर हिंदुओं से जो घृणा है, उसे उसने शायद ही कभी छिपाया हो। जिस प्रकार से भारत के युवाओं ने सोशल मीडिया पर चीन और कथित सभ्य पश्चिम के खोखलेपन को उजागर किया है, उससे वे लोग बौखलाए हुए हैं, जिन्होंने अभी तक भारत को पिछड़ा या विशेषकर हिंदुओं को पिछड़ा घोषित कर रखा था।
कल्पना करें कि बीबीसी किस सीमा तक हिंदुओं से और भारत से घृणा करता है कि उसने साल 2011 की घटना को आज की घटना के रूप में प्रकाशित किया। जबकि Lowri Denman, जिसकी यह कहानी है, वह लगभग 19 साल पहले भारत आई थी।
महिला भारत में शाकाहारी रही तो फिर पोर्क से संक्रमण कैसे?
इस पूरी कहानी में एक और झोल है कि जो परजीवी बताए जा रहे हैं, वे पोर्क अर्थात सूअर के मांस के सेवन से हुए थे, जबकि उसने यह निर्णय लिया था कि वह भारत में अपने पड़ाव के दौरान किसी भी प्रकार से मांस का सेवन नहीं करेगी।
बीबीसी लिखता है कि उसके डॉक्टर को ऐसा लगता है कि जब वह भारत गई होगी तो वहां उसे यह इन्फेक्शन हुआ। जबकि महिला बता चुकी है कि उसने भारत में शाकाहारी ही रहने का निर्णय लिया था, फिर भी अनजाने में उसने पोर्क खा लिया होगा। अब इन शब्दों पर ध्यान दें, कि कहीं पर भी कोई निर्णायक बात नहीं है कि क्या वास्तव में भारत में ही उसे यह संक्रमण हुआ, परंतु डॉक्टर यह साबित करने में लगा है कि उसे यह संक्रमण भारत में ही हुआ था। उसकी पीड़ा से अधिक जोर इस बात पर है कि भारत की यात्रा के कारण ऐसा हुआ। जबकि जो संक्रमण हुआ था, उसके कई और कारण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, इंसान कच्चे या ठीक से न पकाए गए सूअर के मांस, टेपवर्म के अंडों से दूषित पानी या साफ़-सफ़ाई की खराब आदतों के कारण संक्रमित हो सकते हैं। अब लोगों का कहना है कि यह सब ब्रिटेन में दुर्लभ है, और ये मामले केवल उन्हीं लोगों में देखे जाते हैं जो ऐसी बीमारियों वाले क्षेत्रों से पलायन करके आते हैं।
बिना किसी प्रमाण के झूठी कहानी
ऐसा कोई भी प्रमाण नहीं था कि यह बीमारी उस महिला को भारत के आने के बाद हुई, परंतु 19 साल पुरानी इस रिपोर्ट को बीबीसी ने बिना किसी सबूत के प्रकाशित किया। क्या ऐसा इसलिए कि वर्तमान में यूके में हीटवेव के दौरान वहां और अन्य कथित सभ्य देशों की सिस्टम की खामियां सामने आ रही थीं? पूरे विश्व मे प्रश्न उठ रहे थे कि ये कैसे लोग हैं, जो ऐसा निर्माण करते हैं? और यूरोप की खिल्ली उड़ रही थी, उसके अपने ही लोग सोशल मीडिया पर व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे। मगर इस एक पुरानी और मनगढ़ंत रिपोर्ट के बाद सोशल मीडिया पर भारत के प्रति घृणा सामने आ गई। इस झूठी रिपोर्ट ने एक बार फिर से उन तत्वों को सोशल मीडिया पर सक्रिय कर दिया, जिनके दिल मे भारत के प्रति अथाह घृणा है।
भारत विरोधी लॉबी सक्रिय
देखते ही देखते भारत विरोधियों को एक मनगढ़ंत रिपोर्ट से भारत के प्रति घृणा फैलाने का अवसर मिल गया। एक यूजर ने लिखा कि “भारत परजीवियों का सबसे बड़ा निर्यातक है। या तो इंसानों के रूप में या फिर कीटों के रूप में! ये जैव हथियार हैं!”
यह प्रश्न किसी ने भी नहीं पूछा कि साल 2007 के बाद 2011 में उस महिला को संक्रमण कैसे हो सकता है? क्या इतने वर्षों तक दिमाग मे संक्रमण बना रह सकता है? हालांकि इसे लेकर लोग विरोध भी कर रहे हैं और बीबीसी का मज़ाक भी बना रहे हैं। एक यूजर ने लिखा कि क्वीन एलिजाबेथ 1997 में भारत आई थी और उसके परिणाम स्वरूप 2022 में उनकी मृत्यु हुई! लोग प्रश्न कर रहे हैं कि बीबीसी के लिए प्राथमिकता क्या है? एक तरफ ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के चलते 2,50,000 श्वेत लड़कियां पाकिस्तानी मुसलमानों के संगठित गिरोह का निशाना बनीं, मगर बीबीसी एक 19 साल पुरानी मनगढ़ंत रिपोर्ट के माध्यम से भारत और हिंदुओं के प्रति घृणा फैला रहा है। ग्रूमिंग गैंग को लेकर जहां इस समय वहां की मीडिया का ध्यान होना चाहिए था, मगर वह भारत के प्रति घृणा फैलाने में योगदान दे रहा है।
लोग कह रहे हैं कि केवल एक डॉक्टर के विश्वास पर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि उसके दिमाग में संक्रमण चार साल पहले भारत यात्रा के कारण हुआ। जबकि उसका कोई भी प्रमाण नहीं है। यह रिपोर्ट और कुछ नहीं बस भारत विरोधी मीडिया का प्रोपोगेंडा है, और यह इस समय किस कारण से हो रहा है, उसे भी समझना कठिन नहीं है।











