ओडिशा

ओडिशा कैबिनेट की ऐतिहासिक पहल: KG से PG तक निःशुल्क शिक्षा को मंजूरी, 12 अहम प्रस्तावों पर लगी मुहर

ओडिशा सरकार ने शिक्षा, बुनियादी ढांचे, मत्स्य पालन, डिजिटल प्रशासन, पोषण, जल संसाधन और जनकल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

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डॉ. समन्वय नंद

भुवनेश्वर। ओडिशा सरकार ने शिक्षा, बुनियादी ढांचे, मत्स्य पालन, डिजिटल प्रशासन, पोषण, जल संसाधन और जनकल्याण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य के समग्र विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में लोक सेवा भवन में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की 43वीं बैठक में आठ विभागों से जुड़े कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई।

इन फैसलों में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय ‘ज्ञानोदय–शिक्षारु समृद्धि’ योजना को मंजूरी देना रहा, जिसके तहत अब ओडिशा में किंडरगार्टन (केजी) से लेकर स्नातकोत्तर (पीजी) तक सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में पात्र विद्यार्थियों को प्रवेश शुल्क से पूर्णतः मुक्त किया जाएगा। इस फैसले के साथ राज्य सरकार ने सभी के लिए निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के अपने संकल्प को साकार करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि शिक्षा किसी भी सशक्त समाज की आधारशिला होती है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण कोई भी योग्य छात्र शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल का यह निर्णय केवल एक योजना नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।

वर्ष 2026-27 से लागू होगी योजना
सरकार के अनुसार यह योजना शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। इसके तहत कक्षा 9 से 12 तक सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के अलावा सरकारी महाविद्यालयों, सहायता प्राप्त कॉलेजों, राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों तथा पात्र सरकारी संस्थानों में नियमित स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत छात्रों को प्रवेश शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्ववित्तपोषित (सेल्फ फाइनेंसिंग) पाठ्यक्रम, निजी गैर-सहायता प्राप्त संस्थान, पीपीपी मॉडल पर संचालित संस्थान तथा व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रम इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगे।
सरकार का मानना है कि इस योजना से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में बड़ी सहायता मिलेगी। इससे स्कूल एवं कॉलेज छोड़ने की दर में कमी आएगी, नामांकन बढ़ेगा तथा उच्च शिक्षा में अधिक से अधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

32 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
सरकारी अनुमान के अनुसार इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ प्रतिवर्ष लगभग 32 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा। योजना के प्रथम वर्ष में लगभग 895.57 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि अगले पांच वर्षों में इस पर 5,467.55 करोड़ रुपये व्यय किए जाने का अनुमान है। इसे राज्य के शिक्षा क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े निवेशों में से एक माना जा रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020, ओडिशा विजन-2036 तथा विजन-2047 के लक्ष्यों के अनुरूप है। इससे उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (GER) बढ़ाने, मानव संसाधन विकास को गति देने तथा ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में सहायता मिलेगी।

मुख्यमंत्री पोषण योजना का भी हुआ विस्तार
मंत्रिमंडल ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री पोषण योजना (एमएमपीवाई) का भी विस्तार करने का निर्णय लिया है। अब सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा 9 और 10 के विद्यार्थियों को भी नि:शुल्क मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि किशोरावस्था में उचित पोषण मिलने से विद्यार्थियों की उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई में रुचि विकसित होगी और विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति में कमी आएगी। वर्ष 2025 से 2030 के बीच इस योजना से लगभग 57.4 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने का अनुमान है। इसके लिए सरकार ने 4,224.46 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।

भुवनेश्वर-कटक कॉरिडोर का होगा कायाकल्प
शहरी आधारभूत संरचना को मजबूत करने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने 949.35 करोड़ रुपये की लागत से जयदेव विहार से नंदनकानन तक 9.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के व्यापक उन्नयन को भी मंजूरी दी है।
इस परियोजना के तहत आठ लेन की आधुनिक सड़क, सर्विस रोड, फ्लाईओवर, अंडरपास, पैदल यात्री सब-वे, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जयदेव विहार, कलिंग अस्पताल चौक, दमाना चौक तथा कीट चौक पर ग्रेड सेपरेटेड फ्लाईओवर बनाए जाएंगे, जिससे यातायात जाम में कमी आएगी और भुवनेश्वर तथा कटक के बीच आवागमन अधिक सुगम होगा।

डीप सी फिशिंग मिशन को मिली मंजूरी
राज्य के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए मंत्रिमंडल ने 2,295.45 करोड़ रुपये की लागत वाली ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) को भी मंजूरी दी है। इस दस वर्षीय मिशन के तहत आधुनिक गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले पोत, अत्याधुनिक नौवहन उपकरण, मत्स्य बंदरगाह, कोल्ड स्टोरेज, फिश लैंडिंग सेंटर तथा समुद्री खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं का विकास किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे 50 हजार से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा समुद्री उत्पादों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

डिजिटल प्रशासन को मिलेगा नया आधार
मंत्रिमंडल ने 268.44 करोड़ रुपये की लागत से ओडिशा स्टेट डाटा सेंटर (OSDC) 2.0 की स्थापना को भी मंजूरी दी है। नई अत्याधुनिक सुविधा राज्य के ई-गवर्नेंस तंत्र को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक तथा सक्षम बनाएगी। इससे विभिन्न सरकारी विभागों की डिजिटल सेवाओं को अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित और निर्बाध बनाया जा सकेगा। इन सभी निर्णयों के साथ ओडिशा सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि उसकी प्राथमिकता शिक्षा, स्वास्थ्य, आधुनिक आधारभूत संरचना, डिजिटल परिवर्तन और रोजगार सृजन के माध्यम से समावेशी एवं सतत विकास सुनिश्चित करना है। सरकार का विश्वास है कि ये ऐतिहासिक फैसले राज्य को ज्ञान-आधारित, सशक्त और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में नई गति प्रदान करेंगे।

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