करमाळा (सोलापुर)। देश के आर्थिक विकास को ग्रामीण अंचलों तक पहुंचाने और युवा शक्ति को स्वावलंबी बनाने के ध्येय के साथ महाराष्ट्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है। सोलापुर जिला अंतर्गत करमाळा स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) का नामकरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व सह सरकार्यवाह श्रद्धेय मदनदास जी देवी की पावन स्मृति में ‘स्व. मदनदास देवी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान’ किया गया है।
मंगलवार (30 जून 2026) को आयोजित इस गरिमामयी नामकरण समारोह में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे, जबकि महाराष्ट्र के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।
नियमानुसार, इस गरिमामयी आयोजन का एक मुख्य दृश्य नीचे देखा जा सकता है, जो राष्ट्रीय विमर्श की गंभीरता को दर्शाता है-
करमाळा ITI नामकरण समारोह और बड़े एलान
गूगल डिस्कवर और पाठकों की त्वरित समझ के लिए इस पूरे ऐतिहासिक कार्यक्रम, मुख्य अतिथियों और महाराष्ट्र सरकार की बड़ी घोषणाओं का प्रामाणिक विवरण नीचे दी गई तालिका में संकलित है:
| समारोह एवं विकास का आयाम | आधिकारिक एवं शासन स्तर का विवरण |
|---|---|
| संस्थान का नया नाम | स्व. मदनदास देवी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, करमाळा |
| मुख्य वक्ता (Chief Speaker) | सुनील आंबेकर (अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, RSS) |
| मुख्य अतिथि (Chief Guest) | मंगलप्रभात लोढा (कौशल विकास मंत्री, महाराष्ट्र) |
| राज्य सरकार का बड़ा बजट कोष | ₹5,700 करोड़ (प्रदेश के ITI संस्थानों के आधुनिकीकरण हेतु) |
| करमाळा के लिए विशेष सौगात | ‘टाटा इंस्टीट्यूट’ (Tata Institute) की एक स्वतंत्र शाखा शीघ्र शुरू होगी। |
“महानगरों की चकाचौंध से समृद्ध नहीं होता राष्ट्र, समृद्धि गांवों तक जानी चाहिए”
अपने मुख्य वैचारिक संबोधन में सुनील आंबेकर ने भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास के विकेंद्रीकरण पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आय और स्वरोजगार के साधन केवल चुनिंदा महानगरों तक सीमित न रहकर देश के सुदूर गांवों और कंदराओं तक पहुंचने अनिवार्य हैं।
“देश की आर्थिक प्रगति को गति देने के लिए उच्च तकनीकी शिक्षा देने वाले ‘आईआईटी’ (IIT) संस्थानों की ही भांति, जमीनी स्तर पर कुशल कार्यबल (Skilled Workforce) का निर्माण करने वाले ‘आईटीआई’ (ITI) संस्थानों को भी सशक्त बनाना होगा। आज विश्व के कई विकसित देशों में अगाध भौतिक और आर्थिक संपन्नता तो है, परंतु वहां मानवीय सुख, शांति और पारिवारिक संस्थाएं पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो चुकी हैं। इसलिए भारत को प्रगति पथ पर बढ़ते समय केवल तकनीकी विकास पर ही निर्भर नहीं रहना है, बल्कि तकनीक के साथ-साथ ‘मनुष्य और चरित्र निर्माण’ के सनातन कार्य को प्राथमिकता देनी होगी।” – सुनील आंबेकर, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख, RSS
उन्होंने मदनदास जी देवी के ऐतिहासिक कार्यों का स्मरण करते हुए बताया कि बदलते समय की पदचाप को पहचान कर आईटीआई जैसे संस्थानों में युगानुकूल सुधार होने चाहिए – इसी दूरगामी सोच के साथ मदनदास जी ने 1989-90 में नागपुर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से ऐतिहासिक ‘राष्ट्रीय आईटीआई सम्मेलन’ आयोजित करवाया था। आज करमाळा आईटीआई का नामकरण उनके उन्हीं वैचारिक संकल्पों की सार्थक परिणति है।

पूर्वोत्तर के छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ा
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपनी शुभकामनाएं प्रेषित कीं और श्रद्धेय मदनदास जी की पावन स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने कहा, “युवाओं में राष्ट्र निर्माण की चेतना और राष्ट्रीय एकात्मता का ध्येय जागृत करने में मदनदास जी का अवदान अतुलनीय है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर (North-East) के विद्यार्थियों को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्होंने जीवनपर्यंत भगीरथ प्रयास किए।”
सीएम फडणवीस ने आगे जोड़ा कि आज के युग में आईटीआई केवल तकनीकी प्रशिक्षण का केंद्र नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के लिए कुशल, सक्षम और राष्ट्रभक्त मानव संसाधन का निर्माण करने वाला ऊर्जा केंद्र है।
ITI का कायाकल्प: ₹5,700 करोड़ का बड़ा कोष और नए कोर्सेज
समारोह के मुख्य अतिथि और राज्य के कौशल विकास मंत्री मंगलप्रभात लोढा ने युवाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए सरकार के रोडमैप को सामने रखा। उन्होंने बताया कि मदनदास जी के विचारों पर चलते हुए राज्य सरकार प्रदेश के आईटीआई संस्थानों के व्यापक आधुनिकीकरण के लिए ₹5,700 करोड़ का विशाल कोष खर्च कर रही है।
औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में हुए मुख्य आधुनिक बदलाव:
- आधुनिक तकनीकी पाठ्यक्रम: आईटीआई संस्थानों में अब **आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)** और **इलेक्ट्रिकल कोर्सेज (EV Technology)** जैसे एडवांस व रोजगारपरक पाठ्यक्रम पूरी तरह प्रारंभ किए जा चुके हैं।
- भावी विस्तार योजना: आगामी शैक्षणिक वर्ष से तकनीकी मांग के अनुरूप पांच नए उन्नत पाठ्यक्रम और जोड़े जाएंगे।
- टाटा इंस्टीट्यूट की शाखा: करमाळा और उसके आस-पास के ग्रामीण अंचल में कौशल विकास को और अधिक गति देने के लिए स्थानीय आईटीआई परिसर में ही **‘टाटा इंस्टीट्यूट’ (Tata Institute)** की एक स्वतंत्र विशिष्ट शाखा शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी।
इस नामकरण समारोह के बाद स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि टाटा इंस्टीट्यूट की शाखा और आधुनिक पाठ्यक्रमों के समावेशन से सोलापुर के इस ग्रामीण क्षेत्र से बड़े पैमाने पर कुशल और स्वावलंबी युवाओं का निर्माण होगा जो सीधे तौर पर ‘विकसित भारत’ के संकल्प की सिद्धि में अपना योगदान देंगे।

















