
लेह (लद्दाख) । भारत तिब्बत सहयोग मंच (बीटीएसएम) के राष्ट्रीय बौद्धिक प्रकोष्ठ के सह-संयोजक तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख केंद्र शासित प्रदेशों के अध्यक्ष डॉ. विवेक शर्मा ने राज्य महासचिव राजिंदर सदोत्रा के साथ लद्दाख का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विस्तृत संगठनात्मक दौरा संपन्न किया है। इस रणनीतिक दौरे का मुख्य उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों में संगठन के नेटवर्क का विस्तार करना, व्यापक जनसंपर्क बढ़ाना और लद्दाख में रह रहे तिब्बती समुदाय के साथ ऐतिहासिक व सामाजिक संवाद को और अधिक प्रगाढ़ करना था।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने न केवल स्थानीय निकायों और प्रबुद्ध नागरिकों से संपर्क किया, बल्कि राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने वाले सांस्कृतिक आयोजनों में भी सक्रिय सहभागिता की।
इस महत्वपूर्ण सीमांत दौरे के दौरान संपन्न हुई रणनीतिक वार्ताओं, बैठकों और नए सांगठनिक मनोनयन का पूरा ब्योरा नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है:
| दौरे व संगठन का मुख्य आयाम | आधिकारिक एवं जमीनी विवरण |
|---|---|
| मुख्य नेतृत्वकर्ता | डॉ. विवेक शर्मा (अध्यक्ष) एवं राजिंदर सदोत्रा (राज्य महासचिव) |
| भ्रमण किए गए मुख्य क्षेत्र | चोगलामसर और एगलिंग (तिब्बती शरणार्थी बस्तियां) तथा लेह तिब्बती मार्केट |
| सांस्कृतिक सहभागिता | सिंधु दर्शन यात्रा के प्रथम महाकुंभ में उपस्थिति |
| शीर्ष मार्गदर्शक बैठक | डॉ. इंद्रेश कुमार (वरिष्ठ प्रचारक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के साथ विशेष बैठक |
| नया सांगठनिक मनोनयन | प्रमुख उद्योगपति अरुण गुप्ता को संगठन का कैशियर नियुक्त किया गया। |
अपने प्रवास के दौरान बीटीएसएम के शीर्ष पदाधिकारियों ने चोगलामसर और एगलिंग स्थित तिब्बती शरणार्थी बस्तियों (Tibetan Refugee Camps) का जमीनी स्तर पर दौरा किया। वहां उन्होंने स्थानीय तिब्बती परिवारों से मुलाकात कर उनकी रोजमर्रा की समस्याओं को जाना। बातचीत के दौरान तिब्बती विशिष्ट संस्कृति के संरक्षण, प्रगाढ़ भारत-तिब्बत मैत्री और दोनों समुदायों के सामाजिक कल्याण से जुड़े गंभीर विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इसके बाद टीम ने लेह स्थित तिब्बती मार्केट का भी रुख किया और वहां के स्थानीय व्यापारियों की आर्थिक व सांस्कृतिक गतिविधियों की सराहना की।
विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों के साथ विशेष संवाद:
संगठनात्मक कड़ियों को आगे बढ़ाते हुए डॉ. विवेक शर्मा और राजिंदर सढोत्रा ने लद्दाख विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापकों और शोधकर्ताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस अकादमिक विमर्श में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा की गई-
प्रतिनिधिमंडल ने लेह की पावन धरा पर आयोजित ‘सिंधु दर्शन यात्रा’ के प्रथम ऐतिहासिक महाकुंभ में भी पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। इस भव्य राष्ट्रीय समागम में देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालुओं, मनीषियों, प्रबुद्ध विद्वानों और सामाजिक नेताओं ने हिस्सा लिया, जहां सिंधु नदी के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए समूचे राष्ट्र को अखंडता और समरसता का संदेश दिया गया।
इसी पावन अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक एवं मंच के राष्ट्रीय मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय सांगठनिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सीमावर्ती जिलों में राष्ट्रवादी गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने पर मंत्रणा हुई।
“लद्दाख हमारी सामरिक, सांस्कृतिक और प्राचीन सभ्यतागत दृष्टि से भारत का अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण मस्तक क्षेत्र है। भारत तिब्बत सहयोग मंच के प्रत्येक कार्यकर्ता का यह परम कर्तव्य है कि वे तिब्बत की स्वायत्तता और सुरक्षा के प्रति आम जनमानस में जनजागरूकता बढ़ाएं। हमें अपनी समृद्ध बौद्ध विरासत का संरक्षण करना होगा और निरंतर सामाजिक व बौद्धिक गतिविधियों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता की नींव को और सुदृढ़ करना होगा।” – डॉ. इंद्रेश कुमार, मार्गदर्शक, बीटीएसएम
बैठक के समापन पर डॉ. इंद्रेश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति में जम्मू के जाने-माने कर्मठ उद्योगपति अरुण गुप्ता को संगठन के प्रति उनकी निष्ठा और पुराने प्रशासनिक व व्यावसायिक अनुभवों को देखते हुए सर्वसम्मति से ‘भारत तिब्बत सहयोग मंच (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख)’ का नया कैशियर मनोनीत किया गया, जिसका संगठन के सभी सदस्यों ने करतल ध्वनि से स्वागत किया।