ओडिशा: पुरी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई स्नान पूर्णिमा; लाखों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दिव्य स्नान के किए दर्शन
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ओडिशा: पुरी में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई स्नान पूर्णिमा; लाखों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दिव्य स्नान के किए दर्शन

महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक रथयात्रा के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक पवित्र स्नान पूर्णिमा उत्सव सोमवार को पुरी में श्रद्धा, उल्लास और शांतिपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुआ।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद
Jun 30, 2026, 01:28 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा की वार्षिक रथयात्रा के औपचारिक शुभारंभ का प्रतीक पवित्र स्नान पूर्णिमा उत्सव सोमवार को पुरी में श्रद्धा, उल्लास और शांतिपूर्ण वातावरण के बीच संपन्न हुआ। देशभर से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने महाप्रभु के दिव्य स्नान और बहुप्रतीक्षित हाथी वेश (गजानन वेश) के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया।

इस वर्ष अनुकूल मौसम ने उत्सव की भव्यता को और बढ़ा दिया। स्नान पूर्णिमा के संपन्न होने के साथ ही अब महाप्रभु 15 दिनों के पारंपरिक अनसर (अनवसर) काल में प्रवेश करेंगे। इसके बाद नेत्रोत्सव के अवसर पर पुनः भक्तों को दर्शन देंगे, जिसके अगले दिन विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का शुभारंभ होगा।

भोर से शुरू हुए पवित्र अनुष्ठान
ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला स्नान पूर्णिमा महाप्रभु जगन्नाथ की परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है। सोमवार तड़के लगभग पांच बजे पाहंडी विजय के साथ अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। सबसे पहले महाप्रभु सुदर्शन, उसके बाद महाप्रभु बलभद्र, देवी सुभद्रा और अंत में महाप्रभु जगन्नाथ को श्रीमंदिर के गर्भगृह से स्नान मंडप तक लाया गया। स्नान से पूर्व पुरी के गजपति महाराजा दिव्य सिंह देव, जो महाप्रभु जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाते हैं, ने परंपरागत छेरा पहंरा अनुष्ठान संपन्न किया। इसके पश्चात महाप्रभु एवं उनके सहोदर देवताओं का मंदिर के पवित्र स्वर्ण कूप से लाए गए सुगंधित जल के 108 कलशों से विधिवत अभिषेक किया गया।

हाथी वेश के दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
दिव्य स्नान के उपरांत महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा ने श्रद्धालुओं को हाथी वेश (गजानन वेश) में दर्शन दिए। इस विशेष श्रृंगार में देवताओं को हाथी के स्वरूप जैसा अलंकृत किया जाता है, जो शक्ति, बुद्धि और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। यह वेश भगवान गणेश से जुड़ा हुआ माना जाता है, जिन्हें विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। इसे रथयात्रा के शुभारंभ का मंगल प्रतीक भी माना जाता है। इस दुर्लभ दर्शन के लिए पुरी के बड़ा दांडा (ग्रैंड रोड) और स्नान मंडप पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।

स्नान यात्रा के बाद शुरू हुआ अनसर काल
मंदिर परंपरा के अनुसार, दिव्य स्नान के बाद महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें अनसर घर ले जाया जाता है, जहां वे अगले 15 दिनों तक विश्राम करते हैं। इस अवधि में श्रीजगन्नाथ मंदिर में दर्शन बंद रहते हैं।इस दौरान श्रद्धालु ब्रह्मगिरि स्थित अलारनाथ मंदिर में दर्शन करते हैं, जहां मान्यता है कि अनसर काल में महाप्रभु जगन्नाथ भक्तों को दर्शन देते हैं। रथयात्रा से एक दिन पूर्व नेत्रोत्सव के अवसर पर महाप्रभु पुनः भक्तों के समक्ष प्रकट होंगे।

एसजेटीए ने सुनिश्चित किया सुचारु आयोजन
श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने सभी धार्मिक अनुष्ठानों का निर्धारित समयानुसार सफलतापूर्वक संचालन किया। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग, सुव्यवस्थित दर्शन मार्ग और प्रवेश व्यवस्था की गई, जिससे लाखों भक्तों ने शांतिपूर्वक दर्शन किए। मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के कारण विशाल जनसमूह के बावजूद पूरा आयोजन सुचारु रूप से संपन्न हुआ।

मुख्यमंत्री सहित कई गणमान्य हुए शामिल
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी पुरी पहुंचकर स्नान पूर्णिमा के पावन अनुष्ठानों में भाग लिया। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी आध्यात्मिक अनुभूति साझा करते हुए महाप्रभु जगन्नाथ से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और प्रगति की कामना की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन तथा पुरी सांसद संबित पात्रा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था रही चाक-चौबंद
स्नान पूर्णिमा के सफल आयोजन के लिए जिला प्रशासन और ओडिशा पुलिस ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। श्रीजगन्नाथ मंदिर, बड़ा दांडा तथा अन्य संवेदनशील स्थानों पर 80 प्लाटून पुलिस बल तैनात किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के तहत क्विक एक्शन टीम (QAT), डॉग स्क्वॉड, रूफटॉप निगरानी, एंटी-सैबोटाज जांच, समुद्री सुरक्षा तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की गई।

इसके अलावा वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सहायता केंद्र, चिकित्सा शिविर और विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। पुरी के पुलिस अधीक्षक प्रतीक सिंह ने बताया कि सभी निर्धारित स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती समय पर पूरी कर ली गई थी और प्रत्येक धार्मिक अनुष्ठान के अनुरूप सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई। उन्होंने कहा कि पूरे आयोजन के दौरान सभी व्यवस्थाएं योजनानुसार संचालित हुईं।

अब रथयात्रा की तैयारियों पर टिकी निगाहें
स्नान पूर्णिमा के शांतिपूर्ण समापन के साथ अब विश्वविख्यात रथयात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। 15 दिवसीय अनसर काल के बाद महाप्रभु जगन्नाथ, महाप्रभु बलभद्र और देवी सुभद्रा नेत्रोत्सव के अवसर पर पुनः भक्तों को दर्शन देंगे और इसके बाद भव्य रथयात्रा के लिए श्रीगुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।

Topics: DevoteesOdishadarshanPuriSnana PurnimaMahaprabhu's divine bath
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