इंदिरा गांधी ने क्यों डरकर लगाया था आपातकाल?
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इंदिरा गांधी ने क्यों डरकर लगाया था आपातकाल?

आज भी आपातकाल के वे साक्षी हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है, जब जनता अन्याय के सामने झुकने के बजाय उसका प्रतिरोध करना चुने।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 29, 2026, 04:06 pm IST
in भारत

“हमें लगा था कि लोकतंत्र में अपनी बात कहने का अधिकार हमेशा रहेगा, लेकिन आपातकाल ने सब कुछ बदल दिया। रातों-रात लोगों को उठाया गया, विरोध की आवाज़ों को दबाया गया और सत्ता के खिलाफ बोलना अपराध बना दिया गया। उस समय डर सिर्फ जेल का नहीं था, बल्कि अपनी आज़ादी खो देने का था।” ऐसी ही अनगिनत गवाहियां उस दौर की कहानी कहती हैं, जब सत्ता को बचाने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों को किनारे कर दिया गया था। लेकिन उसी अंधेरे समय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में एक ऐसी आवाज़ उठी, जिसने लोगों को अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिया। यह केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प था। आज भी आपातकाल के वे साक्षी हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है, जब जनता अन्याय के सामने झुकने के बजाय उसका प्रतिरोध करना चुने।

 

Topics: संविधानलोकनायक जयप्रकाश नारायणनागरिक अधिकारोंलोकतंत्र की रक्षाआपातकाललोकतंत्र
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