प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशल्स के दौरे पर रहे। इस दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के 50 साल पूरे होने के मौके पर 9 अहम समझौते किए गए। इनमें एक एक्सट्राडिशन ट्रीटी (प्रत्यर्पण संधि) भी शामिल है, जो दोनों देशों के बीच अपराधियों के आदान प्रदान में मदद करेगी।
दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हरमिनी से मुलाकात की। मोदी ने कहा कि भारत का विजन है कि हिंद महासागर को अवसरों का महासागर बनाया जाए। दोनों देश ज्यादा समावेशी विकास के लिए साथ काम करना चाहते हैं।
राष्ट्रीय सभा में मोदी का संबोधन
सेशेल्स की नेशनल असेंबली में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश लोकतंत्र, कानून का राज और लोगों को केंद्र में रखकर शासन करने जैसे मूल्यों को साझा करते हैं। उन्होंने जलवायु परिवर्तन पर जोर देते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ, खासकर द्वीप राष्ट्र, इसकी सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं। मोदी ने साफ कहा कि जलवायु कार्रवाई निष्पक्ष, जिम्मेदार और समान होनी चाहिए। जिन देशों ने सबसे कम प्रदूषण किया है, उन्हें सबसे ज्यादा नुकसान नहीं उठाना चाहिए। यही क्लाइमेट जस्टिस की भावना है।
आर्थिक और विकास सहयोग
सेशेल्स के राष्ट्रपति ने भारत के 175 मिलियन डॉलर के स्पेशल इकोनॉमिक पैकेज की सराहना की। इसमें 125 मिलियन डॉलर का रुपया लाइन ऑफ क्रेडिट और 50 मिलियन डॉलर का ग्रांट शामिल है। दोनों देशों ने 1250 करोड़ रुपये के अंब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट के लिए भी MoU साइन किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सेशेल्स को सिर्फ द्वीपों का समूह नहीं मानता, बल्कि करीबी भागीदार मानता है। उन्होंने डायरेक्ट शिपिंग लिंक्स, लोकल करेंसी में ज्यादा व्यापार और बेहतर कनेक्टिविटी पर जोर दिया, ताकि व्यापार और पर्यटन बढ़ सके। दोनों देश कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर भी बात कर रहे हैं।
अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे
- समुद्री सुरक्षा (मैरिटाइम सिक्योरिटी)
- स्वच्छ ऊर्जा
- स्वास्थ्य
- अपराध रोकथाम
- लोगों के बीच संबंध
मोदी ने कहा, “भारत एक ऐसे हिंद महासागर की कल्पना करता है जहां समुद्री सुरक्षा के साथ आर्थिक समृद्धि भी बढ़े। हमारे साझेदारी का आधार आकार नहीं, बल्कि आदर और भरोसा है। हम साथ-साथ आगे बढ़ते हैं, न कि अलग-अलग।”
ऐतिहासिक संदर्भ
यह यात्रा भारत-सेशेल्स के कूटनीतिक संबंधों के 50 साल और सेशेल्स की गोल्डन ज्यूबिली (50वीं वर्षगांठ) के मौके पर हुई। मोदी ने 28 जून 2026 को नेशनल डे परेड में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों को अलग नहीं करता, बल्कि जोड़ता है। दोनों देश ग्लोबल साउथ के हितों को आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को वर्तमान हकीकत के हिसाब से बदलने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।











