“रात में घर से उठाकर ले जाते थे, थानों में घंटों पूछताछ होती थी और विरोध की कीमत यातनाओं से चुकानी पड़ती थी।” आपातकाल का वह दौर आज भी कई लोगों के लिए एक दर्दनाक स्मृति है। जिन लोगों ने उसे करीब से देखा और झेला, उनकी गवाही बताती है कि कैसे भय, दमन और सत्ता का दबाव आम नागरिकों के जीवन का हिस्सा बन गया था।
Emergency Exclusive में देखिए उन लोगों की आपबीती, जिन्होंने लोकतंत्र के उस कठिन दौर को अपनी आंखों से देखा और सहा।
















