आज ही के दिन 1972 में भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ था। इसमें भारत की ओर से इंदिरा गांधी और पाकिस्तान की तरफ से वहां के तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने समझौता पत्र पर सहमति दिया था। 1971 के युद्ध में भारत ने पाकिस्तान पर बड़ी और अहम जीत हासिल किया था। भारत ने पूर्वी पकिस्तान को काटकर बांग्लादेश बना दिया था। इस समझोते में भारत के स्थिति काफी मजबूत थी क्योंकि भारत के पास 93000 पाकिस्तानी युद्धबंदी के अलावे 1971 में वर्तमान पाकिस्तान के कई इलाको पर कब्ज़ा भी था।
शिमला समझौते में PoJK को लेकर क्यों नहीं बनी सहमति?
इस समझौते में इंदिरा गांधी ने 93000 पाकिस्तानी सेना के युद्धबंदियों और वर्तमान पाकिस्तान के कुछ इलाको को बिना किसी रियायत के वापस कर दिया था। इंदिरा गाँधी अगर चाहती तो युद्धबंदियों और पाकिस्तानी इलाको के वापसी के बदले पाकिस्तान से पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर को भारत में वापस लेने का सुनहरा मौका था। 93000 पाकिस्तानी युद्धबंदियों के परिवारों का पाकिस्तान की सरकार पर इतना दबाव था की पाकिस्तान की सरकार पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर को आसानी से भारत को वापस कर सकती थी।
1960 में ऐसी ही एक मौका को जवाहरलाल नेहरू ने गंवा दिया था जब सिंधु जल समझौता के समय उन्होंने पाकिस्तान के तानाशाह अयूब खान से किसी भी प्रकार का रियायत नहीं लिया था। इंदिरा गांधी के द्वारा किये गए शिमला समझौते का बहुत ही आलोचना किया जाता है। पहला की यह समझौता पक्की शांति लाने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। इसकी मुख्य कारण समझौता लागू करने के तरीकों की कमी और सामरिक तौर पर इंदिरा गाँधी द्वारा कोई भी रज़ामंदी नहीं करवाना है। इंदिरा गाँधी ने इस समझौते में पाकिस्तानी हिरासत में रखे गए 54 भारतीय युद्धबंदीयो को वापस लाने के लिए कोई भी बातचीत नहीं किया था।

















