राहुल गांधी ने हाई कोर्ट में प्रकट किया खेद!
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‘कन्फ्यूजन’ या राजनीतिक आरोपों की जल्दबाजी? राहुल गांधी का बयान पर खेद, लेकिन सवाल बरकरार !

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में राहुल गांधी ने लिखित आवेदन देकर पनामा पेपर्स मामले में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम लेने पर खेद प्रकट किया है। जानिए कोर्ट की इस बड़ी सुनवाई की पूरी रिपोर्ट।

Written byडाॅ. मयंक चतुर्वेदीडाॅ. मयंक चतुर्वेदी
Jun 25, 2026, 12:34 am IST
inभारत, मध्य प्रदेश
Rahul Gandhi

राहुल गांधी

‘कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है, सॉल्यूशन कुछ पता नहीं’ गीत मशहूर फिल्म ‘3 इडियट्स’ का है। यह गाना फिल्म के लोकप्रिय ट्रैक ‘आल इज़ वेल’ का एक हिस्सा है। अब लगता है कि राहुल गांधी के मानहानी मामले में भी ‘आल इज़ वेल’ हो सकता है, क्‍योंकि वे कन्फ्यूजन में वो नाम बोल गए जो नाम उन्‍हें बोलना नहीं था!

दरअसल, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर अपने एक पुराने बयान को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में उन्होंने स्वीकार किया है कि 2018 की चुनावी सभा में पनामा पेपर्स मामले का उल्लेख करते समय उन्होंने “कन्फ्यूजन” में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय चौहान का नाम ले लिया था।

अब इस स्वीकारोक्ति के बाद मामले में समझौते की संभावनाएं बढ़ गई हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने राहुल गांधी के उन विवादास्पद बयानों की लंबी श्रृंखला को भी फिर चर्चा में ला दिया है, जिन पर समय-समय पर विरोध, कानूनी कार्रवाई और मानहानि के मुकदमे दर्ज होते रहे हैं।

हाईकोर्ट में राहुल गांधी का खेद प्रकट करने वाला आवेदन

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई में राहुल गांधी ने एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। इसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विवादित बयान कार्तिकेय सिंह चौहान के संदर्भ में नहीं था और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। राहुल गांधी ने अपने आवेदन में कहा कि चुनावी भाषण के दौरान गलती से कार्तिकेय चौहान का नाम आ गया था। उनका आशय किसी अन्य व्यक्ति का नाम लेने का था।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि विवादित बयान के अगले दिन ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया था कि वे तत्कालीन छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह का नाम लेना चाहते थे, लेकिन भ्रमवश कार्तिकेय चौहान का नाम ले बैठे। मामले की सुनवाई जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। अदालत ने शिकायतकर्ता कार्तिकेय चौहान से जवाब मांगा है और कहा है कि उनके पक्ष को सुनने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

क्या था पूरा विवाद?

यह मामला वर्ष 2018 के झाबुआ विधानसभा उपचुनाव के दौरान राहुल गांधी के एक चुनावी भाषण से जुड़ा है। उस समय कांग्रेस अध्यक्ष रहे राहुल गांधी ने एक जनसभा में आरोप लगाया था कि पनामा पेपर्स लीक मामले में कार्तिकेय चौहान का नाम सामने आया है। अपने भाषण में उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पनामा पेपर्स मामले में जेल जाना पड़ा, लेकिन मध्यप्रदेश में कार्रवाई नहीं हुई। इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

कार्तिकेय चौहान ने दावा किया कि उनका नाम पनामा पेपर्स प्रकरण में कभी शामिल नहीं रहा और राहुल गांधी के आरोपों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा तथा सार्वजनिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा।

एमपी-एमएलए कोर्ट से हाईकोर्ट तक मामला

राहुल गांधी के बयान के बाद कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए न्‍यायालय में मानहानि का परिवाद दायर किया था। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की। प्राथमिक सुनवाई के बाद अदालत ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया था। इसी समन और निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

उन्होंने न केवल समन को चुनौती दी बल्कि व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की भी मांग की। अब उनके खेद प्रकट करने वाले आवेदन के बाद मामले में समझौते की संभावना बढ़ती दिखाई दे रही है।

राजनीति में बयान और जवाबदेही का प्रश्न

भारतीय लोकतंत्र में चुनावी भाषण अक्सर तीखे आरोप-प्रत्यारोपों से भरे होते हैं, लेकिन जब किसी व्यक्ति का नाम लेकर भ्रष्टाचार, घोटाले या आपराधिक मामलों से जोड़ने के आरोप लगाए जाते हैं, तब राजनीतिक विमर्श कानूनी दायरे में प्रवेश कर जाता है। राहुल गांधी के इस मामले ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि सार्वजनिक जीवन में बड़े नेताओं के बयान तथ्यों की कसौटी पर कितने खरे होने चाहिए।

राहुल गांधी और विवादित बयानों का पुराना इतिहास

कार्तिकेय चौहान प्रकरण पहला अवसर नहीं है जब राहुल गांधी के किसी बयान पर कानूनी विवाद खड़ा हुआ हो। पिछले एक दशक में उनके कई बयान अदालतों और राजनीतिक विवादों का विषय बने हैं।

‘मोदी सरनेम’ टिप्पणी और मानहानि मामला

सबसे चर्चित मामला 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिया गया बयान था, जिसमें राहुल गांधी ने कहा था, “सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है?” इस टिप्पणी को लेकर गुजरात के भाजपा विधायक पूर्णेश मोदी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया। सूरत की अदालत ने 2023 में राहुल गांधी को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष की सजा सुनाई थी। इसी फैसले के कारण उनकी लोकसभा सदस्यता भी समाप्त हो गई थी। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी और उनकी सदस्यता बहाल हो गई।

‘चौकीदार चोर है’ विवाद

राफेल विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगातार “चौकीदार चोर है” का नारा दिया था। जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश को भी इस नारे से जोड़कर प्रस्तुत किया गया तो भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने अवमानना याचिका दायर की। बाद में राहुल गांधी ने सर्वोच्च न्यायालय में खेद व्यक्त करते हुए कहा कि चुनावी उत्साह में यह टिप्पणी की गई थी और अदालत का इससे कोई संबंध नहीं था।

वीर सावरकर पर टिप्पणी

राहुल गांधी द्वारा बार-बार की गई वीर सावरकर संबंधी टिप्पणियों पर भी कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए। महाराष्ट्र में विशेष रूप से शिवसेना और अन्य संगठनों ने इन बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। कुछ मामलों में मानहानि संबंधी शिकायतें भी दर्ज कराई गईं। सावरकर के परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने इन टिप्पणियों को ऐतिहासिक तथ्यों का अपमान बताया।

आरएसएस और राजनीतिक हिंसा पर बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लेकर राहुल गांधी के कई बयान विवादों में रहे हैं। उन्होंने एक समय महात्मा गांधी की हत्या और आरएसएस के बीच संबंधों को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर विभिन्न राज्यों में आपराधिक शिकायतें दर्ज कराई गईं।

चीन, सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा पर बयान

भारत-चीन सीमा विवाद, डोकलाम और लद्दाख जैसे मुद्दों पर राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर भी भाजपा ने उन पर देश की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। कई राष्ट्रवादी संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और कुछ स्थानों पर शिकायतें भी दर्ज कराई गईं।

क्या इस बार ‘ऑल इज़ वेल’ होगा?

कार्तिकेय चौहान मानहानि मामले में राहुल गांधी द्वारा व्यक्त किया गया खेद इस पूरे विवाद को नया मोड़ देता है। यदि शिकायतकर्ता पक्ष अदालत में नरम रुख अपनाता है तो समझौते की संभावना बन सकती है। लेकिन यह प्रकरण सिर्फ एक कानूनी विवाद नहीं है। यह सार्वजनिक जीवन में राजनीतिक नेताओं की जवाबदेही, तथ्यों की शुद्धता और चुनावी भाषणों की मर्यादा पर भी महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।

राहुल गांधी की स्वीकारोक्ति ने यह तो स्पष्ट कर दिया है कि विवादित बयान में नाम लेने में त्रुटि हुई थी, किंतु इसके साथ ही यह बहस भी तेज हो गई है कि राष्ट्रीय स्तर के नेताओं द्वारा लगाए जाने वाले आरोपों की तथ्यात्मक जांच और जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है। अब आने वाले दिनों में हाईकोर्ट का रुख न सिर्फ इस मामले का भविष्य तय करेगा, बल्कि राजनीतिक विमर्श में जवाबदेही की सीमा को लेकर भी एक महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है। जैसा कि उम्‍मीद जताई जा रही है।

Topics: कार्तिकेय चौहान मानहानि मामलाशिवराज सिंह चौहान पुत्रपनामा पेपर्स विवाद 2018राहुल गांधी खेद प्रकट आवेदनएमपी हाई कोर्ट सुनवाईMadhya Pradesh Politics BreakingPanchjanya newsRahul Gandhi Defamation Case MP High Court
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
डाॅ. मयंक चतुर्वेदी
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और हिंदुस्थान समाचार से संबद्ध हैं। [Read more]
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